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कोरोना महामारी ने कर्मचारियों का आत्मविश्वास हिलाया…अमेरिका में 3.4 करोड़ ने 2021 में नौकरी छोड़ी, भारत के 82% इम्प्लॉई जॉब बदलने को तैयार

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याद कीजिए वो दौर जब कोरोना ने भारत में पैर पसारने शुरू किए थे। ऑफिस बंद हो गए। कुछ लोगों ने घर से काम करना शुरू किया और कुछ बेरोजगारी में घर पर ही बैठ गए। इन दो सालों में हालात बहुत तेजी से बदले। लोगों ने अपनी जॉब और करियर के बारे में नए सिरे से सोचना शुरू किया। अब एक ताजा सर्वे कहता है कि भारत में हर 5 में से 4 प्रोफेशनल इस साल अपनी नौकरी बदलने के लिए तैयार हैं।

ये स्टडी साफ इशारा है कि अमेरिका के ‘द ग्रेट रेजिग्नेशन’ की तरह भारत में ‘द ग्रेट रिशफल’ का ट्रेंड आता दिखाई दे रहा है। यानी जैसे अमेरिका में 2021 में 3.4 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया, वैसे ही भारत में करोड़ों लोग अपनी मौजूदा नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे हैं। भारतीयों पर ये सर्वे प्रोफेशनल नेटवर्किंग वेबसाइट लिंक्डइन और यूके की मार्केट रिसर्चर सेंससवाइड ने किया है।

इतनी बातें पढ़कर अब आपके मन में भी कई तरह के सवाल हिचकोले खाने लगे होंगे। चिंता मत कीजिए, भास्कर इंडेप्थ इसी के लिए तो है। हम इस पूरे मुद्दे से जुड़े पांच सवालों के जवाब दे रहे हैं।

1. द ग्रेट रेजिग्नेशन क्या है?

2. दुनिया के कौन-कौन से देश इसकी चपेट में आ चुके हैं?

3. भारत के हर 5 में से 4 इम्प्लॉई जॉब क्यों बदलना चाहते हैं?

4. इस्तीफे रोकने के लिए भारतीय कंपनियों को क्या करना चाहिए?

5. और आखिरी सवाल… 2022 में कौन-सी 15 नौकरियों का बोलबाला रहेगा?

तो चलिए, एक-एक करके इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं…

3 साल पहले हुई द ग्रेट रेजिग्नेशन की भविष्यवाणी

‘द ग्रेट रेजिग्नेशन’ टर्म को सबसे पहले 2019 में टेक्सास के एक प्रोफेसर एंथनी क्लॉट्ज ने उछाला था। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि लाखों लोग अपनी नौकरी से पलायन करेंगे। महज 2 साल में ये भविष्यवाणी सच साबित हो रही है।

इसकी बड़ी वजह कोरोना महामारी है। दरअसल, कोरोना के दौरान कई लोगों ने अपने करियर के बारे में नए सिरे से सोचा। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। ये इस्तीफे इतनी बड़ी संख्या में थे कि इन्हें ‘द ग्रेट रेजिग्नेशन’ नाम दिया गया। अमेरिका इसका सबसे बड़ा शिकार हुआ और धीरे-धीरे ये फिनोमिना दुनिया के और देशों में फैलता जा रहा है।

भारत में ‘द ग्रेट रिशफल’ के रूप में आया ट्रेंड
अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों की तरह भारत में उतनी बड़ी संख्या में नौकरी छोड़ने वाले तो नहीं हैं, लेकिन नौकरी बदलने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। लिंक्डइन ने 1,111 लोगों पर सर्वे के बाद पाया कि भारत के 82% इम्प्लॉई 2022 में नौकरी बदलने चाहते हैं। इसमें सबसे आगे फ्रेशर्स और जनरेशन Z के प्रोफेशनल्स हैं। इनके जॉब चेंज करने की तीन बड़ी वजहें हैं।

कर्मचारियों का पैसा बढ़ा दें तो इस्तीफे रुक सकते हैं

2021 में फॉर्च्यून और डेलोइट ने मिलकर 117 CEO पर एक सर्वे किया। सर्वे के मुताबिक 73% का मानना है कि स्किल्ड लेबर की कमी अगले 12 महीने में उनके बिजनेस को प्रभावित कर सकती है। 57% CEO का मानना है कि टैलेंट को आकर्षित करना और भर्ती करना उनके संस्थान की सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं 51% का मानना है कि अच्छे लोगों को नौकरी में बनाए रखना उनके यहां सबसे बड़ी चुनौती है। यानी स्किल्ड लेबर की कमी एक ग्लोबल चुनौती है।

ऐसे में लिंक्डइन के सर्वे में शामिल भारतीय प्रोफेशनल्स से जब पूछा गया कि कंपनियां ऐसा क्या करें कि वो इस्तीफा नहीं देंगे। ऐसे में सबसे ज्यादा तीन बातें सामने आईं। 42% लोगों ने ज्यादा सैलरी, 36% ने ज्यादा एप्रिसिएशन मिलने और 34% ने काम और जिंदगी के बीच बैलेंस मिलने पर इस्तीफा न देने की बात कही।

कोरोना महामारी ने कर्मचारियों का आत्मविश्वास हिलाया

सर्वे के मुताबिक 73% लोगों का कहना है कि महामारी के बाद उन्हें अपनी क्षमता पर शक होने लगा है। 67% लोग इंपोस्टर सिंड्रोम से गुजर रहे हैं, जिसमें उन्हें शक होता है कि कहीं उन्हें सब लोग नकारा न समझने लगें।

लोगों में आत्मविश्वास की ये कमी करीब दो साल से घरों में बैठकर काम करने की वजह से भी हो सकती है। सर्वे के मुताबिक ऑफिस के लोगों से आमने-सामने न मिल पाना, नई जिम्मेदारियां मिलना और टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल कर्मचारियों में तनाव के तीन बड़े कारण हैं।

Ramswaroop Mantri

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