सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का कहना है कि पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे द्वारा अपनी पुस्तक में किए गए खुलासे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अत्यंत गंभीर और चिंताजनक सवाल खड़े करते हैं। पुस्तक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, देश की रक्षा से जुड़े एक निर्णायक और संवेदनशील क्षण में राजनीतिक नेतृत्व जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा और सेना के साथ मजबूती से खड़ा नहीं हुआ। जब इस तरह की बातें देश के एक पूर्व सेनाध्यक्ष द्वारा कही जाती हैं, तो उन्हें नज़रअंदाज़ करना या हल्के में लेना अस्वीकार्य है।
इन गंभीर खुलासों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी और सरकार की ओर से किसी भी स्पष्ट स्पष्टीकरण का अभाव गहरी चिंता का विषय है। इससे भी अधिक आपत्तिजनक है लोकसभा में रक्षा मंत्री और गृह मंत्री द्वारा यह कहकर इस मुद्दे पर चर्चा रोकने का प्रयास कि संबंधित पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है। इस आधार पर विपक्ष के नेता को राष्ट्रीय महत्व के विषय को उठाने से रोकना संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध है। यह आचरण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अक्षम्य चूकों को छिपाने और जिम्मेदार लोगों को बचाने का सुनियोजित प्रयास प्रतीत होता है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर जवाबदेही से बचना लापरवाही और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव को दर्शाता है। सशस्त्र बलों और सुरक्षा कर्मियों का मनोबल तभी बनाए रखा जा सकता है जब संकट के समय राजनीतिक नेतृत्व साहस, स्पष्टता और पारदर्शिता के साथ सामने आए।
पार्टी मांग करती है कि सरकार पूरे प्रकरण पर देश को विश्वास में ले, संसद के पटल पर स्पष्ट और तथ्यात्मक बयान दे तथा यह साफ़ करे कि उस समय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णयों में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका और जिम्मेदारी क्या थी। राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठे सवालों का समाधान चुप्पी या टालमटोल से नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता से ही संभव है।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मोबाइल: 9934443337






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