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आपकी ज़रूरत क्या है ?….तो ये सब आपको हासिल होगा

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डॉ . सलमान अरशद

अच्छी तालीम जो आपको सहज ही उपलब्ध हो, चिकित्सा के ज़रूरी संसाधन जो आपकी पहुँच में हों, हर हाथ को काम और काम का उचित दाम, सर पे छत और समाज में सुरक्षा ! 

यही न !

क्या ये आपके फ़िक़्र, चिंतन- मनन और चर्चा का विषय हैं ? 

ज़वाब आप जानते हैं ! 

क्या कोई राजनीतिक दल है जो ये वादा कर सके कि उसकी हुकूमत होगी तो ये सब आपको हासिल होगा !

ज़वाब आप जानते हैं ! 

आपको मुसलमानों से परेशानी है, ठीक है। अब ज़रा अपने दिमाग़ पर ज़ोर डालिये और ख़ुद से पूछिए कि क्या किसी मुसलमान बंदे ने आपको आपके धर्म की वजह से तकलीफ़ पहुंचाई है ? 

ज़वाब आप जान चुके हैं ! 

आपको लगता है कि छोटी जाति के लोग औक़ात भूल गए हैं, ठीक बात है, अफ़सोस तो इसका होना चाहिए कि सैकड़ों साल तक इन्होंने अपनी जातीय औक़ात को याद ही क्यों रखा ! 

आप दलित हों या दलक या बीच वाले, सोचिये कि जातीय औक़ात निर्मित कैसे और कब हुआ ! 

क्या किसी जाति विशेष के स्त्री पुरुष शारीरिक या मानसिक रूप से किसी दूसरी जाति विशेष के स्त्री व पुरुषों से अलग हैं, ज़वाब है नहीं ! 

जहाँ तक ज्ञान-विज्ञान या कला साहित्य में किसी की निपुड़ता का सवाल है, आज ये साबित हो चुका है कि इसका तअल्लुक़ जाति, लिंग या नस्ल से नहीं बल्कि मिलने वाली सुविधाओं और अवसरों से हैं। 

फिर वो कौन लोग हैं जो असमानता और अन्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्थाओं को बदलना नहीं चाहते, इसका ज़वाब एक ही है, अन्याय पर आधारित ये व्यवस्था जिन्हें लाभ पहुंचाती है, वो इसे बचाये रखना चाहते हैं। 

आप किसी भी जाति के हों, आपसे नीचे भी कोई जातीय समाज है, बस आप जब तक इस श्रेणीक्रम से ख़ुश है, अपने ऊपर वाले से लात खाते रहेंगे। 

मुसलमानों पर मीडिया और सियासत के लगातार हमलों के दो बड़े लाभ हैं, पहला तो यही की जातीय व्यवस्था में अपमानित जो रहा समाज मुसलमानों से लड़ते हुए अपनी पीड़ा और कुंठा का वमन कर रहा है, अगर इस वमन को रोक दिया जाये तो जाति आधारित समाज व्यवस्था के लिए बड़ा ख़तरा उपस्थित हो जायेगा। 

दूसरा बड़ा लाभ ये है कि देश को लूटता हुआ पूँजीपति जनता को नज़र नहीं आता क्योंकि जनता की नज़र पर मुसलमान चिपका दिया गया है। पूंजीपतियों की लूट को सरल बनाने वालों को सत्ता हासिल होना सरल हो जाता है क्योंकि लुटेरे पूँजीपति उनके लिए थैलियां खोल देते हैं। 

आपके दिमाग़ को लगातार ज़हर की सप्लाई होती रहे, इसलिए लुटेरे पूँजीपति मीडिया में लगातार पैसे लगा रहे हैं, यही नहीं मीडिया के किसी हल्के से उनके ख़िलाफ़ मामूली चुनौती को भी अब बर्दास्त नहीं किया जाता, सोशल मीडिया में आये दिन लोगों का प्रतिबंधित होना इस बात का सुबूत है। 

अगर यहाँ तक पढ़ लिया है तो लेख के पहले पैराग्राफ को दुबारा पढ़िए और सोचिये कि इस पूरी क़वायद में आपकी भागीदारी से क्या आपको ऐसा कुछ हासिल हो रहा है जिसका ज़िक्र हमने शुरू में किया है ! 

सोचिएगा ज़रूर ! 

~ Dr. Salman Arshad

Ramswaroop Mantri

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