सुल्तानपुर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के संयुक्त निदेशक का पद छोड़ खाकी से खादी पहनने वाले राजेश्वर सिंह के चुनाव लड़ने की खबरें तेज हैं। वह हाई प्रोफाइल केस से जुड़े रहे तथा मैक्सिस डील, 2जी स्पेक्ट्रम, कोयला स्कैम जैसी बड़ी जांच में भी शामिल रहे। प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक पद से वीआर एस लेने वाले राजेश्वर सिंह के सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने की खबरें हैं। उनके वीआरएस स्वीकार करने के बाद अब राजनीति मे आने की चर्चा है।

वर्दी में राजेश्वर सिंह
पिछले अगस्त में लिया था वीआरएस
पिछले साल अगस्त में लखनऊ में तैनाती के बाद वीआरएस के लिए आवेदन किया था। नौकरी के दौरान उन्होने सहारा प्रमुख सुब्रत राय को हाउसिंग फाइनेंस के नाम पर लोगों से गैर-कानूनी तरीके से 24000 करोड़ लेने के आरोप में जेल भेजवाने मे अहम रोल निभाया तथा एयरसेल-मैक्सिस डील मामले मे वित्त मंत्री पी चिदंबरम की भी जांच की। बतौर ईडी ऑफिसर राजेश्वर सिंह 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले, कोयला घोटाले, कॉमनवेल्थ गेम्स स्कैम जैसे केस की जांच में शामिल रहे है।

ईडी से वीआरएस लेकर बीजेपी का थामा था दामन
सुल्तानपुर के भदैंया ब्लॉक स्थित पखरौली के हैं रहने वाले
वीआरएस आवेदन के समय वह ईडी लखनऊ जोन के संयुक्त निदेशक के रूप में कार्यरत थे। 2009 में उत्तर प्रदेश पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर वह ईडी में शामिल हुए थे। उन्हें 2015 में स्थायी रूप से ईडी कैडर में शामिल कर लिया गया था। मूल रूप से वह यूपी के सुल्तानपुर जिले के भदैंया पखरौली के रहने वाले हैं और उत्तर प्रदेश काडर के प्रोविजनल पुलिस सर्विस (पीपीएस) ऑफिसर हैं। ईडी में उनकी पारी की शुरुआत से उन्हें हाई प्रोफाइल केसों पर काम करने का मौका मिला।

आय से अधिक संपति का लगा था आरोप
आय से अधिक संपत्ति का लगा था आरोप
राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा और कानून समेत अलग-अलग मंत्रालयों को सिंह के कामकाज के तौर-तरीकों की जांच की शिकायतें मिलीं। उन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले के भी आरोप लगे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा हालांकि, सिंह इनका डटकर मुकाबला करते रहे। मई 2011 में सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय, पत्रकार उपेंद्र राय और सुबोध जैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। राजेश्वर ने शिकायत की थी कि रॉय के साथ उपेंद्र और सुबोध जैन 2जी स्कैम में उनकी जांच में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस जांच के दायरे में सहारा ग्रुप के भी कुछ सौदे थे। कोर्ट ने 2013 में माना था कि इनके खिलाफ केस बनता है। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया था। सहारा इंडिया न्यूज नेटवर्क और उसके सहयोगी संस्थानों को सिंह से संबंधित किसी भी स्टोरी या प्रोग्राम के प्रकाशन और प्रसारण से रोक दिया गया था। सहारा प्रमुख को हाउसिंग फाइनेंस के नाम पर लोगों से गैर-कानूनी तरीके से 24000 करोड़ लेने के आरोप में जेल भेजा गया था। सहारा समूह की दो कंपनियों ने गैर-कानूनी तरीके से निवेशकों से यह पैसा जमा किया था। इसके बाद साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को निवेशकों से जुटाई गई रकम को सेबी के एस्क्रो अकाउंट में जमा करने को कहा था। जब सहारा ऐसा नहीं कर पाए तो उन्हें जेल भेज दिया गया था।

पी चिदंबरम के विरुद्ध की थी कार्रवाई
एयरसेल-मैक्सिस डील में जब फंस गए चिदंबरम
राजेश्वर सिंह से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला एयरसेल-मैक्सिस डील की जांच का है। उन्होंने इस सौदे को हरी झंडी देने के लिए तब के वित्त मंत्री चिदंबरम पर शिकंजा कसा। यह मामला विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से जुड़ा था। 2006 में एयरसेल-मैक्सिस डील को पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री के तौर पर मंजूरी दी थी। हालांकि, आरोप है कि उनके पास तब 600 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट प्रपोजल को ही मंजूरी देने का अधिकार था। राजेश्वर सिंह इस मामले में जांच का हिस्सा थे। आरोप था कि 600 करोड़ रुपये से बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए चिदंबरम को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी लेनी जरूरी थी। हालांकि, तत्कालीन वित्त मंत्री ने ऐसा नहीं किया। एयरसेल-मैक्सिस डील केस 3,500 करोड़ की एफडीआई की मंजूरी का था। इसके लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी से मंजूरी ली जानी थी। यह अलग बात है कि नियमों की अनदेखी कर चिदंबरम ने खुद ही इसे मंजूर कर दिया।

बीटेक डिग्री होल्डर हैं राजेश्वर सिंह
क्या है एजुकेशन बैकग्राउंड
राजेश्वर सिंह के पास बी. टेक की डिग्री है। उन्होंने पुलिस, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय विषय में पीएचडी की है। वह 1996 बैच के यूपी के पीपीएस अधिकारी के साथ ही यूपी पुलिस के अधिकारी के तौर पर काम कर चुके हैं।मूलतः सुल्तानपुर की निवासी उनकी बहन आभा सिंह, जो मुंबई में एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं, ने उनके संभावित कदम की सराहना करते हुए कहा कि देश को उनकी जरूरत है। राजेश्वर सिंह की शादी आईपीएस लक्ष्मी सिंह से हुई है।





