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फ़ाइलों का फाइनल फैसला फुस्स?

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शशिकांत गुप्ते

पूर्व में तात्कालीन सत्ता के विरुद्ध तात्कालिक विपक्ष विरोध करता था तब लालफीताशाही शब्द प्रयोग बहुत होता था।
अत्यधिक नियमों एवं नियंत्रण के कारण अनावश्यक बिलम्ब किया जाता है तो इसे लाल फीताशाही (Red tapism) कहते हैं। प्रायः यह सरकारी संगठनों में तथा बडे निजी संगठनों में देखने को मिलता है। सरकारी कार्यों में हुई देर के लिए खासकर इस शब्द का प्रयोग किया जाता है
वर्तमान में एक शब्द का प्रचलन हुआ है। फाइल निपट गई। वास्तव में सरकारी,अर्ध सरकारी,स्वायत्त संस्था,सहकारी संस्था,और निजी संस्थानों में संयोग से कोई कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण हो जाए तो कहा जाता है फ़ाइल निपट गई।
यह शब्द किसी के परलोक सिधारने पर भी प्रयोग किया जाता है,फलाँ की फ़ाइल निपट गई। यदि किसी व्यक्ति ने किसी अपने ही सगे संबंधी को धोखा दिया तो कहा जाता है,अमुक व्यक्ति ने फलाँ की फ़ाइल निपटा दी।
यह तो हुई बोलचाल की भाषा की बात। इनदिनों फ़ाइल निपटाई नहीं जा रही है। फ़ाइल बन्द ही की जा रही है।
2G-3G नामक घोटाले पर बहुत शोर शराबा हुआ। करोड़ो रुपयों के भ्रष्ट्राचार के आरोप लगे ऐसा लग रहा था कि विरोध करने वाले सभी सावकर है जिनपर आरोप लगें वे सभी घोर अपराधी हैं?नतीजा टाँय टॉय फिस्स। तात्कालिक विपक्ष के द्वारा शोर शराबा ऐसे किया जा रहा था मानो कोई बहुत बड़ा,भूमि और आसमान को दहला देने वाला आवाज का पटाखा फूटने वाला है। लेकिन वह तो फूस्सी बम निकला। घोटाला नदारद हो गया।
भ्रष्ट्राचार के विरुद्ध एक देशव्यापी आंदोलन भी हुआ। आंदोलन का स्वरूप तो ऐसा दिखाई दे रहा था कि, सम्पूर्ण देश में भ्रष्ट्राचार रूपी कचरे पर झाड़ू लग जाएगी।
लेकिन भ्रष्ट्राचार पर झाड़ू लगी या नहीं यह तो खोज का विषय हो गया? हॉ उक्त आंदोलन के गर्भ में से राजनीति में एक झाड़ू का जन्म जरूर हुआ।
झाड़ू ने सियासत में मुफ्त बांटो संस्कृति को प्रचलित किया।
मुफ्त बांटो संस्कृति का रेवड़ी बांटो कुसंस्कृति कहकर विरोध किया गया।
विरोध करने वालों के लिए यह कहा जा सकता है कि हम किसी से कम नहीं। हम ईंधन भलेही महंगा देंगे लेकिन कच्चा राशन मुफ्त बांटेंगे?
स्मरण रखना चाहिए,एक कहावत है तेल तिल्ली में से ही निकलता है।
बहरहाल मुद्दा है फाइल का। इनदिनों तो फाइल निपट नहीं रही है फ़ाइल बन्द ही हो रही है। ना रहें बाँस न बजेगी बांसुरी।
एक चमत्कारिक तरीका यह भी प्रचलित हुआ है। किसी भी व्यक्ति की फ़ाइल भ्रष्ट्राचार में कितनी भी सनी हो ऐसे व्यक्ति को सिर्फ कीचड़ में लौट लगाने की देर है, कीचड़ में खिलने वाले फुल को जैसे हाथों में थाम लिया सारे आरोप गुल हो जाएंगे। कारण जिस कीचड़ में वह लौट लगाएगा वह महसूस करेगा कि, यह साधारण कीचड़ नहीं है। यह कोई नायाब तरीके की धुलाई है। यह धुलाई सारे संगीन आरोपों को एकदम पाक और साफ कर देती है।
इस तरह आरोपों की फ़ाइल ही हमेशा के लिए बन्द हो जाएगी।जब घोटाला हुआ ही नहीं तो मुकदमा किस बात का।
ऐसे महान व्यक्तियों को सत्यवादी हरिश्चंद्र नाम का खिताब मिलना चाहिए? ऐसे व्यक्तियों में यह कहने का साहस भी पैदा हो जाएगा कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।
इस तरह फ़ाइल निपटती है।
फ़ाइल निपटाना एक कला है। इसमें कला में हर कोई निपुण नहीं हो सकता है। इसके लिए बहुत अनुभव चाहिए। फ़ाइल निपटाने के लिए किस तरह का अनुभव चाहिए यह बहुत गुढ़ रहस्य है।
जेनुं काम तेनुं ठाय, बिजा करे सो गोता खाय

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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