इंदौर के महू के पास गवली पलासिया गांव। यहां आदिवासी लड़की से कथित गैंगरेप के बाद हत्या की कहानी पहेली बन गई है। आरोप पाटीदार समाज के लड़कों पर लगे हैं। पुलिस ने सिर्फ हत्या का केस दर्ज किया है। गैंगरेप का नहीं। जिस लड़के के घर में लड़की की मौत हुई है, वहां आसपास के लोग पानी गर्म करने की रॉड से करंट लगने से मौत होना बता रहे हैं। यह भी कह रहे हैं कि यह लड़की कोई पहली बार यहां नहीं आई थी। वह डेढ़ साल में कई बार आरोपी के यहां आ चुकी थी। उसके करवा चौथ व्रत के फोटो भी हैं।
गवली पलासिया गांव से 25 किलोमीटर दूर की रहने वाली इस लड़की के परिवार का दावा है कि हमें 15 मार्च को फोन आने पर ही पता चला कि वो इस लड़के के घर में थी। धामनोद से गवली पलासिया कैसे चली गई। उसका अपहरण किया गया था और फिर मार दिया। अब कहानियां गढ़ी जा रही हैं। इस बीच आरोपी पर सिर्फ हत्या का केस ही क्यों दर्ज हुआ है? हमारा यह बड़ा सवाल है। दैनिक भास्कर ने इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए लड़की के घर, लड़के के घर, पुलिस चौकी के आसपास रहने वाले लोगों से बातचीत की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सिलसिलेवार जानिए क्या हुआ, कैसे हुआ?

लड़के के घर के आसपास के लोगों ने कहा कि लड़की डेढ़ साल में कई बार यहां आ चुकी है। उसके करवा चौथ व्रत के फोटो भी हैं।
तीन सबसे बड़े सवाल, जिनके जवाब हम बताने की कोशिश करेंगे…
- लड़की धामनोद से गवली पलासिया में लड़के के घर लाई गई थी या खुद आई थी?
- उसके साथ गैंगरेप हुआ था तो पुलिस ने हत्या का ही केस क्यों दर्ज कर रखा है?
- जब केस दर्ज होने के बाद परिवार लाश को लेकर पुलिस चौकी से जा चुका था तो भीड़ ने चौकी पर पथराव क्यों किया, वो कौन लोग थे, कैसे आए?
पहला सवाल : लड़की कैसे गांव आई?
लड़की के परिवार का पक्ष : मां और पिता का कहना है कि हमें तो 15 मार्च की दोपहर 12 बजे पहला फोन किया। उसने कहा कि आपकी लड़की मेरे यहां गवली पलासिया में है और उसका हाथ जल गया है। हमने उनसे पूछा कि हमारी बेटी तो धामनोद में रहती है, वहां कैसे चली गई। हम दंग थे।
हमने इसे क्रॉस चेक करने के लिए परिवार से पूछा कि जो फोन आया था, उसकी कोई रिकॉर्डिंग की है तो मां-बाप ने कहा कि हमारे पास सादा फोन है, रिकॉर्डिंग नहीं होती।
उसके आगे यह पूछा कि फिर क्या हुआ…। तो मां-बाप ने कहा कि आधे घंटे बाद पुलिस का फोन आया कि आपकी बेटी की मौत हो गई है, आप थाने आ जाइए।
हम हैरान थे और एक परिचित की गाड़ी लेकर गवली पलासिया के लिए निकल गए। वहां पता चला कि लड़का पाटीदार समाज से है। हमने जयस संगठन के लोगों को भी सूचना दी, वे भी मदद के लिए आ गए।

