मुनेश त्यागी
यूरोप में महंगाई से त्रस्त लोगों ने “नाटो छोड़ो” का नारा बुलंद किया है। फ्रांस, जर्मनी और चैक गणराज्य में प्रदर्शन करके वहां के नागरिक कह रहे हैं कि रूस और यूक्रेन युद्ध में परोक्ष भागीदारी से काफी नुकसान हो रहा है। अतः हमारी सरकारों को यूक्रेन को दी जाने वाली मदद में को तुरंत बंद कर देना चाहिए।
यूक्रेन और रूस युद्ध के कारण वहां पर उर्जा संकट पैदा हो गया है। मंहगाई लगभग दुगनी हो गई है। लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ऊर्जा संकट की वजह से वहां पर सितंबर में 40 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ गई हैं। यूरोप में युद्ध संकट के बीच मंहगाई की मार तेज हो गई है। यूरोपीय संघ की स्टेटिस्टिक्स एजेंसी यूरोस्टेट के अनुसार 40 यूरोपीय देशों में से 19 में मंहगाई की दर दस फीसदी से अधिक हो गई है। इस साल सितंबर में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
44 यूरोपीय देशों में से 19 में महंगाई की मार 10% से अधिक हो गई है। 7 यूरोपीय देशों में महंगाई की दर 22% से अधिक हो चुकी है। तुर्की में महंगाई की दर 83% तक पहुंच गई है। यूरोस्टेट के अनुसार बीते अगस्त में यूरोप के सात देश ऐसे थे जहां महंगाई दर 20 फ़ीसदी से अधिक थी। तुर्की में तो महंगाई की दर बढ़कर 83 परसेंट से अधिक हो गई है। इसी तरह हंगरी, एस्टोनिया, लिथुआनियाई, और माल्दोवा में महंगाई की दर 20% से लेकर 34 प्रतिशत तक हो गई है।
मंहगाई के मुख्य कारण हैं,,, रूस से गैस की आपूर्ति बाधित होने से यूरोप में उर्जा संकट गहरा गया है, यूरोपीय देशों में गैस का खपत को 15 फ़ीसदी तक घटाने का फैसला किया गया है, ऊर्जा आपूर्ति लड़खड़ाने के कारण खाद्य पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है और मौजूदा हालात में रोजाना 155 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस की कमी हो रही है और लोगों को अभी से सर्दी से निजात पाने के लिए लकड़ियां इकट्ठी करनी पड़ रही हैं।
दो देशों की लड़ाई में अपनी भागीदारी को लेकर, अब यूरोपीय देश बिखरते हुए नजर आ रहे हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में, जर्मनी की राजधानी बर्लिन में और चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में लोग सड़कों पर उतर कर “नाटो छोड़ो” और “पहले हमारा देश” के नारे लगा रहे हैं। लोगों का कहना है एक तो रूस यूक्रेन युद्ध के चलते महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है और दूसरे यूक्रेन को दी जा रही आर्थिक मदद उनके देश पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में लोग यूक्रेन की मदद के विरोध में सड़कों पर उतर गए हैं। वे सरकार से रूस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहे हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में जीवन यापन से जुड़ी जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने के बाद, फ्रांस की जनता आग बबूला हो रही है और लोग राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला एनी एनार्क्स भी महंगाई के विरोध में लोगों के साथ सड़कों पर आ गई है। चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में भी लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि सरकार जनता को राहत देने वाले फैसले नहीं कर रही है।
यूक्रेन को मदद देने वाले देशों में मुख्य रूप से अमेरिका 1520 करोड़ यूरो की मदद दे रहा है, ब्रिटेन 1230 करोड़ यूरो की, जर्मनी 250 करोड़ यूरो की और इसी तरह से, पोलैंड, फ्रांस, नार्वे और चैक रिपब्लिक सरकारें यूक्रेन को करोड़ों यूरो की मदद पहुंचा रही हैं। नाटो के देश फ्रांस ने 3 ट्रिलियन डॉलर, जर्मनी ने 4 ट्रिलियन डॉलर, ब्रिटेन ने तीन ट्रिलियन डॉलर, इटली ने 2 ट्रिलियन डॉलर, स्वीडन ने 62,744 करोड डॉलर की सहायता यूक्रेन को दी है।
नाटो का गठन 73 साल पहले समाजवादी खेमे यूएसएसआर के खिलाफ हुआ था। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानी नाटो, एक सैनिक संगठन है। इसका गठन 1949 में हुआ था। नाटो के सदस्य देशों में 28 यूरोपीय देश और दो उत्तर अमेरिकी देश हैं और बाकी पूर्वी यूरोपियन देश शामिल हैं। नाटो का मुख्यालय ब्रुसेल्स में स्थित है और इसमें कुल 35 लाख सैनिक हैं।
नीदरलैंड, डेनमार्क, ग्रीस, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन में महंगाई की दर जनवरी के मुकाबले अगस्त में दुगनी हो चुकी है। वहां की जनता परेशान है, लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। वे नहीं चाहते कि उनकी सरकार प्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन सरकार को मदद करे। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनकी सरकार यूक्रेन को मदद देना बंद करें और उनकी समस्याओं का हल करे।
लोग “नाटो छोड़ो” का नारा बुलंद करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। अब यह नाटो देशों की जनता के ऊपर है कि वे अपने देश की सरकारों पर मजबूती से दबाव डालें, उनकी नीतियों का विरोध करें, उनका कामकाज करना बंद कर दें, तभी जाकर यूक्रेन और रूस में युद्ध बंद हो सकता है क्योंकि यूक्रेन अपने आप से युद्ध नहीं कर रहा है, बल्कि वह इन नाटो देशों के उकसावे पर, इनकी मदद से और इनके हथियारों से ही युद्ध चला रहा है।
अगर नाटो देश यूक्रेन को सैनिक, हथियार और आर्थिक सहायता बंद कर दे तो यूक्रेन और रूस का युद्ध तुरंत खत्म समाप्त हो जाएगा, बंद हो जाएगा। मानवता विरोधी इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए नाटो देशों के लोगों को, सड़कों पर चक्का जाम कर देना चाहिए और अपनी सरकारों को मजबूर कर देना चाहिए कि वे किसी भी प्रकार से यूक्रेन की आर्थिक, हथियार और सैनिक मदद ना करें, तभी यूक्रेन और रूस के बीच का युद्ध समाप्त हो सकता है।
अब यह नाटो देशों की जनता पर ही है कि वे अपने अपने देशों की युध्दोन्मादी सरकारों को यूक्रेन को सहायता बंद करने के लिए विवश कर दें। तभी जाकर पूरी दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के बढ़ते खतरे और नाभिकीय हथियारों के हमले की गंभीर आशंका से बच सकती है। हम भी नाटो देशों की जनता के साथ है और युद्ध रोकने के उनके अभियान का तहे दिल से खैरमकदम करते हैं।





