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आपत्तिजनक लेख वाली किताब की लेखिका ने लिखा माफीनामा…महापौर ने भी जताया था विरोध

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शासकीय लॉ कॉलेज में जिस किताब में आपत्तिजनक लेख मिले है, उसकी लेखिका का कहना है कि अनजाने में आपत्तिजनक कथनों को समाहित किया गया। मेरा किसी की भावना को ठेस पहुंचाना मकसद नहीं था। पढ़िए लेखिका डॉ.फरहत खान का माफीनामा...

लेखिका डॉ.फरहत खान का माफीनामा।

लेखिका डॉ.फरहत खान का माफीनामा।

2011 में लिखी थी किताब

उपरोक्त विषयार्न्तगत निवेदन है कि मेरी जानकारी में आपके द्वारा तथा फोन पर अन्य जगहों से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि मेरे द्वारा आपके प्रकाशन से लिखी पुस्तक सामूहिक हिंसा एवं दाण्डिक न्याय पद्धति जिसे 2011 में लिखा गया था में कुछ पेज अनजाने में आपत्तिजनक कथनों को समाहित किए हुए हैं। एवं आपके द्वारा इसे 2015 में मेरी जानकारी लाए बिना प्रकाशित किया गया है। फिर भी यदि इस पुस्तक में कुछ कथन यदि गलत एवं आपत्तिजनक है तो मैं आपसे आपके माध्यम से समस्त पाठकों से क्षमा प्रार्थी हूं कि मेरा किसी की किसी भी भावना को ठेस पहुंचाना मकसद नहीं था। अत: यदि इस पुस्तक में लिखी किसी बात से कोई आहत हुआ है तो मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

(16 मार्च 2021 को लेखिका डॉ.फरहत खान ने मांगी थी माफी।)

किताब के प्रकाशक।

किताब के प्रकाशक।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने प्रकाशक को किया फोन

खेत्रपाल लॉ हाउस और अमर लॉ पब्लिकेशन के हितेश खेत्रपाल ने बताया कि किताब का प्रकाशन साल 2015 में किया था। तब किसी प्रकार की आपत्ति सामने नहीं आई थी। किताब की एक हजार कॉपी छपी थी, जिसमें से 250 किताब बिक गई थी। 2018 में कुछ व्याकरण की मिस्टेक की बात सामने आई थी। जिस पर शेष किताबें को नष्ट कर दिया था और नया 1 हजार किताब का एडिशन छापा गया था। इसके बाद पिछले साल 2021 में किताब में आपत्तिजनक कंटेंट की जानकारी सामने आई थी। वकील व महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इस संबंध में मुझ से चर्चा की थी और विरोध जताया था। जिसके बाद लेखिका डॉ.फरहत खान ने माफी भी मांगी थी और किताब में से आपत्तिजनक कंटेंट के जो 8 से 10 पेज थे उन्हें हटा दिया गया था। वो ही किताब फिलहाल बाजार में उपलब्ध कराई जा रही है। विवादित कंटेंट को हटाने के बाद संशोधित किताब ही अभी बाजार में उपलब्ध है। पुरानी किताब हमारी तरफ से किसी भी कॉलेज में सप्लाई नहीं की गई है।

पिछले साल विवाद के बाद किताब को बाजार से वापस बुलाने के लिए लेखिका डॉ.खान ने प्रकाशक को पत्र भी लिखा था।

पिछले साल विवाद के बाद किताब को बाजार से वापस बुलाने के लिए लेखिका डॉ.खान ने प्रकाशक को पत्र भी लिखा था।

गृहमंत्री ने दिए एफआईआर के निर्देश

वहीं शासकीय लॉ कॉलेज में सामने आए धार्मिक कट्‌टरता फैलाने और आपत्तिजनक किताब के मामले में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का भी शनिवार को बयान सामने आया। उन्होंने इंदौर पुलिस कमिश्नर हरिनारायणा चारी मिश्र को किताब को लेकर 24 घंटे में जांच कर दोषियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

प्राचार्य के कक्ष के बाहर प्रदर्शन करते लॉ स्टूडेंट।

प्राचार्य के कक्ष के बाहर प्रदर्शन करते लॉ स्टूडेंट।

प्राचार्य ने दिया इस्तीफा

वहीं शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी और लॉ स्टूडेंट ने कॉलेज में प्राचार्य इनामुर्रहमान के चेंबर के बाहर प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने उनके इस्तीफे की मांग की। मामले की जांच के लिए अतिरिक्त संचालक किरण सलूजा, होल्कर कॉलेज के प्राचार्य सुरेश सिलावट सहित अन्य जांच समिति के सदस्य कॉलेज पहुंचे थे। इस दौरान प्राचार्य ने विद्यार्थियों के आंदोलन का हवाला देते हुए आहत होकर इस्तीफा सौंप दिया।

Ramswaroop Mantri

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