भोपाल. मध्य प्रदेश में सबसे बड़े महाघोटाले पर पर्दा डाल दिया गया. व्यापम से भी बड़ा ई टेंडर घोटाला है लेकिन राजनेताओं और नौकरशाहों के गठजोड़ के कारण पिछले तीन साल में सिर्फ 9 टेंडर्स में ही एफआईआर दर्ज हो सकी. जबकि जांच के दौरान 803 टेंडर्स में टेंपरिंग के सबूत मिले थे. इतना ही नहीं 2014 से 2017 के बीच हजारों टेंडर्स में गड़बड़ी के संकेत भी मिले थे. इसके बावजूद इस अरबों-खरबों के घोटाले में आगे एक भी एफआईआर नहीं करायी गयी. जिन टेंडर्स में तीन साल में अभी तक कार्रवाई नहीं हुई, उनमें जल संसाधन, सड़क विकास निगम, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय प्रशासन, नगर निगम स्मार्ट सिटी, मेट्रो रेल, जल निगम, एनेक्सी भवन समेत कई निर्माण काम करने वाले विभागों के टेंडर्स शामिल हैं. इसमें कई दलाल, संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और राजनेता भी शामिल हैं. ईओडब्ल्यू ने अपनी पहली एफआईआर अज्ञात नौकरशाहों और राजनेताओं के खिलाफ धारा 120B, 420, 468, 471, आईटी एक्ट 2000 की धारा 66, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 सहपठित धारा 13(2) के तहत दर्ज की थी.
मध्य प्रदेश का बहुचर्चित ई-टेंडर अब तक का सबसे बड़ा घोटाला साबित हुआ है. ईओडब्ल्यू ने शिवराज सरकार में हुए करीब 3000 करोड़ के ई-टेंडर घोटाले को लेकर सबसे पहली एफआईआर 10 अप्रैल 2019 को दर्ज करायी गयी थी. ये एफआईआर 9 टेंडर में टेंपरिंग को लेकर की गई थी. सभी 9 टेंडर्स जनवरी से मार्च 2018 के दौरान प्रोसेस हुए थे. इसके बाद 52 टेंडर जो अक्टूबर 2017 से मार्च 2018 के दौरान प्रोसेस हुए थे, उनमें से 42 टेंडरों में टेंपरिंग का खुलासा हुआ था. लेकिन जिन 42 टेंडरों की तकनीकी जांच भारत सरकार की इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम को करना थी वो आयी ही नहीं इसलिए आज तक इस केस में एफआईआर नहीं हो सकी. यह घोटाला पहले करीब 3000 करोड़ तक सीमित था, लेकिन आगे की जांच में यह घोटाला अरबों-खरबों तक पहुंचने का आंकलन किया गया था.विज्ञापन
नरोत्तम मिश्रा का नाम आते ही जांच ठंडे बस्ते में
कांग्रेस ने इसे एमपी के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा इस घोटाले की हमने अपनी सरकार में जांच की गई, तो सैकड़ों मामलों तक जांच पहुंच गई थी. बीजेपी सरकार बनते ही उनके मंत्री नरोत्तम मिश्रा और कई लोगों का नाम आने के कारण मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. बीजेपी सरकार के संरक्षण में घोटाला हुआ था.
नौकरशाह और राजनेताओं का गठजोड़..
जिन टेंडर्स में तीन साल में अभी तक कार्रवाई नहीं हुई, उनमें जल संसाधन, सड़क विकास निगम, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय प्रशासन, नगर निगम स्मार्ट सिटी, मेट्रो रेल, जल निगम, एनेक्सी भवन समेत कई निर्माण काम करने वाले विभागों के टेंडर्स शामिल हैं. इसमें कई दलाल, संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और राजनेता भी शामिल हैं. ईओडब्ल्यू ने अपनी पहली एफआईआर अज्ञात नौकरशाहों और राजनेताओं के खिलाफ धारा 120B, 420, 468, 471, आईटी एक्ट 2000 की धारा 66, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 सहपठित धारा 13(2) के तहत दर्ज की थी.
बीजेपी ने कही अपनी बात
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है. प्रदेश बीजेपी मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कमलनाथ की सरकार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि दम है तो गिरफ्तार करके दिखाओ. उस समय कांग्रेस सरकार ने बदनाम और गुमराह करने का काम किया था. सबूत पहले भी नहीं थे और अभी भी नहीं हैं. कांग्रेस सिर्फ लोगों को गुमराह और राजनेताओं को अपमानित कर रही है.
किसे बचाने की कोशिश
कमलनाथ सरकार के दौरान बीजेपी नेताओं और उनके स्टाफ के लोगों के नाम आने के बाद इस घोटाले पर जमकर सियासत हुई थी. लेकिन अब बीजेपी की सरकार में इस मामले में जांच पर ब्रेक लगने से फिर एक बार कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. ईओडब्ल्यू एजेंसी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिरकार किसके दवाब में जांच रोकी गयी और किसे बचाने की कोशिश की जा रही है.