लड़की के परिवार का कहना है कि पुलिस की चिट्ठी में लड़की के नाम के बाद पाटीदार सरनेम लिखा था। हमने पूछा कि ये तो आदिवासी है। पाटीदार कब हो गई? पुलिस ने कोई जवाब ठीक से नहीं दिया।
जब हम वहां पहुंचे तो पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराने के लिए सहमति मांगी, हम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। साइन कर दिया। लड़की के शरीर पर छाती के पास चोट के निशान थे, एक हथेली जली हुई थी। निचले हिस्से में भी चोट थी। हमने पुलिस को बता दिया।
पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने कहा कि बॉडी ले जाओ। जब हमारे साथ के लोगों ने पुलिस की चिट्ठी पढ़ी ताे उसमें लड़की के नाम के बाद पाटीदार सरनेम लिखा था। हमने पुलिस से पूछा कि ये तो डावर है, आदिवासी है। पाटीदार कब हो गई? पुलिस ने कोई जवाब ठीक से नहीं दिया।
इससे लोग गुस्सा थे। क्योंकि चिट्ठी में लड़की के पति का नाम यदुनंदन पाटीदार लिखा था। हमने पूछा कि शादी कब हुई जो आपने इसे पति मान लिया। हमने तो इसकी शादी ही नहीं कराई है। पुलिसवाले नहीं माने। वे कहते रहे कि कार्रवाई नियमानुसार की गई, आप बॉडी ले जाइए। इसके बाद आदिवासी समाज के कुछ लोगों को हमने बताया तो वे भी आ गए।
शाम 4 बजे से हम अपनी तरफ से अपहरण, रेप और हत्या का केस दर्ज कराने की मांग करते रहे, लेकिन पुलिस नहीं मानी। आखिरकार हमने बेटी की छाती पर लगी चोट दिखाई और कई आदिवासी नेता आ गए तब जाकर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया। हमारा सवाल यही है कि लड़की वहां आ कैसे गई? जबकि एक दिन पहले तो उसने धामनोद में होना बताया था।

लड़की के मां और पिता का कहना है कि हमें 15 मार्च की दोपहर 12 बजे पहला फोन किया। कहा कि आपकी लड़की गवली पलासिया में है और उसका हाथ जल गया है। आधे घंटे बाद पुलिस का फोन आया कि आपकी बेटी की मौत हो गई है, आप थाने आ जाइए।
आरोपी लड़के यदुनंदन पाटीदार के पड़ोसियों का ये दावा
पुलिस ने यदुनंदन को गिरफ्तार कर लिया है। हमने लड़के और उसकी मां के घर के आसपास रहने वाले 7 परिवारों से बातचीत की। उन सबका कहना था कि ये लड़की पिछले डेढ़ साल से यदुनंदन के घर आती रहती थी। बहुत अच्छा बर्ताव था। होली के दिन ही इन लोगों ने पाटीदार मोहल्ले की गली में घर शिफ्ट किया था।
मोहल्ले की महिलाओं का कहना है कि लड़की ने खुद हमें बताया था कि उसने बिल्केश्वर महादेव मंदिर में शादी कर ली है, लेकिन कॉलेज की पढ़ाई के कारण सिंदूर नहीं लगाती हूं। लड़का खेती बाड़ी करता है और अच्छे से रखता भी था। हमें तो कभी ऐसा नहीं लगा कि इनके बीच कुछ ऐसा है।
हमने महिलाओं का शादी का दावा क्रॉस चेक करने के लिए गांव के बिल्केश्वर मंदिर के पुजारी के परिवार से बातचीत की। पुजारी बाहर नहीं आए, लेकिन परिवार की महिला ने दरवाजे से ही जवाब दे दिया कि शादी हम कराते नहीं। हम संन्यासी समाज से हैं और शिव के पुजारी हैं। हमारे मंदिर में कुछ शादियां हुई हैं, लेकिन वो दूसरे पंडितों ने कराई थी। इनकी शादी हुई होगी तो हमें पता नहीं, लेकिन हमने तो शादी नहीं कराई।
दो लाइन का निष्कर्ष : लड़की का परिवार कह रहा है कि हमें नहीं पता कि लड़की, लड़के के घर कैसे पहुंची? जबकि लड़के के पड़ोसी उसे डेढ़ साल से यहां आते-जाते देख रहे थे।

