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डेवलपर के फंसे 32,600 करोड़, 50 हजार श्रमिक बेकाम, विलंब डेवलपर के साथ बैंक, सरकार,आम आदमी, व्यापारी और मजदूर सब पर भारी

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भोपाल

रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को मंजूरी देने में हो रहा विलंब डेवलपर के साथ बैंक, सरकार, आम आदमी, व्यापारी और मजदूर सब पर भारी पड़ रहा है। रियल एस्टेट डेवलपर की संस्था क्रेडाई ने अनुमान लगाया है कि पिछले एक साल से मंजूरी अटकने से डेवलपर के पूरे प्रदेश में 32,600 करोड़ रुपए अटक गए हैं।

इस राशि पर डेवलपर को हर माह 1200 करोड़ रुपए से अधिक का ब्याज चुकाना पड़ रहा है। अटके प्रोजेक्ट्स पर करीब 1.10 लाख घर बनाए जाने थे। 80% लोग बैंकों से होम लोन लेकर घर खरीदते हैं। प्रोजेक्ट्स को मंजूरी न मिलने से संकटग्रस्त बैंकों ने 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक के कारोबार का अवसर गंवा दिया है। पूरे प्रदेश में सभी डेवलपर्स से मिले फीडबैक के आधार पर क्रेडाई ने अनुमान लगाया है कि इन प्रोजेक्ट्स पर काम हाेने की स्थिति में करीब 50 हजार प्रवासी मजदूरों को एक साल तक लगातार काम मिलता। अब वे बेकार हो गए हैं। क्रेडाई का अनुमान कहता है कि प्रोजेक्ट्स को समय पर मंजूरी मिल जाती तो अब तक सरकार केे खाते में 6,800 करोड़ रु. आ चुके होते। क्रेडाई मप्र के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल का कहना है कि हमने यह अध्ययन हर सेक्टर से जुड़े लोगों के बीच किया है। रेरा और सरकार को स्थिति की भयावहता समझनी चाहिए।

नुकसान सरकार को

  • घर की बिक्री पर 5% जीएसटी पर मिलते 1600 करोड़
  • स्टेंप ड्यूटी की हानि 4,000 करोड़ रु.
  • निर्माण सामग्री की बिक्री पर 5% की दर से मिलते 12,00 करोड़।

और बिल्डर्स को

  • पंजीयन के लिए जाते समय थी प्रोजेक्ट्स की लागत 11,000 करोड़
  • प्रोजेक्ट विलंब से हर माह 1200 करोड़ ब्याज

Ramswaroop Mantri

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