इंदौर
सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ अब इसके सकरात्मक परिणाम सामने आ रहे है। गर्मी में जनता कर्फ्यू के दौरान शहर की छतों ने सूरज की किरणों से काफी बिजली बनाई है। इस दौरान भरपूर गर्मी रही और प्रतिदिन सूरज की किरणें साढ़े बारह घंटे तक मौजूद होने से सौर ऊर्जा से बिजली बनने का काम काफी तेजी से चला। इंदौर, उज्जैन, महू, पीथमपुर, देवास, रतलाम आदि शहरों में 1700 छतों ने 4 करोड़ रु. को उत्पादित कीमत की बिजली बनाई है। अकेले इंदौर शहर के 1100 घरों में सोलर ऊर्जा से बिली बन रही है।
प्रदेश में सबसे ज्यादा रूफ टॉप सोलर एनर्जी पर काम इंदौर क्षेत्र में हुआ है। अंचल के 1700 स्थानों पर सोलर पैनल के माध्यम से बिजली उत्पादन हो रहा है। कोरोना कर्फ्यू के दौरान इंदौर शहर की 1100 छतों से 40 लाख यूनिट और अंचल की छतों से कुल 65 लाख यूनिट बिजली उत्पादित हुई है।
एमवायएच सहित दो अस्पतालों और कॉलेज की सोलर पैनलों से ज्यादा बिजली
सबसे ज्यादा उत्पादन शहर में एमवाय अस्पताल, मानसिक रोगी अस्पताल और अटल बिहारी कालेज की सोलर पैनलों से हुआ। इस अवधि में 25-25 हजार यूनिट बिजली मिली है। कचरा ट्रांसफर स्टेशनों की छतों से भी 50 हजार यूनिट से ज्यादा उत्पादन हुआ है। शहर के 1100 घरों, बंगलों की छतों ने भी 300 से 800 यूनिट बिजली औसत उत्पादन किया है। इनमें घर, दुकान, कार्यालय, कारखाने, सरकारी व निजी कार्यालय की छतों से प्रतिदिन बिजली सोलर पैनल के माध्यम से तैयार हो रही है। स्मार्ट सिटी इंदौर के जागरूक लोगों में रूफ टॉप सोलर एनर्जी को लेकर ज्यादा रुचि है। इसी कारण बिजली कंपनी के सभी जोन के अंतर्गत इस तरह बिजली उत्पादित हो रहा है।
बारिश-ठंड में उत्पादन प्रभावित
बारिश के समय बादल और ठंड के दिनों में दिन छोटे होने के कारण सोलर बिजली का उत्पादन 40 प्रतिशत घट जाता है। बारिश में सूरज कई दिनों तक बादलों में लुकाछुपी करता है। शीतकाल में सूरज की किरणों की उपलब्धता नौ से साढ़े नौ घंटे ही रहती है इसलिए बिजली उत्पादन क्षमता कम हो जाती है जबकि गर्मी में दिन बड़े होने से सूरजे की किरणें भी काफी देर तक रहती है। इसके चलते इस अवधि में सोलर से बिजली उत्पादन ज्यादा होता है।
घरों और दफ्तरों में ज्यादा उत्पादन
मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के एमडी अमित तोमर के मुताबिक सोलर पैनल से बिजली बनाने के लिए घरों एवं दफ्तरों की छतों का उपयोग इंदौर में सबसे ज्यादा है। सरकार और पश्चिम क्षेत्र बिजली कंपनी सोलर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। हितग्राहियों को सब्सिडी का लाभ भी दिलाया जा रहा है। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त हैं।
भारी भरकम बिजली बिल से छुटकारा
केंद्र और राज्य सरकारें लगातार सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने पर बढ़ावा दे रही है। सोलर पैनल को कहीं भी इंस्टॉल किया जा सकता है और भारी भरकम बिजली बिलों से निजात पाई जा सकती है। इसके लिए 30 फीसदी सबसिडी देने का प्रावधान है। एक सोलर पैनल की कीमत करीब एक लाख रुपए होती है। सब्सिडी मिलने पर एक किलोवॉट का सोलर प्लांट 60 से 70 हजार रुपए में स्थापित हो जाता है।





