अग्नि आलोक
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लघु कविताएं…..!

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  1. नंगापन
    कहां से लाती हो
    इतना नंगापन ?
    ये अधखुली छातियां
    तीन चौथाई जांघें
    पतली लेस के उपर नीचे
    नंगी पीठ

कहां से लाती हो
इतना नंगापन ?
मैंने पूछा उससे

उसी बाज़ार से
जहां से लाते हो तुम
इतने कपड़े
कहा उसने.

  1. परमवीर चक्र
    उसने
    सोते हुए बच्चों को
    नींद के उस पार पहुंचा कर
    घर लौट कर
    आराम की नींद ली थी
    पूरी रात

अगली सुबह
उसे तैयार हो कर
समय पर पहुंचना था लेने
परम वीर चक्र.

  1. तथागत
    उस पर
    किसी की मौत का
    असर नहीं होता
    किसी की चीख
    नहीं सुनाई देती उसे
    ठंढ में
    लेदरा से चिपके हुए कंकाल
    नहीं कटकटाते उसके दांत

वह हमारे समय का
तथागत है.

  1. आग
    बर्फीले हाथों से छू कर
    आग को महसूस करना
    आसान नहीं है

ज़रूरत है कि
आग तुम्हारे हाथों में भी रहे
छूते हुए
आग.

  1. बेड़ियां
    हथौड़ी और छेनी ले कर
    वह बनाता जा रहा है बेड़ियां
    काटने की कोशिश में

भागे हुए क़ैदी की रिहाई
इतना आसान नहीं होता
काटने के क्रम में
बनती जाती हैं
कई बेड़ियां

सुब्रतो चटर्जी

Ramswaroop Mantri

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