8 घाटों पर श्रद्धालु कर रहे स्नान, 40 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
प्रयागराज
माघ मेले का आज तीसरा प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या है। संगम नगरी प्रयागराज में लोग घाटों पर डुबकी लगा रहे हैं। बुधवार रात 12 बजते ही संगम की रेती पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर गंगे व हर-हर महादेव के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान-दान किया। गुुुुुरुवार शाम 4 बजे तक 28 लाख लोगों ने स्नान किया है।
भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन ने 8 घाटों पर स्नान की व्यवस्था की है। मेले में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। ATS, NDRF, SDRF व जल पुलिस के अलावा सिविल पुलिस के जवान तैनात हैं। ड्रोन कैमरे से मेला परिक्षेत्र की निगरानी हो रही है।
क्या है संगम व मौनी अमावस्या की मान्यता?
मान्यता है कि संगम तट पर और गंगा में देवताओं का वास रहता है। इसलिए गंगा स्नान करना ज्यादा फलदायी होता है। इस साल मकर राशि में छह ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनने की वजह से इसका महत्व और बढ़ गया है। शास्त्रों में मौनी अमावस्या के दिन सुबह से मौन व्रत रखते हुए ध्यान-चिंतन करना ज्यादा फलदायी माना गया है। पूरे साल में 12 अमावस्या होती हैं। इसमें से मौनी अमावस्या का अपना खास महत्व है। इस दिन तेल, तिल, सूखी लकड़ी, कपड़े, गर्म वस्त्र, कंबल और जूते दान करने का विशेष महत्व है।
40 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना
मौनी अमावस्या पर संगम में 40 लाख श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने की संभावना है। ऐसे में भीड़ को देखते हुए अक्षयवट के दर्शन पर रोक लगा दी गई है। मेला परिक्षेत्र में झूले व अन्य मनोरंजन के साधनों को बंद करा दिया गया है। मेला प्रबंधक विवेक शुक्ला का कहना है कि एक जगह बहुत भीड़ जुटने न पाए, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।
माघ मेले का आज तीसरा प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या है। संगम नगरी प्रयागराज में लोग घाटों पर डुबकी लगा रहे हैं। बुधवार रात 12 बजते ही संगम की रेती पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर गंगे व हर-हर महादेव के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान-दान किया। गुुुुुरुवार शाम 4 बजे तक 28 लाख लोगों ने स्नान किया है।
भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन ने 8 घाटों पर स्नान की व्यवस्था की है। मेले में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। ATS, NDRF, SDRF व जल पुलिस के अलावा सिविल पुलिस के जवान तैनात हैं। ड्रोन कैमरे से मेला परिक्षेत्र की निगरानी हो रही है।
क्या है संगम व मौनी अमावस्या की मान्यता?
मान्यता है कि संगम तट पर और गंगा में देवताओं का वास रहता है। इसलिए गंगा स्नान करना ज्यादा फलदायी होता है। इस साल मकर राशि में छह ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनने की वजह से इसका महत्व और बढ़ गया है। शास्त्रों में मौनी अमावस्या के दिन सुबह से मौन व्रत रखते हुए ध्यान-चिंतन करना ज्यादा फलदायी माना गया है। पूरे साल में 12 अमावस्या होती हैं। इसमें से मौनी अमावस्या का अपना खास महत्व है। इस दिन तेल, तिल, सूखी लकड़ी, कपड़े, गर्म वस्त्र, कंबल और जूते दान करने का विशेष महत्व है।
40 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना
मौनी अमावस्या पर संगम में 40 लाख श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने की संभावना है। ऐसे में भीड़ को देखते हुए अक्षयवट के दर्शन पर रोक लगा दी गई है। मेला परिक्षेत्र में झूले व अन्य मनोरंजन के साधनों को बंद करा दिया गया है। मेला प्रबंधक विवेक शुक्ला का कहना है कि एक जगह बहुत भीड़ जुटने न पाए, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

कल्पवासियों व स्नानार्थियों पर हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई।

श्रद्धालुओं पर फूल बरसाता हेलिकॉप्टर।

संगम में स्नान करतीं प्रियंका गांधी वाड्रा। इस दौरान उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा गया।
प्रियंका ने डुबकी लगाई, शिवपाल ने दर्शन किए
मौनी अमावस्या में प्रयागराज में राजनीतिक हस्तियां भी पहुंचीं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने संगम तट पर स्नान करके पूजा की। वहीं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री शिवपाल यादव ने भी लेटे हनुमान के दर्शन किए। इस मौके पर उनके साथ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्रगिरि मौजूद रहे।

मौनी अमावस्या पर शिवपाल यादव ने प्रयागराज में लेटे हनुमान मंदिर में पूजा-पाठ किया।
24 घंटे खुले रहेंगे अस्पताल
यहां पहुंच रहे श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के इलाज के लिए 24 घंटे मेडिकल टीम मौजूद है। डॉक्टर प्रभाकर राय ने बताया कि मरीजों के इलाज के अलावा कोविड-19 की जांच की व्यवस्था है। 20 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। शहर के बेली व एसआरएन अस्पताल में 20-20 बेड रिजर्व किए गए हैं। मेला क्षेत्र के सभी 16 प्रवेश द्वारों पर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है।

संगम तट पर दीपदान व पूजा पाठ करतीं महिलाएं।

संगम तट पर गुरुवार तड़के स्नान करते श्रद्धालु।