पुलिस का तहसीलदार को लाश पंचायतनामा लेने के संबंध में लिखा पत्र।
दूसरा सवाल : उसके साथ गैंगरेप हुआ है क्या, पुलिस ने अभी तक हत्या का ही केस दर्ज कर रखा है?
जयस और भीम आर्मी के नेताओं का दावा : शव परीक्षण के दौरान लापरवाही की गई है। यदि सही से जांच होती तो यह भी साबित हो जाता। इसके लिए कोई रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है। जब लड़का खुद कह रहा है कि वो उसका पति है और लड़की के परिवार को पता नहीं तो क्या यह रेप का मामला नहीं बनता? पुलिस इस मामले में पूरी तरह से आरोपी परिवार को बचाने में लगी हुई थी। उसी बचाव के चक्कर में जो पुलिस ने हरकतें कीं, उससे मामला बिगड़ा।
लड़की के परिवार ने इस मामले में कोई स्पष्ट रूप से बातचीत नहीं की। हमने लड़के के बारे में पुष्टि करने के लिए लड़की की मां और बुआ को लड़के के साथ वायरल हुए फोटो दिखाए। इस पर मां चुप ही रहीं, जबकि बुआ का कहना था कि हमें यदि पहले पता हो जाता तो हम उसे बंद कर देते।
आरोपी की मां का दावा : दोनों बहुत जल्दी शादी करने वाले थे। मेरा बेटा सच ही बोलेगा, झूठ बोलेगा तो वह मर जाएगा। डेढ़ साल से युवती और यदुनंदन का अफेयर चल रहा था। 6 दिन से वो लड़की हमारे घर में ही रह रही थी। कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी।
बुधवार को मैं और मेरा बेटा मजदूरी पर चले गए। घर में लड़की अकेली थी। इसी दौरान वह बिजली की रॉड से पानी गर्म कर रही थी, तभी हादसा हो गया। करंट लगने से उसकी मौत हो गई। युवती के घरवालों को भी पता था कि उसका यदुनंदन के साथ अफेयर है। वह हमारे घर आना जाना करती है। रेप का सवाल पैदा नहीं होता।
ग्रामीण एसपी भगवत सिंह बिरदे का बयान : हमने प्रारंभिक जानकारी के आधार पर लड़के के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यदि रेप की बात सामने आएगी तो धाराएं बढ़ाई जाएंगी।

दावा किया गया कि बुधवार रात को 9 बजे के आसपास जयस संगठन के द्वारा आदिवासी समाज के कई ग्रुपों में भड़काने वाला मैसेज डाला गया था। जिसके बाद भीड़ बढ़ गई और हालात बिगड़ गए।
तीसरा और सबसे अहम सवाल : जब केस दर्ज होने के बाद परिवार लाश को लेकर पुलिस चौकी से जा चुका था तो भीड़ ने चौकी पर पथराव क्यों किया, वो कौन लोग थे, कैसे आए?
दैनिक भास्कर ने इसके संबंध में कई पक्षों से बातचीत की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
लड़की के माता-पिता का कहना है कि जब पुलिस ने बुधवार रात 9 बजे हत्या का केस दर्ज कर लिया तो हमने अपना प्रदर्शन रोक दिया, लेकिन बाहर भीड़ तो थी। तब पुलिस ने कहा कि आप लाश ले जाने की व्यवस्था कीजिए, हम कुछ करते हैं। तब गाड़ी बुलवाई और लाश रखवा दी। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए भीड़ को हटवाया और लाश रखी गाड़ी को निकलवा दिया। यही बात वहां गए अन्य लोगों ने भी कही कि 15 मार्च की रात 9.06 बजे पुलिस ने आरोपी यदुनंदन पर हत्या का केस दर्ज कर लिया था। इसके बाद भीड़ को खदेड़ते ही हम वहां से निकल आए थे।
हमने इस बारे में महू के जनपद उपाध्यक्ष केवल डावर से बातचीत की। उनका कहना है कि रात को 9 बजे के आसपास जयस संगठन के द्वारा आदिवासी समाज के कई ग्रुपों में भड़काने वाला मैसेज डाला गया था। इसमें एक गलत फोटो पोस्ट किया कि ‘महू के जयस के जो साथी हैं, वो तुरंत डोंगरपुर पुलिस चौकी पहुंचें। यहां एक आदिवासी लड़की का पाटीदार लड़के ने अपहरण कर मर्डर कर दिया है।’ इसके बाद अचानक भीड़ बढ़ गई जबकि लड़की के परिवार वाले वहां से पहले से जा चुके थे। इसके बाद कुछ नशेड़ियों की भीड़ आई और उसने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया।
जयस के वरिष्ठ नेता लोकेश मुजाल्दा ने कहा कि हमने भीड़ को न तो भड़काया और न पथराव किया। हमारे किसी भी आंदोलन में हिंसा नहीं होती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद सभी जा चुके थे। इसके बाद यह पथराव प्लानिंग से कराया गया है, इसमें आरएसएस, भाजपा या आरोपी लड़के के समाज के लोग हो सकते हैं। हमें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।




