*सुसंस्कृति परिहार
जिस देश के पी एम की रगों में व्यापार का लहू बह रहा हो जो देश के तमाम संस्थानों को बेचकर भारत के बड़े व्यापारियों को दुनिया के व्यापारियों से आगे लाने का प्रयास ज़ोर शोर से कर रहे हों उस देश का अदना सा व्यापारी आत्महत्या करने जहर की पुड़िया खाते हुए वीडियो बनाए और मोदी जी को संदेश दे और उसे वायरल करने कहे।ये अच्छा नहीं लगता।दुख तो इस बात का है उसकी पत्नि ने पहले पति को रोकने का भरसक प्रयास किया ।पति के जहर देने के बाद अपने पल्लू से उसे निकालने और पति से उगलवाने की कोशिश करती रही लेकिन बाद में उसने जहर खा लिया वह दुनिया से चली गई जबकि पति आई सी यू में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक जीवन जीने की तो नहीं मौत के आगोश में जाने की कोशिश में है। चिकित्सक उसे जीवन देने प्रयासरत हैं।
इस घटना की जिस तरह मीडिया ने उपेक्षा की इससे तो यही लगता है कि ये निरर्थक कोशिशें हैं इनका कोई असर कहीं नहीं होता क्योंकि जब से व्यापार को बढ़ावा देने वाला सत्ता पर बैठा है तब से हकीकत यही है उसे किसी की मौत से कुछ लेना देना नहीं।कोरोना काल की लाखों मौतें, पुलवामा में शहीदों की मौतों से जिसे कोई फ़र्क ना पड़े वह एक राजीव के इस प्रयास और संदेश को क्यों सुनने वाला ?उसे तो गुजरात नरसंहार का अच्छा खासा अनुभव है जिसकी बिना पर उसे 2014में पी एम प्रोजेक्ट किया गया था।
इतना सब जानने के बाद मोदीजी को संदेश देना निरा भोलापन है। केंद्र के संसदीय पटल पर रखे आंकड़े बताते हैं सन 2018 से 2020 के बीच तीन वर्षों में बेरोजगारी की वजह से 9140 लोगों ने जान दी है ।केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के हवाले से बताया कि इस बीच दिवालिया होने और कर्ज के दबाव के कारण 16000 लोगों ने आत्महत्या की है ।एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया मानसिक दबाव कम करने के लिए देश भर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है रोजगार सृजन के भी कई कार्यक्रम चालू किए गए।ये तमाम व्यवस्थाएं कहां उपलब्ध हुई कोई जानकारी नहीं दी गई। हां, भाजपा आई टी सेल में बड़ी संख्या में युवा भर्ती ज़रुर हुए हैं जो सामाजिक वातावरण प्रदूषित करने में लगे हैं।
बहरहाल, राजीव तोमर जो बड़ौत नगर की एक गली में जूते की दुकान चला रहा था।इस तरह मरने की कोशिश और अपनी बात पहुंचाने का तरीका कतई उचित नहीं है।उसकी पत्नि की मौत और उसकी खराब हालत के बाद उसके बच्चों का भविष्य क्या होगा यह सोचकर दिल कांपने लगता है।समस्या समाधान के तरीके निकलते हैं वक्त लगता है।इस तरह की कोशिशें निरी मूर्खता है। भगतसिंह की तरह मरकर युवाओं को आंदोलित करने की तरकीब गहरे प्रयासों और एकता से आती है। इसलिए अपनी आवाज़ बुलंद करना सीखिए।इस कायरता से दूर रहकर ही अपना ज़मीर पक्का करना होगा।हमारा संविधान हमें अपने मौलिक अधिकारों के लिए लड़ने का हक भी देता है।लड़ने में बहुत कुछ खोना भी पड़ता है। इसके लिए मानसिक तैयारी होनी चाहिए।
इस अधूरी लड़ाई को छोटे व्यापारी संगठित होकर लड़ना होगा क्योंकि इन आत्महत्याओं से असंवेदनशील सरकार नहीं पिघलने वाली।तमाम आंदोलन धर्मियों की एकजुटता हो जाए तो बहुत कुछ समाधान लाये जा सकते है। राजीव के वे शब्द याद रखें -“सरकार तो कुछ नहीं सुनती ,तुम तो सुन लो” जब जीवनसंगिनी बिछड़ जाए तो ये शब्द हम सब के लिए ही है मान के चलिए।उसकी पीड़ा में शामिल होकर इन जैसी पीड़ाओं को सुनें और निराकरण हेतु कदम आगे बढ़ाएं ताकि और कोई राजीव भविष्य में इस तरह की कोशिश ना करें।ये हम सब के प्रयासों से ही होगा। इस सरकार के वश का नहीं। जहां चुनाव हो रहे हैं वे इस घटना से सीख लेकर भाजपा सरकार हटाने का भी उपक्रम जारी रखें।आत्महंता ना बने।





