एस पी मित्तल, अजमेर
13 मार्च को अजमेर संभाग के सबसे बड़े सरकारी जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के नगीना बाग के निकट लगे ऑक्सीजन प्लांट परिसर में आग लगी थी। इसके बाद से ही यह ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़ा है। इस गंभीर मामले को 14 मार्च को अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी ने विधानसभा में उठाया। देवनानी ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से कहा कि आग प्लांट के स्टेबलाइजर में लगी, लेकिन यह आग पूरे प्लांट को भी चपेट में ले सकती थी। घटना की सूचना मिलते ही वे स्वयं मौके पर गए और उन्होंने जाना की फायर सिस्टम का इंस्ट्रूलेशन भी नहीं हुआ है इसलिए फायर अलार्म भी नहीं बजा। प्लांट परिसर में ही कचरा का ढेर भी देखा गया। प्लांट का शोर इतना है कि आसपास की कॉलोनी के नागरिक भी परेशान है। प्लांट परिसर में आग लगने की घटना लापरवाही दिखाती है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच करवा कर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करवाई जाए। प्लांट की सुरक्षा के लिए जो उपकरण होने चाहिए वह भी नहीं है। आग लगने के बाद प्लांट का बंद रहना अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।
डीआरडीओ ने लगाया प्लांट:
जेएलएन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीर बहादुर सिंह ने माना कि प्लांट परिसर में आग लगना गंभीर घटना है। भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके लिए उपयुक्त इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस प्लांट को केंद्रीय एजेंसी डीआरडीओ के माध्यम से लगाया गया है। जो खामियां प्लांट की स्थापना के समय रह गई उन्हें दूर करने के लिए संबंधित कंपनी को पत्र भी लिखा गया है। प्लांट का स्टेबलाइजर भी गारंटी अवधि में है, इसलिए कंपनी को बदलने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्लांट के बंद होने से अस्पताल की ऑक्सीजन व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। क्योंकि अस्पताल परिसर में चार ऑक्सीजन प्लांट लगे हुए हैं। पूर्व में भी एक-दो प्लांट का उपयोग ही होता रहा है।





