भोपाल
कोरोनाकाल में जीवनसाथी को खोने के बाद से श्यामा बाई बेसहारा हाे गईं। उन्होंने शादीशुदा बेटी के घर न रहने का निर्णय लिया और अब वे आसरा वृद्धाश्रम में रहने आई हैं। हालांकि उनकी बेटी चाहती है कि वे उनके साथ रहें, लेकिन उन्होंने कहा कि वे बेटी के घर नहीं रहेंगी।

बेटी ने वृद्धाश्रम प्रबंधन से आग्रह किया है कि उन्हें कुछ दिन आश्रम में रहने दें। यह अकेला मामला नहीं है। काेराेनाकाल में जीवन साथी को खोने के बाद अब वृद्धाश्रम में प्रवेश आवेदन बढ़ गए हैं। इस माह आसरा वृद्धाश्रम में 4, आनंदधाम में 2 और अपना घर में 2 नए बुजुर्ग रहने पहुंचे हैं। दरअसल, लॉकडाउन के चलते भोपाल के तीनों वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के नए एडमिशन पर प्रतिबंध था, जो 16 माह बाद हटा है।
रिटायर होते ही आ गईं आनंदधाम
आनंदधाम के सचिव आरआर सुरंगे ने बताया कि सुरेखा असंगे व नीलिमा तिवारी को आश्रय दिया है। दोनों ने जीवन साथी को खो दिया है। सुरेखा नौकरी करती थीं और नीलिमा हाउस वाइफ थीं। नीलिमा ने 6 माह पहले आवेदन किया था। प्रतिबंध हटते ही वे आश्रम आ गईं। ऐसे ही सुरेखा हैं। ये नौकरी करती थीं। रिटायमेंट के बाद ये आंनदधाम आ गई। इन्हें भी चार माह इंतजार करना पड़ा।
ये शर्तें भी रखी हैं…दोनों डोज, निगेटिव रिपोर्ट देने पर ही आश्रम में मिला आसरा
अपना घर की संचालिका माधुरी मिश्रा ने बताया कि गोविंद गौड़ की पत्नी की मौत हो चुकी है। इन्हें लकवा लग गया था। डेढ़ साल से अपना घर आना चाह रहे थे। जब इन्होंने वैक्सीन के दोनों डोज लगवा लिए और कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट दी तो इन्हें एडमिशन दे दिया। आसरा वृद्धाश्रम की मैनेजर राधा चौबे ने बताया कि उनके यहां 4 बुजुर्गों को एडमिशन दिया है। उन्हें 13 माह इंतजार करना पड़ा।




