इलिका प्रिय
हमारे प्यारे साथी बेवाक स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह को आज सरायकेला पुलिस के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है, उन्हें कहां ले जा रहे हैं पूछने पर भी यह नहीं बताया गया, वही रूपेश कुमार सिंह जिन्हें 2019 में झूठे केस में फंसाने की कोशिश की गई थी, पर चार्जशीट तक दाखिल नहीं कर पाए थे, जिनके मोबाइल में पेगासस द्वारा जासूसी की गई है, जिसका केस आज भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, जिनके द्वारा दो दिनों पहले गिरिडीह में औद्योगिक प्रदूषण पर रपट लिखा गया था, और उससे प्रभावित बच्ची के इलाज के लिए रूपेश जी के कोशिश से लोग मदद के लिए सामने आ रहे थे। उससे जुड़े मामले ट्विटर पर देख सकते हैं। जनता के उसी जनपक्षीय पत्रकार को आज एक सोची-समझी रणनीति के तहत पुलिस गिरफ्तार कर ले गई है।
कल सुबह 17 जुलाई सुबह 5:30 को लगभग सात बोलेरो भरकर पुलिस फोर्स आई जिसमें घोषित रूप से सरायकेला खरसावां थाना के डीएसपी चंदन कुमार वत्स के लिंडिग में पूरी पुलिस फोर्स थी, मगर अघोषित रूप से एसआईबी, एनआईए के लोग भी थे। आखिर क्यों? पहले सिर्फ सर्च वारंट बताकर उन्होंने पूरे घर की तलाशी ली , हर समान को उल्टा, पल्टा और जब्ती के कुछ समान को रख लिया ताजुब्ब यह था कि उस जब्ती में लेपटॉप, मोबाइल के अलावा एक लाल ब्यू फूल के छाप वाला चादर भी लिया जिसका क्या तुक था कुछ समझ में नहीं आया। यह पूरा काम लगभग दो बजे तक चला और अंत में उन्होंने अरेस्ट वारंट दिखाया, जिसे वे शुरू में भी बता सकते थे। एक बार फिर उस पत्रकार के पीछे एक झूठा मामला तैयार किया गया है, वह भी ठीक तब जब पेगासस स्पाइवेयर जासूसी मामले के पूरे एक साल होने को है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट इस जासूसी की जांच कर रही है दूसरी तरफ उस पत्रकार पर गलत आरोप में पुलिस प्रशासन गिरफ्तार कर रही है। क्या यह गिरफ्तारी पेगासस स्पाइवेयर जासूसी की अगली कड़ी थी।
रूपेश कुमार सिंह के पीछे पहले झूठे केस थोपना, पेगासस द्वारा जासूसी करना, और फिर यह गिरफ्तारी यह बता रही हैं कि एक जनता के हक अधिकार की बात करने वाला इंसान किस तरह सत्ता के निशाने पर हैं। आखिर क्यों एक जनपक्षधर पर सरकार पुलिस प्रशासन इस तरह दमन कर रही है?
मैं इस सरकार, पुलिस, प्रशासन के दमनकारी नीतियों को पूर जोर विरोध करती हूं और उम्मीद करती हूं एक बार फिर एक जनपक्षधर पत्रकार के पक्ष में न्याय पसंद लोग आवाज उठाएंगे। इस दमन के विरोध में हमारे साथ खड़े होंगे।।
हम उनकी बिना शर्त अविलंब रिहाई की मांग करते हैं।
जनपक्षधरों पर दमन बंद करो
इलिका प्रिय
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उसके बाद भी लिखूंगा
उसने कहा
‘आर्टिकल’
मैंने कहा
‘मैं लिखूंगा’
उसने कहा ‘दूसरों की तरह मत लिखो ‘
मैंने कहा
मैं लोगों के बारे में लिखता हूँ।
उन पर चल रहा है मैं शोषण और उत्पीड़न के बारे में लिखता हूँ!
उसने कहा मैं जेल जाऊंगा’
मैंने कहा
‘मैं उसके बाद भी लिखता हूँ’ बस मुझ पर चेक फेंक रहा हूँ उसने कहा
ला… इस चेक में जितना चाहें उतना लिखे। और फिर लिखना बंद करो।
मैंने उसे चेक लौटाते हुए कहा ‘मेरा लिखावट बिकाऊ नहीं है’
फिर उसने कहा गुस्सा नहीं हो रहा है ‘फिर जेल में सड़ जाओ!!
मैंने कहा
मैं अभी भी जेल में लिखूंगा!
रूपेश कुमार सिंह





