500 करोड़ की लागत
का डिपो ओर 58 करोड़
का एक स्टेशन
इसी सप्ताह से
पटरियां बिछाने
का काम प्रारम्भ होगा
विपिन नीमा
इंदौर। मप्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन शुरू होने में अभी 212 दिनों समय बाकी है। इंदौर में 5.9 KM तथा भोपाल में 7 KM का सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर फ्लायओवर ब्रिज तक 5.9 KM तक पटरियां बिछाने का काम अगले पांच दिनों के भीतर प्रारम्भ हो जाएगा। दो दिन पहले पहला पाई-गर्डर लांच किया गया। कुल 5 स्टेशनों को तैयार करने के लिए 400 से भी ज्यादा गर्डर लगाए जा रहे हैं। 58 करोड़ की लागत से एक स्टेशन तैयार होगा। इसी प्रकार गांधी नगर में ही मेट्रो का डिपो स्थापित हो रहा है। डिपो को तैयार करने के लिए 500 रु का खर्चा आएगा। इसी प्रकार फ्रांस की आल स्ट्राम कम्पनी को इंदौर – भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के लिए मेट्रो ट्रेनों और विभिन्न प्रणालियों क आपूर्ति के लिए 3,248 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है।
पहले चरण में 5 मेट्रो
स्टेशन, एक स्टेशन की
लागत 58 करोड़ रु
इंदौर में मेट्रो स्टेशन बहुत आधुनिक तरीके से बनाये जा रहे है। मेट्रो के लिए 31.5 किलोमीटर रूट में 29 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। एक स्टेशन की लागत 58 करोड़ है, जो लंबे चौड़े बंगले से भी महंगा रहेगा। जबकि अंडर ग्राउंड स्टेशन की लागत 190 करोड़ आ रही है। इसी तरह गांधीनगर में बनने वाले मेट्रो डिपो के लिए कुल 500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। पहले 17.2 किलोमीटर के काम के लिए भी दो कंपनियों को ठेका दिया गया है। हर स्टेशन की लम्बाई 150 मीटर और चौड़ाई 24 मीटर रहेंगी।
पटरियां बिछाने का
काम 26 – 27 फरवरी
से प्रारम्भ हो जाएगा
भोपाल तथा इंदौर में कार्य प्रगति पर हैं तथा इसी कड़ी में फरवरी माह के अंत तक ट्रैक की पहली खेप 25 से 27 फरवरी के बीच जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड (Jindal Steel & Power Ltd ) द्वारा डिलिवर कर दी जाएगी जिसके बाद पटरियाँ डालने का काम कान्ट्रैक्टर L&T – भोपाल) तथा ISC & Texmaco- इंदौर) द्वारा शीघ्र ही शुरू कर दिया जाएगा । बताया गया की भोपाल तथा इंदौर प्रोजेक्ट मे फन्डिंग एजेंसी (यूरोपीयन इनवेस्टमेंट बैंक(EIB)- भोपाल) तथा ( एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB)- इंदौर) में फेज 1 मे बचे हुए कॉरिडर के टेन्डर डॉक्युमेंट्स (भोपाल- सुभाष नगर से करौंद चौराहा तथा भदभदा चौराहा- रत्नागिरी तिराहा) एवं (इंदौर- पलासिया से रडिसन चौराहा) को रिव्यू एव क्लीरन्स के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। जिसके बाद अधिसूचना (Notification) जारी कर दी जाएगी ।
गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर मेट्रो स्टेशन की कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है की रोड से 6 मीटर ऊपर जाकर टिकिट लेना पड़ेगी। फिर यहां 6 मीटर ओर ऊपर सेंकड फ्लोअर पर जाना पड़ेगा। यहां से मेट्रो मिलेगी। यात्रियों के लिए लिफ्ट और एस्केलेटर की व्यवस्था रहेगी। गांधीनगर में एक स्टेशन रहेगा और बाकी चार स्टेशन सुपर कॉरिडोर 6, 5, 4, 3, पर रहेंगे । प्रत्येक स्टेशन सवा किलोमीटर की दूरी रहेंगे।
दिल्ली में ट्रेन से उतरते
ही मिल जाती है मेट्रो
यहां भी ऐसी ही चाहिए
पुराने दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक ही चांदनी चौक का मेट्रो स्टेशन है। इसी प्रकार पहाड़ गंज स्थित नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चंद कदम दूरी पर ही मेट्रो स्टेशन है। दोनो स्टेशनों से मेट्रो की इतनी जोरदार कनेक्टिविटी है कि यात्रियों को स्टेशन से बाहर जाने की आवश्यकता ही नही पड़ती है , क्योकि दोनो रेलवे स्टेशनो के परिसर में ही मेट्रो स्टेशन तक (अंडर ग्राउंड)
आने जाने की बेहतरीन व्यवस्था है। इसके अलावा मेट्रो में कई स्टेशन ऐसे भी है जहाँ से बस स्टैंड भी वाकिंग डिस्टेन्स पर है। इसीलिए दिल्ली का मेट्रो सिस्टम सफल है। जब मैने दिल्ली के पंचशील मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो के एक अधिकारी से चर्चा की उन्होंने बताया की रेलवे के दोनों स्टेशनों से प्रतिदिन लाखों यात्री आता और जाता है, ओर अधिकांश यात्री मेट्रो में सफर करना पसंद करता है।





