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अगस्त क्रांति स्मृति अवसर पर मोदी सरकार की गैर जिम्मेदाराना हरकत या षड्यंत्र ?

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जारी सरकारी विज्ञापन में अगस्त क्रांति के किसी नायक की तस्वीर नहीं 
अगस्त क्रांति के सूत्रधार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी अनदेखा किया गया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी तस्वीर लगाई गई
अमर शहीद महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तस्वीरों के साथ माफीखोर सावरकर को जगह देकर देश के सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान किया गया
* अजय खरे

अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर जारी सरकारी विज्ञापन चित्र में अगस्त क्रांति के सूत्रधार प्रणेता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहीं नजर नहीं आ रहे हैं और न ही उनके नाम का उल्लेख है । भारत छोड़ो आंदोलन के किसी भी राष्ट्रीय नेता की तस्वीर या नाम का उल्लेख नहीं है । सरकार के द्वारा जारी विज्ञापन में इस मौके पर आजाद भारत में जन्म लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दर्शाया गया काफी बड़ा चित्र , सही नहीं लगता है . इसके अलावा दर्शाए गए 7 चित्रों में ऊपर के तीसरे क्रम का चित्र काली टोपी पहने माफीखोर सावरकर का है जिसने अगस्त क्रांति भारत छोड़ो आंदोलन का सिर्फ विरोध ही नहीं किया था बल्कि अंग्रेजों का साथ दिया था । किसी भी माफीखोर मुखबिर व्यक्ति को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं माना जा सकता है। गद्दार व्यक्ति देश का गौरव नहीं , कलंक होता है ।

मुखबिरी के ईनाम बतौर अंग्रेजो के द्वारा सावरकर को उस समय ₹60 प्रति माह की पेंशन मुकर्रर की गई थी , जो राशि कलेक्टर के वेतन से भी ज्यादा थी । सावरकर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की षडयंत्र पूर्वक हत्या करने का मुकदमा चला था लेकिन पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में वह सजा से बच गया । चित्र में सबसे पहले दर्शाए गए नेताजी सुभाष चंद्र बोस महान क्रांतिकारी एवं अमर शहीद हैं ।

1942 के अगस्त क्रांति के कुछ साल पहले से उन्होंने भारत से बाहर जाकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ सशस्त्र क्रांति के लिए काम शुरू किया था । सुभाष चन्द्र बोस पनडुब्बी द्वारा जर्मनी से जापानी नियंत्रण वाले सिंगापुर पहुँचे और पहुँचते ही जून 1943 में टोकियो रेडियो से घोषणा की कि अंग्रेजों से यह आशा करना बिल्कुल व्यर्थ है कि वे स्वयं अपना साम्राज्य छोड़ देंगे। हमें भारत के भीतर व बाहर से स्वतंत्रता के लिये स्वयं संघर्ष करना होगा ।

4 जून 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुए महात्मा गांधी को ‘देश का पिता’ कहकर संबोधित किया था इसके बाद 6 जुलाई 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने एक बार फिर रेडियो सिंगापुर से एक संदेश प्रसारित कर गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया । 18 अगस्त, 1945 को उनका जापानी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, यह दुर्घटना जापान अधिकृत फोर्मोसा (वर्तमान ताइवान) में हुई थी . चित्र में दूसरे क्रम पर दर्शाए गए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं . उन्होंने स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार का नारा दिया था . उनकी मृत्यु 1 अगस्त 1920 को हो गई थी . दर्शाए गए चित्र में चौथे पांचवें और छठे क्रम में महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव हैं जिनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के विरोध में अंग्रेजों के द्वारा 23 मार्च 1931 को जबरिया फांसी पर लटका दिया गया था . सातवें क्रम पर अंतिम तस्वीर अमर शहीद क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की है

. इलाहाबाद में अंग्रेज पुलिस से हुई भयंकर गोलीबारी में आजाद ने तीन पुलिस कर्मियों को ढेर कर दिया और कई लोग घायल हो गए। अंत में जब उनकी पिस्तौल में एक ही गोली बची तो उन्होंने अपने आपको अंग्रेजों के हवाले करने के बजाय गोली खुद को मारकर वीरगति को प्राप्त हुए। यह दुखद घटना 27 फ़रवरी 1931 के दिन घटित हुई और हमेशा के लिये इतिहास में दर्ज हो गयी। 
अगस्त क्रांति पर जारी सरकारी विज्ञापन में देश के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ अगस्त क्रांति के नायकों की तस्वीरें अवश्य लगाई जाना चाहिए . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर की जरूरत नहीं है . स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की छोटी तस्वीर के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी तस्वीर बेहद आपत्तिजनक नजर आ रही है .

Ramswaroop Mantri

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