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हाजियों पर हमला …..!

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सलीम अंसारी

जिस देश में धार्मिक स्थल और धार्मिक लोगों को देखकर और इबादात और पूजा के वक्त सम्मान का भाव पाया जाता था ,आज ऐसा क्या हो गया है कि युवकों का एक विशेष समूह धार्मिक स्थलों पर हमले करता है , उन पर भगवा झंडे फेराकर विजेता भाव प्रर्दशित करता नज़र आता है , इबादत के वक्त खलल डालता है और उसकी अदायगी का विरोध करता है, इंतेजामिया और प्रशासन उनके सामने बेबस नज़र आता है। इस्लाम और पैग़ंबरे इस्लाम के बारे में अपशब्दों का इस्तेमाल बढ़ गया है। कुछ राज्य सरकारें भी विशेष धार्मिक स्थल को क़ानून और नियमों की दुहाई देकर ढहाने का काम कर रही हैं, जहां कानून और नियमों का कोड़ा एक वर्ग विशेष और उसके धार्मिक स्थलों और उनके आशियानों तक पर चलाकर अप्रत्यक्ष रुप से एक विशेष संदेश दिया जा रहा हो? जिस देश में बात बात पर धर्म हावी हो , जहां रात दिन धार्मिक कार्यक्रम होते हों , जहां के लोग  धर्म में भीगे हुए हों, जहां तपस्वी  धार्मिक लिबास में पैदल पूरे देश में चलते -फिरते दिखाई देते हों और उन्हें किसी तरह का अपमान,तिरिस्कार और हिंसा का न सामना हो और न अंदेशा,क्या यह उसी देश की तस्वीर है?

अब तो हद हो गई कि हज पर जाने वालों पर कुछ युवकों ने राजस्थान में हमला कर दिया ,इसके योजनाबद्ध अधार्मिकता और गुंडई होने से इन्कार नही किया जा सकता। क्या यह महज़ एक सनकी युवकों की टोली का दुस्साहस है? निश्चित तौर पर जो कुछ धर्म के नाम पर चल रहा है,उसे देखते हुए ऐसा नही माना जा सकता। इसके पीछे निश्चित तौर पर एक ऐसा वैचारिक ताना-बाना है जो धर्म को अपने अधार्मिक लक्ष्यों को हासिल करने की सीढ़ी के रुप में इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह के मामलात पर आम किस्म की धारा लगाकर मामले को निप्टा देना  इसका हल नही है ,ऐसा भी नही है कि इन घटनाओं के पीछे की ज़हनियत से शासन -प्रशासन अंजान हों? मगर फिर भी इस घटना के पीछे के हाथों तक पहूंचने की कोशिश होनी चाहिए, इन गुनाहगारों की आड़ में कौन खड़ा है उन्हें बेनक़ाब किया जाना चाहिए और नफरत और अधर्म के इस जाल को तोड़ा जाना चाहिए। क़ानून का निफाज़ पूरी इमानदारी से होकर आरोपियों और उनके योजनाकारों पर गंभीर धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही होनी चाहिए। इस मामले में शासन-प्रशासन को अपने प्रचलित रवैए को बदलना होगा, ऐसे तत्वों और शक्तियों को यह संदेश देना होगा कि देश में धर्म के नाम पर अधर्म करने की किसी को इजाज़त नही होगी ,चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो।धर्म के नाम पर इस तरह के अधार्मिक कृत्य धर्म और आध्यात्मिकता के लिए बड़ा खतरा है, यह देश में सदियों से चले आ रहे आध्यात्मिक मूल्यों पर हमला है। यह दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले मुल्क को अनारकी में धकेलने का दुस्साहस है। अगर इसकी अंदेखी की गई या सिर्फ महज़ कानूनी खानापूर्ति की रस्म अदा कर इसे गंभीरता से नही लिया गया तो याद रखिए यह धर्म और आध्यात्म के खिलाफ एक ऐसी कड़ी का सिलसिला है जो धर्म को कलंकित करेगा , यह धर्म और आध्यात्म की ऐसी हानि का कारण बनेगा जिसकी इतिहास में कम ही मिसाल मिलती होंगी और यह एक धर्म प्रधान देश की पहचान के लिए ठीक नही होगा।इस लिए इस तरह के हर दुस्साहस करने वालों और उनके योजनाकारों को क़ानून के कटघरे में लाकर उनके लिए उचित दंड निश्चित बनाना होगा।

” बक रहा हूं,जुनू में क्या क्या “

Ramswaroop Mantri

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