गोवा
आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में जो हिंदू कार्ड खेला जा रहा है, वो सबसे छोटे राज्य गोवा में फेल हो गया है। हालात ये हैं कि, पुराने मंदिरों को दोबारा बनाने वाला बयान देने वाले सीएम प्रमोद सावंत से बीजेपी का कैडर ही नाराज है। नाराजगी को भांपने के बाद सीएम ने भी दोबारा हिंदू कार्ड खेलने की कोशिश नहीं की। लेकिन वोटों के ध्रुवीकरण न होने से बीजेपी कमजोर और कांग्रेस मजबूत नजर आ रही है।
गोवा विधानसभा की 40 सीटों पर 14 फरवरी को वोटिंग है। बीजेपी ने 40 में से करीब 20 सीटों पर ऐसे कैंडीडेट उतार दिए हैं, जो पहले कांग्रेस में थे। इससे सालों से बीजेपी के लिए काम कर रहे कैडर में भारी नाराजगी है। ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे वर्कर्स के बीच ये स्लोगन भी फेमस हो गया है कि, ‘बीजेपी को बचाना है तो बीजेपी को हराना है।’
गोवा में जाति-धर्म की राजनीति फेल है
बीजेपी ने भारी एंटी इंकम्बेंसी और करप्शन के चलते मौजूदा विधायकों के टिकट काटे और कांग्रेस से आए नेताओं को उम्मीदवार बना दिया, लेकिन इस जोड़तोड़ की राजनीति का आम लोगों के बीच पॉजिटिव रिस्पॉन्स नजर नहीं आ रहा। ‘अजब गोवा की गजब पॉलिटिक्स’ नाम की किताब लिखने वाले ऑथर संदेश प्रभुदेसायी का कहना है कि, गोवा में जाति और धर्म की राजनीति कभी नहीं हुई।
बीजेपी नेता रहे मनोहर पर्रिकर ने भी ऐसा करने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हुए थे। फिर जब उन्होंने इसे छोड़ दिया और डेवलपमेंट पर बात की तो उन्हें जीत मिली। दरअसल, गोवा में 12 तहसील हैं। इनमें से 4 कोस्टल एरिया में आती हैं, जहां की अधिकांश आबादी ईसाई है।
कुल 40 सीटों में से 24 सीटें, इन्हीं 4 तहसीलों में आती हैं, यानि आधी से ज्यादा सीटों पर ईसाई वोट ही निर्णायक होते हैं, इसलिए गोवा हिंदू और ईसाई के गठजोड़ से ही चुनाव जीता जा सकता है। 2012 में बीजेपी इसी फॉर्मूले पर जीती थी, लेकिन इस बार ईसाई उसे सपोर्ट करते नहीं दिख रहे हैं। चर्च की संस्था ने बीजेपी को सपोर्ट न करने की एडवाइजरी भी जारी कर दी है। वे देश में जाति के नाम पर हो रही राजनीति के चलते बीजेपी से नाराज हैं।

तीनों फैक्टर के चलते कांग्रेस सबसे मजबूत
एंटी इंकम्बेंसी, जाति की राजनीति और दूसरी पार्टियों से आए लोगों को टिकट देने के चलते बीजेपी से उसका कैडर ही नाराज हो गया है। वहीं, कांग्रेस ने इस बार जोड़तोड़ करने वालों को टिकट नहीं दिए हैं, जिससे उसकी इमेज पहले से ठीक हुई है। चर्च से जुड़ी कमेटी ने भी बीजेपी को वोट न देने की अपील की है, ऐसे में यह वोट कांग्रेस में ही जाना है।
इन सभी फैक्टर्स के चलते कांग्रेस ग्राउंड पर मजबूत नजर आ रही है। सीनियर जर्नलिस्ट किशोर नाइक गांवकर कहते हैं कि बीजेपी हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश जरूर कर रही है, लेकिन इसमें वो कामयाब नहीं हो पाएगी, क्योंकि गोवा में जाति और धर्म के नाम पर वोटिंग नहीं होती।
ममता बनर्जी का चुनाव से पहले ही सरेंडर
चुनाव से करीब तीन महीने पहले गोवा में एक्टिव हुई ममता बनर्जी की पार्टी TMC वोटिंग से पहले ही सरेंडर नजर आ रही है। प्रभुदेसायी कहते हैं कि ममता बनर्जी ने अन-ऑफिशियल विदड्रॉ कर लिया है।

ये बात इससे से समझी जा सकती है कि वोटिंग के चंद दिनों पहले मोदी से लेकर अमित शाह तक बीजेपी के लिए आ रहे हैं। अरविंद केजरीवाल लगातार कैंपेन कर रहे हैं, लेकिन ममता बनर्जी गायब हैं। वे शुरुआत में दो बार आई थीं तब भी उनकी पार्टी को कोई खास रिस्पॉन्स नहीं मिल सका।
दूसरी पार्टियों से रिजेक्टेड नेताओं को उन्होंने पार्टी में शामिल किया। कुछ अच्छे लोग जो उनके साथ गए थे, वो वोटिंग के पहले ही बाहर आ चुके हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि TMC यह चुनाव सिर्फ दिखाने के लिए लड़ रही है। जमीनी स्तर पर दम वाली कोई बात नहीं।





