भोपाल। मप्र भाजपा की कमान संभाले हुए सांसद विष्णुदत्त शर्मा को अब इसी हफ्ते एक साल होने वाला है, लेकिन वे अब तक अपनी कार्यसमिति भी घोषित नहीं कर सके हैं। करीब 11 माह में वे अपनी कार्यकारिणी का गठन कर पाए हैं। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे कार्यसमिति में नाम शामिल करने को लेकर अपना होमवर्क पूरा कर चुके हैं। माना जा रहा है कि उज्जैन में होने वाले विधायकों के दो दिनी प्रशिक्षण के समय उनके द्वारा कार्यसमिति की घोषणा की जा सकती है। यही वजह है कि इन दिनों कार्यसमिति के दावेदारों की भोपाल से लेकर दिल्ली तक दौड़ -धूप देखी जा सकती है। हालांकि इस मामले में शर्मा का कहना है कि जल्द ही कार्यसमिति की सूची जारी कर दी जाएगी। उनका कहना है कि इस सूची में निश्चित रूप से वे सभी नए पुराने कार्यकर्ताओं के नाम शामिल रहेंगे, जो पार्टी के कामकाज के लिए उपयोगी हैं। गौरतलब है कि इस बार कार्यसमिति में चुनिंदा नाम ही शामिल किए जाने की कवायद की जा रही है, इसकी वजह है पुरानी कार्यसमिति में पांच बार नाम जोड़े जाने की वजह से 308 विशेष आमंत्रित और स्थायी सदस्यों की संख्या भी 150 करीब हो गई थी।
दो साल से नहीं हुई कार्यसमिति की बैठक
मप्र भाजपा कार्यसमिति की बैठक दो साल से नहीं हुई है। प्रदेश में भाजपा की सत्ता रहने के दौरान बीते डेढ़ दशक में भाजपा संगठन की सक्रियता लगातार बनी हुई थी। तब हर तीन माह में लगभग भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होती रहती थी, लेकिन बीते करीब दो साल से कार्यसमिति की बैठक ही नहीं हुई है। हद तो यह रही कि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह न तो अपनी टीम बना सके और न ही कार्यसमिति का गठन कर सके। यही वजह है कि उनके कार्यकाल में तो कार्यसमिति की एक भी बैठक ही नहीं हुई। यह बात अलग है कि पुराने सदस्यों के साथ उनके द्वारा एक औपचारिक बैठक जरूर की गई थी, वहीं नंदकुमार सिंह चौहान के कार्यकाल के आखिरी साल में भी बैठक नहीं हुई और मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष शर्मा के कार्यकाल का पहला साल भी बिना कार्यसमिति की बैठक के ही समाप्त हो गया है।
दो बार बदलनी पड़ी तारीख
भाजपा विधायकों के प्रशिक्षण की तारीख दो बार बदल चुकी है। यही नहीं स्थान भी बदलना पड़ा है। पचमढ़ी की जगह अब महाकाल की नगरी उज्जैन में यह आयोजन तय किया गया है। यह आयोजन अब 12 और 13 फरवरी को हो रहा है। संगठन ने पहले इसकी तिथि 13 और 14 फरवरी तय की थी, लेकिन तारीख की घोषणा होते ही एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक दिल्ली में आहूत कर ली गई। 14 फरवरी को होने वाली इस बैठक में प्रदेशाध्यक्ष तथा संगठन महामंत्री को बुलाया गया है। इसके चलते आनन फानन में विधायकों का प्रशिक्षण 12 एवं 13 फरवरी को पचमढ़ी में ही फाइनल किया गया।
कार्यसमिति से भी दूर रखे जा सकते हैं श्रीमंत समर्थक
टीम वीडी में श्रीमंत के किसी भी समर्थक को जगह नहीं दी गई है। यही नहीं जिलों की टीम में भी उनकी उपेक्षा जारी है। यही वजह है कि माना जा रहा है कि अब कार्यसमिति में भी श्रीमंत समर्थकों को कम ही महत्व मिल सकता है। श्रीमंत समर्थक केवल विधायक और मंत्रियों को ही इस कार्यसमिति में शामिल होने का मौका मिल सकता है। इसकी वजह है उनका सांसद-विधायक होना। यह बात अलग है कि हालांकि चुनाव हारने वाले पूर्व विधायक भी कार्यसमिति में अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस मामले में प्रदेशाध्यक्ष शर्मा का कहना है कि भाजपा एक कैडर बेस्ड दल है, इसमें कोई किसी का समर्थक नहीं होता, सब भाजपा के कार्यकर्ता हैं। पार्टी अपनी जरूरत के हिसाब से सभी को जिम्मेदारी देती है। वे श्रीमंत को पार्टी के बड़े और जिम्मेदार नेता बताते हैं।
विधायकों के दो दिनी प्रशिक्षण के समय भाजपा कार्यसमिति की की जा सकती है घोषणा





