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यादें……खामोशी तोड़ती :राहुल बजाज की आवाज

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*सुसंस्कृति परिहार

Industrialist Rahul Bajaj, Former Chairman Of Bajaj Group, Dies At 83
 जब तमाम देश में जनता की आवाज़ को मुखर करने वाला मीडिया का बड़ा तबका दरबारी पत्रकारों से लबरेज़ हो ।लेखक और कवि बेख़ौफ़ लेखन से भयभीत हों ।विपक्ष की बोलती बंद हो ।निडरता से काम करने वाले अधिकारियों की रूह में कंपन हो ।उनके ऊपर ,सी बी आई, ई डी की तलवार टंगी हो, सामाजिक कार्यकर्ता जेल के अंदर ज़मानत को तरस रहे हो ।तब देश के महाराष्ट्र में तीन तिलंगों की सरकार बनना । उसमें भाजपा के एक धड़े का निकलना , मुख्यमंत्री बनना एक बड़ी उपलब्धि है ।इससे बड़ी बात जस्टिस लोया कांड की जांच का बीड़ा उठाना है । इन सब स्थितियों में' इकोनामिक्स टाईम्स 'के मंच पर तमाम उद्योग जगत की नामी गिरामी  हस्तियों के बीच जहां अमित शाह,निर्मला सीतारमण,पीयूष गोयल जैसे भारत-सरकार के मंत्री मौजूद हों वहां बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने जब ये कहा -" कि देश में डर  का माहौल है कोई भी बोलने से डरता है ।उन्होंने मॉब लिंचिंग, गांधी के हत्यारे को महिमामंडित करने पर भी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा की उद्योगपति भी आजकल डरे हुए हैं यहां तक कि उनके मुनाफे में हुई कटौती पर भी नहीं बोलते ।"तब उपस्थित तमाम लोग और उद्योगपति बगलें झांकते रह गए ।


        हालांकि अमित शाह ने इसे गलत करार दिया ।निर्मला सीतारमण ने उनके विरोध को राष्ट्रहित का नुक़सान बताया ।इससे भी आगे बढ़कर हरदीप सिंह पुरी ने तो अनुशासन की कमी माना और उनके विचारों को फेंक न्यूज बताया ।और तब से उन्हें  टोल किया जा रहा है उन पर हमले शुरू हो गये हैं । कोई उन्हें कांग्रेस पार्टी से जोड़ कर देख रहा है तो कोई उन्हें गांधी, नेहरू का अंध भक्त कह रहा है ।जबकि वास्तविकता यह है कि उनके पूर्वज जमनालाल बजाज नमक सत्याग्रह में बापू के साथ थे । गांधी जी ने कानून तोड़कर जो नमक बनाया था वो 1600₹में बजाज जी ने खरीद लिया था । वह नमक उनके खानदान की हर बूंद में है ।और नेहरू जी ने राहुल नाम दिया । लेकिन यह भी याद रखना चाहिए ये परिवार कभी सच कहने से डिगा नहीं । परिवार ने इंदिरा जी के आपातकाल की खुलकर आलोचना की,संजय गांधी की भी आलोचना की गई ।उस दौरान भी उनके दफ्तरों पर छापे पड़े ।कहने का आशय यह कि उनके परिवार ने लोकतांत्रिक मूल्यों का ख्याल रखा ।आज भी जब सब भयभीत थे तब उनने ख़ामोशी तोड़कर स्वस्थ परम्परा का निर्वहन किया ।
         उधर किरण मजूमदार शा ने भी बजाज की आवाज को समर्थन देकर लोगों को मज़बूती प्रदान की ।म०प्र०की ताई कहीं जाने वाली पूर्व लोक सभाध्यक्ष  सुमित्रा महाजन ने भी इस दहशतज़दा माहौल का ज़िक्र कर दिया ।भाजपा नेत्री का यह बयान महत्वपूर्ण है और बदलती फ़िज़ा का संकेत दे रहा है ।फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में गोवा के राज्यपाल ने जो सवाल उठाए वे भी बदलते रुख़ का संदेशा दे रहे हैं ।राज्यसभा में ब स पा के एड० सतीश चंद्र मिश्रा का वक्तव्य भी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण है । ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि चिक्की कांड की नायिका भी भाजपा से दूरी की शीध्र ही घोषणा करने वाली है ।ऐसी दौड़ शुरू हो ,इससे पहले शिवसेना को सोचना होगा क्या उसका भाजपा की गंगोत्री की नाई अभयदान देना उचित होगा ?
         बहरहाल,अब काफिला रुकने वाला नहीं । ख़ामोशी के बादल छंटने लगे हैं ।हम सब अपनी आवाज़ बुलंद करें ।डर के माहौल से निकलें ।

Ramswaroop Mantri

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