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गंभीर प्रश्न,पैमाना सफलता का?

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शशिकांत गुप्ते

इनदिनों भौतिकवाद तेज गति से फल फूल रहा है। मानव के मानस पर भौतिकवाद हावी होने के कारण जीवन के संबंधित हरएक क्षेत्र में सफलता का मापदंड बदल गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा प्रतिशत अंक प्राप्त करना बड़ी सफलता माना जाता है। छात्र सिर्फ
पढ़ालिखा literate बन रहा है या Educated मतलब शिक्षित भी हो रहा है? यह अहम प्रश्न तो गौण है?
धार्मिक क्षेत्र में कथावाचकों की संख्या में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। कथा सुनने वालों की तादाद को कथा वाचक की सफलता कहा जाता है। धर्म आचरण को सीखने वाला मोर्चा है,यह बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है,इसपर गंभीरता से विचार विमर्श की आवश्यकता है।
राजनीति में सिर्फ और सिर्फ बहुमत प्राप्त करना ही सफलता का मापदंड हो गया है।
भौतिकवाद के पनपने से हर क्षेत्र में पूंजीवाद हावी हो रहा है पूंजीवाद के हावी होने से सफलता का मापदंड योग्यता, गुणवत्ता क्षमता (caliber) और व्यक्ति के संस्कारों को दरकिनार कर सिर्फ और सिर्फ Manipulation मतलब चालाकी के आधार पर तय किया जा रहा है।
जब चालाकी ही सफलता का मापदंड मतलब पैमाना बन जाए तब आदर्श रूपी विचार तो महत्वहीन हो जाते हैं?
चालाकी की कुंजी से प्राप्त सफलता मानव के मानस में भ्रम पैदा करती है। भ्रम अहंकार में तब्दील हो जाता है।
उक्त मानसिकता के लिए शायर मोहम्मद आज़म का यह शेर एकदम सटीक है।
आसमानों में उड़ा करते हैं फूले फूले
हल्के लोगों के बड़े काम हवा करती है

चालाकी मतलब झूठ और फरेब होता है।
उपर्युक्त मानसिकता को बदल ने के लिए साहित्यकारों के साथ सामाजिक जीवन में सक्रिय लोगों का सिर्फ कर्तव्य ही नहीं दायित्व है। इसके लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है।
रंग-ए-महफ़िल चाहता है इक मुकम्मल इंक़लाब
चंद शम्ओं के भड़कने से सहर होती नहीं

शायर क़ाबिल अजमेरी के इस शेर में यही संदेश है।
जो लोग परिवर्तन के लिए पक्षधर होते हैं। ऐसे लोगों में जुनून(Passion) होता है।
इस तरह के लोगों के लिए शायर
साहिर लुधियानवी का ये शेर सटीक है।
हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं

अंत में अहंकार करने वालों ने के लिए यह शेर आवश्यक है।
चलो न सर को उठा कर ग़ुरूर से अपना
गिरा है जो भी बुलंदी से ढाल तक पहुँचा

शायर ज़फ़र इक़बाल ज़फ़र का उक्त शेर है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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