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संक्रमण से सावधन?

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शशिकांत गुप्ते

चिकित्साविज्ञान ने बहुत सी बीमारियों पर विजय प्राप्त कर ली है।चेचक की बामारी पर भी विजय प्राप्त कर ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सन 1980 में इस बीमारी के वैश्विक उन्मूलन को प्रमाणित किया है।
प्रायः चेचक बीमारी आजीवन शरीर पर अमिट छोटे दाग और छोटे खड्डे कर देती है।
चेचक की बामारी शारीरिक बीमारी है।
काशीविश्वनाथजी जिस प्रदेश में प्रकट हुए हैं। इस प्रदेश के बहुत से शहर,और नगरों की सड़कें भी चेचक की बामारी से ग्रस्त है।
सड़कों पर इस बीमारी के कारण जानलेवा खड्डे पैदा होतें हैं।
सड़कें स्वयं तो इन खड्डों को सहन कर लेती है,लेकिन सड़कों पर चलने वाले मानव और वाहन भी क्षतिग्रस्त हो जातें हैं।
बहुत सी बार तो सड़क पर चलने वाले मानव बिन बुलाए मेहमान बनकर परलोक पहुँच जातें हैं।
बीमारी से ग्रस्त सड़कों पर वाहन में सवार यात्री ऊंट की सवारी करने का आनंद उठातें हैं।
जब धार्मिक स्थानों तक पहुँचने वाली सड़कें यदि ऊबड़खाबड़ होती है, तब इसमें शासन या प्रशासन दोषी का दोष नहीं होता है, बल्कि ऊबड़खाबड़ सडकों के पर चलकर धार्मिक स्थानों तक पहुँच कर दशर्न करने वालों की आस्था प्रगाढ़ होती है। कारण धार्मिक आस्थावान लोग हिचकोलों का आनंद उठाते हुए, दर्शन का लाभ प्राप्त करतें हैं।
जब मानवों में धार्मिक आस्था जागृत होती है,तब मानव हिचकोलों को योग अभ्यास समझतें हैं। शरीर के समस्त अवयवों का व्यायाम हो जाता है।
एक सुवाक्य है,कष्ट करने से कृष्ण भगवान के दर्शन होतें हैं।
इसी सुवाक्य को अब शासकीय व्यवस्था भी व्यवहारिक रूप दे रही है। भगवान के दर्शन करने के लिए भी शुल्क निर्धारित किया जा रहा है। वैसे बहुत से मंदिरों में सशुल्क दर्शन करने की व्यवस्था पूर्व से ही विद्यमान है ही।
विषयांतर को रोकते हुए पुनः सड़क पर आतें हैं।
देश में अधिकांश शहरों की सड़को के बीच खड्डे हैं। सौभाग्य से कहीं कहीं सड़कें भी हैं।
इस लेख पर एक व्यंग्यकार ने अपनी टिप्पणी इस प्रकार प्रकट की है। जब व्यवस्था स्वयं हिचकोले लेकर चल रही है तो सडकों की बात करना बेमानी है।
खड्डों की बीमारी से समूर्ण देश की सड़कें संक्रमित है। साथ ही जब देश में सर्वत्र एक विशेष गुल को खिलाना है, तो कीचड़ फैलाना अनिवार्य है। जब सर्वत्र कीचड़ फैलता है, तो सड़कों के खड्डे भी ढंक जातें है। सिर्फ सड़कों खड्डे ही नहीं, आमजन की मूलभूत समस्याएं भी कीचड़ में सन कर अदृश्य हो जाती है।
इसीलिए कीचड़ को फैलने से रोकना अनिवार्य हो गया है।
कारण अत्यधिक कीचड़ दलदल में परिवर्तित हो जाता है। दलदल में कोई भी व्यक्ति सिर्फ फंसता नहीं है,बल्कि धंस जाता है।
यह अंतिम सत्य है।
रघुपति राघव राजा राम,सब को सन्मति दे भगवान

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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