*मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ धार का जिला सम्मेलन सम्पन्न“*
धार।. “प्रगतिशील लेखक संघ एक ऐसा संगठन है जिसमें असहमति को भी सम्मान दिया जाता है और असहमत होने पर सहमत हुआ जाता है।” यह बात कही प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने।
9 जुलाई 2022 को म.प्र. प्रगतिशील लेखक संघ, धार का जिला सम्मेलन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता की धार प्रलेस के वरिष्ठ कहानीकार निसार अहमद ने। मुख्य अतिथि थे प्रलेस के राष्ट्रीय सचिव मण्डल सदस्य तथा प्रलेस की पत्रिका वसुधा के सम्पादक एवं कवि विनीत तिवारी (इंदौर) एवं विशिष्ट अतिथि थे प्रलेस मध्यप्रदेश सचिव मण्डल की सदस्य एवं कवयित्री सारिका श्रीवास्तव (इन्दौर), प्रलेस उज्जैन के युवा साथी कहानीकार एवं कवि शशिभूषण (उज्जैन) एवं कवि श्री संदीप शर्मा (धार)।
विनीत तिवारी ने प्रगतिशील लेखक संघ के इतिहास पर रोशनी डालते हुए बताया कि सन 1936 में जब प्रलेस का गठन हुआ तब देश भर के तमाम साहित्यकार उससे जुड़े। प्रेमचंद से लेकर सज्जाद ज़हीर, कृष्णचंदर, डॉ रशीद जहाँ, मुल्कराज आनंद, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, कैफ़ी आज़मी, बलराज साहनी, भीष्म साहनी, रामविलास शर्मा, अली सरदार जाफ़री, नामवर सिंह आदि जैसे विख्यात लेखक इसके नेतृत्व में शामिल रहे। उन्होंने साहित्य के केंद्र में आम इंसान के सुख-दुःख और उसके संघर्षों एवं खुशियों को रखकर साहित्य की रचना की। कविताओं, कहानियों, नाटकों यहाँ तक कि फिल्मों के ज़रिये भी इस तरह की रचनाएँ रची गयीं जिनमें ग़रीब तबक़े के लोगों को नायक बनाया एवं उनके भीतर की जिजीविषा को लोगों तक इन माध्यमों से पहुँचाया।
विनीत ने आज के हालात पर बात करते हुए यह बताया कि प्रेमचंद ने प्रलेस की स्थापना के समय अपने वक्तव्य में कहा था कि “हमें सौंदर्यशास्त्र के पैमाने बदलने हैं”। वैसी ही ज़रूरत आज फिर है जब हमें अपनी कहानियों, कविताओं, नाटकों के जरिये, हमारी आज़ादी के मूल्यों को, इंसानियत और बराबरी के स्वप्न को लोगों के दिलों में फिर से स्थापित करना है। जिस तरह आज बँटवारा किया जा रहा है, साम्प्रदायिक बँटवारा तो फिर भी दिखता है लेकिन अमीरी-ग़रीबी के बँटवारे के प्रति भी हमें लोगों के दिल में फिर से प्रतिरोध की चेतना को पैदा करना है।
विनीत ने यह भी कहा कि प्रगतिशील लेखक संघ ही एक ऐसा संगठन है जिसमें असहमति को भी सम्मान दिया जाता है और असहमत होने के लिए सहमत हुआ जाता है। लेकिन सहमति-असहमति से ज्यादा सही और ग़लत के पैमाने के लिए तार्किकता और विवेक – इन दो बातों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
स्वागत उद्बोधन एवं अतिथि परिचय संस्था अध्यक्ष निसार अहमद ने दिया। डॉ. शशिभूषण ने प्रलेस के आदर्शों पर अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए कहा कि मनुष्य एक हैं इस सच्चाई को लोगों के बीच पुनः ले जाने का लेखकीय दायित्व सर्वोपरि होना चाहिए। लेखक के रूप में हमें संगठित होना होगा। गलत होने की जगह हम सही होना चुनें, भले अकेले पड़ जाएँ।
प्रगतिशीलता की राह उन पुरखों की राह है जो भारत के बड़े जनांदोलनों समाज सुधार के अगुआ रहे। निराशा में हमें उन्हीं का स्मरण करना चाहिए और एकजुटता तथा जनशिक्षण के संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।
सारिका श्रीवास्तव ने कहा कि संगठन में नये सदस्यों को जोड़कर संगठन को और मज़बूत करने की जरूरत है। युवाओं के साथ ही महिलाओं एवं अन्य जेंडर एवं सभी जाति एवं धर्मों के लोगों को जोड़ना ज़रूरी है। लेकिन केवल लोगों को जोड़ने से काम नहीं चलेगा, पढ़ने की भी ज़रूरत है। मुक्तिबोध, धूमिल से लेकर नरेश सक्सेना, कुमार अंबुज, कात्यायनी, हरिओम राजोरिया और विनीत तिवारी तक जो भी प्रगतिशील साहित्य रचा जा रहा है उसे पढ़ने और समझने और उस समझ के साथ लिखने की जरूरत है।
पाठ्यक्रम से हटायी प्रेमचंद की कहानी “ईदगाह” एवं रज़िया सज्जाद ज़हीर की कहानी “नमक” का भी लोगों के बीच पाठ होना ज़रूरी है।
स्थानीय कवि संदीप शर्मा ने भी अपने विचार प्रखर शैली में अभिव्यक्त किये।
इसी अवसर पर प्रलेस धार के वर्तमान अध्यक्ष निसार अहमद को सर्वसम्मति से पुनः प्रलेस की धार इकाई का अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कहानीकार निसार अहमद ने अपनी कहानी “भिखमंगे” का भावपूर्ण पाठ किया, जिसने श्रोताओं को भावुक कर दिया। विनीत तिवारी, शशिभूषण, सारिका श्रीवास्तव एवं स्थानीय कवि कवयित्री एवं शायरों ने भी सारगर्भित रचनाएं पेश की। जिनमें कमल पांचाल, कैलाश बंसल, सीमा “असीम”, आभा “बेचैन, अनिता “आनंद”, पूर्णिमा मलतारे, डा.राघवेन्द्र तिवारी, दीपेन्द्र शर्मा, हरिहरदत्त शुक्ल, डॉ श्रीकान्त द्विवेदी, शब्बीर शादाब, लोकेश जड़िया के नाम उल्लेखनीय हैं। उपस्थित समस्त श्रोताओं ने रचनाकारों की रचनाओं का रसास्वादन करते हुए करतल ध्वनि से रचनाकारों को दाद दी। इस कार्यक्रम में श्रीवल्लभ विजयवर्गीय, शायर मोइन जाफरी, नन्द किशोर बावनिया, कृष्ण कुमार दुबे, नन्द किशोर उपाध्याय, आशुतोष मलतारे, मनस्वी दुबे, डॉ अनिल गंगवाल, महेश त्रिवेदी, कवि सलीम शेख विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन प्रलेस इकाई के सचिव शरद जोशी “शलभ” ने किया।
सारिका श्रीवास्तव
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