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होलिका की अग्नि में क्यों डाली जाती है लकड़ी? 

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 होली के त्योहार को मनाने से पहले फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन किया जाता है. ये पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, आज शाम 05 बजकर 18 मिनट पर पूर्णिमा तिथि शुरू हो रही है. ऐसे में आज प्रदोष काल के समय में होलिका दहन करना सही रहेगा. क्योंकि कल पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लग रहा है.

वहीं द्रिक पंचांग के अनुसार, 03 मार्च यानी फाल्गुन पूर्णिमा के दिन 06 बजकर 22 मिनट से लेकर 08 बजकर 50 मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है. ऐसे में कल भी होलिका दहन करना सही रहेगा. होलिका माता की पूजा के समय अग्नि में बहुत सी चीजें अर्पित की जाती हैं. मान्यता है कि होलिका माता की पूजा करने से जीवन से नकारात्मकता दूर होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि होलिका की अग्नि में लकड़ी क्यों डाली जाती है?

होलिका दहन में लकड़ी डालने का पौराणिक रहस्य
होलिका भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद की बुआ थी. भक्त प्रह्लाद की कथा ही होलिका दहन के त्योहार का आधार माना जाता है. कथा के अनुसार, होलिका को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि अग्नि उसको नहीं जला सकेगी. यही कारण था कि हिरण्यकश्यप के कहने पर वो प्रह्लाद को लेकर अग्नि पर बैठी, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका स्वयं जल गई.

यह घटना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है. लकड़ी जलाना उसी घटना का प्रतिकात्मक रूप माना जाता है, इसलिए होलिका की अग्नि में लकड़ी डाली जाती है. इसका मतलब है अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता को अग्नि में समर्पित करना.

4 मार्च को मनाई जाएगी होली
होलिका दहन के बाद 04 मार्च की सुबह रंगों वाली होली यानी धुलेंडी मनाई जाएगी. यही वह दिन है जब लोगों द्वारा गुलाल, रंग और मिठाइयों के साथ रिश्तों में मिठास घोली जाती है.

Ramswaroop Mantri

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