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 शहीद अस्पताल: डॉक्टरों की निलंबन वापसी के लिए जनता उतरी सड़क पर

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 पूर्व विधायक ने कहा प्रतिबंध कांग्रेस की राजनीति से प्रेरित

दल्लीराजहरा

छत्तीसगढ़ के शहीद अस्पताल के डॉक्टर शैबाल जाना और दीपांकर सेनगुप्ता का पंजीयन राज्य मेडिकल काउंसलिंग ने तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया। शुक्रवार को इस के विरोध में छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ कार्यालय से लेकर एसडीएम कार्यालय तक एक मौन रैली निकाली गई। रैली में छत्तीसगढ़ के माइंस संघ, अस्पताल का स्टाफ और मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता शामिल थे। 

पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने राज्य सरकार को कोसते हुए कहा कि माथुर परिवार के राजनीतिक दखल के चलते ये निलंबन कांग्रेस की राजनीति से प्रेरित दिखता है। 2019 में एक मरीज की सर्जरी के बाद मौत हो गई थी। उसके परिवार ने दोनों डॉक्टरों के खिलाफ जिला जांच समिति को शिकायत की। जिला समिति को जांच में कोई भी लापरवाही नहीं मिली और रिपोर्ट जिला प्राधिकरण को सौंप दी। अपनी डिग्री पर प्रश्न पूछे जाने पर डॉ. जाना ने कहा – मेरी एम.बी.बी.एस. डिग्री बताती है कि मैं चिकित्सा, सर्जरी और स्त्री रोग और प्रसूति का अभ्यास कर सकता हूँ। मौतें होती है लेकिन हम आखिर तक मरीज़ की जान बचने की कोशिश करते हैं।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के मजदूर संगठन छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के तहत शहीद अस्पताल पिछले चालीस सालों से निःशुल्क चलाया जा रहा है। खदान मजदूरों द्वारा बनाया ये अस्पताल आदिवासी क्षेत्र के सौ किलोमीटर के दायरे में रह रहे लोगों को इलाज सुलभ करता है। 

अनुविभागीय अधिकारी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर डॉक्टरों के पंजीयन निलंबन वापस लेने की मांग की है। इस रैली में सीएमएम से ओमप्रकाश साहू, सुरेश कुरेटी, नवाब गिलानी, सोमन मरकाम, राजाराम, रामचरण नेताम, सुरेंद्र साहू, रवि सहारे, मोनू आदि शामिल रहे।

Ramswaroop Mantri

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