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रेलवे दुर्घटना के जिम्मेदार अधिकारियों को जेल भेजा  जाए 

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मुनेश त्यागी

       उड़ीसा के बालासोर में हुए भीषण रेल हादसे में 275 से ज्यादा यात्री दर्दनाक रुप से अपनी जान गवां चुके हैं, हजारों से ज्यादा जख्मी हैं। हादसे के बाद रेलवे मंत्री ने कहा है कि दोषियों की पहचान हो गई है। उनका कहना है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नल प्रणाली में बदलाव से यह हादसा हुआ है। उनका कहना है कि इस हादसे की जांच सीबीआई करेगी। उनका यह भी कहना है कि यह हादसा सिस्टम में बाहर से छेड़छाड़ का भी हो सकता है।

        इस प्रकार तरह तरह की बातें करके एक बार फिर से इस हादसे के असली कारणों से जनता का ध्यान भटका या जा रहा है और केवल जुमलेबाजी का सहारा लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। हमारे देश की रेलवे व्यवस्था सही तरीके से अपना काम नहीं कर रही है। वहां पर पर्याप्त संख्या में पदों को नहीं भरा जा रहा है। लाखों पद पिछले कई कई सालों से खाली पड़े हुए हैं। लगातार मांग के बावजूद भी ने नहीं भरा जा रहा है। रेलवे की मुकम्मल सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात नहीं हैं।

        रेलवे प्रणाली को लेकर, उसकी सुरक्षा के बारे में जो तथ्य सामने आए हैं, उनपर इस सरकार ने कभी ध्यान ही नहीं दिया है। वह सिर्फ गलत आंकड़े देकर, गलत बहाने बनाकर और सिर्फ जुमलेबाजी करके जनता का पेट भर रही है।

       हमारे देश की रेलवे व्यवस्था का यह हाल है कि रेल पटरियों कि रोज जांच करने वाले गैंगमैन कर्मचारियों की भर्तियां पिछले कई साल से रुकी हुई है। जहां दस गैंगमैन होने चाहिएं, वहां सिर्फ तीन आदमी काम कर रहे हैं। स्टेशन मास्टर 10-10, 12-12 घंटे काम कर रहे हैं। रेलवे ड्राइवर और गार्डों से जबरन ओवरटाइम कराया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ वंदे भारत रेलों के उद्घाटन पर करोड़ों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। अगर इस खर्च को बचा लिया जाए तो रेलवे सुरक्षा और बचाव का काम दुरुस्त किया जा सकता है।

       भारतीय रेलवे में लाखों लाख रेलवे कर्मचारियों के स्वीकृत पद पिछले कई कई वर्षों से खाली पड़े हुए हैं। इन्हें लगातार मांग करने के बावजूद भी नहीं भरा जा रहा है। भारतीय रेलवे में खाली पदों की संख्या 3 लाख 12 हजार से ज्यादा हैं। रेलवे के सुरक्षा विभाग में 1 लाख 40 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े पड़े हुए हैं। लगातार मांग करने के बाद भी मोदी सरकार इन्हें नहीं भर रही है।

      रेलवे की व्यवस्था को लेकर सीएजी की 2022 की रिपोर्ट आ गई है, रेलवे बोर्ड की रिपोर्ट मौजूद है, पार्लियामेंट्री कमेटी की रिपोर्ट मौजूद है। ये सारी रिपोर्टें बता रही हैं कि रेलवे की सुरक्षा को लेकर और उसकी व्यवस्था बेहतर करने के लिए सरकार का इस और कोई ध्यान नहीं है और ये सारी रिपोर्टें सरकार की नाकामी और अनदेखी को उजागर कर रहे हैं। ये सारी रिपोर्टें कहती हैं कि समय से निगरानी नहीं होती, रेलवे ट्रेक्स की एक हजार से ज्यादा डिरेलमेंट हो चुके हैं, निरीक्षण समय से नहीं होता और इसमें पैसे की भारी कमी बनी हुई है।

     ये सारी रिपोर्टें बता रही हैं कि रेलवे सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा का भयंकर अभाव है, सिगनलिंग सिस्टम पर्याप्त रूप से काम नहीं कर रहा है। पूरे देश में रेलों के लिए कवच सिस्टम मौजूद नहीं है। इस रेलवे हादसे ने बता दिया है कि रेलवे की अव्यवस्था के लिए सरकार ही सबसे बड़ी जिम्मेदार है। वह सबसे बड़ी अपराधी बन गई है। अब वह अपराधियों को ढूंढने का नाटक कर रही है।

       स्वीकृत पदों को पिछले कई सालों से नहीं भरा जा रहा है। सरकार की नाकामी की वजह से रेलवे यात्रा हमारे देश की सबसे ज्यादा असुरक्षित हो गई है। इस दुर्घटना को लेकर पूरी मोदी सरकार जिम्मेदार है। रेलवे सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता ही नहीं है। भारतीय सफ़र की लाइफलाइन रेलवे, सरकार की नीतियों की लापरवाही की वजह से तबाह हो गई है। 

      रेलवे सुरक्षा की नाकामियों को लेकर सरकार देश की जनता को गुमराह कर रही है, असलियत से दूर ले जाकर केवल सिर्फ और सिर्फ जुमलेबाजी से जनता को संतुष्ट करना चाहती है। रेलवे में बढ़ती असुरक्षा और हादसों के लिए केवल और केवल सरकार और उसकी संवेदनहीनता और नाकामियां ही जिम्मेदार और गुनाहगार हैं। इसके लिए  रेलवे मिनिस्टर को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए।

         सरकार बुलेट प्रूफ ट्रेनों के नाम पर लोगों की आंखों में धूल झोंक रही है और यात्रियों की सुरक्षा से भयंकर खिलवाड़ कर नहीं कर रही है। रेलवे सुरक्षा को लेकर सरकार की नाकामी बता रही है कि रेलवे दुर्घटना के लिए सरकार की नीतियां, उसकी उदासीनता, उसकी संवेदनहीनता और लापरवाही सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं।

      रेलवे विभाग की इन कमियों को ढूंढने के लिए, सरकार की जांच कमेटी कोई काम पर नहीं करने वाली है। वह सिर्फ गुमराह ही कर सकती है रेलवे की इस भयंकर दुर्घटना की सच्चाई को जानने के लिए सरकार ही नहीं, बल्कि एक सर्वदलीय समिति जांच समिति बनाने की जरूरत है। अब सरकार पर कोई भरोसा नहीं रह गया है। रेलवे को लेकर सरकार की सारी बातें केवल जुमलेबाजी साबित हो गई हैं।

       इसी के साथ साथ इस दुर्घटना में जो लोग मारे गए हैं, जो यात्री मौत के ग्रास बन गए हैं उनके लिए यह जरूरी है किस रेलवे दुर्घटना की जांच सर्वदलीय समिति करें, दोषी अधिकारियों और रेलवे मंत्री को तुरंत पदों से हटाया जाए और उन्हें लापरवाही के लिए जेल भेजा जाए। सभी मृतकों को एक एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए, उनके मां बाप को चालीस हजार रूपए महीना पेंशन दी जाय, उनके बच्चों की शिक्षा का तुरंत इंतजाम किया जाए और उनके सभी परिवारजनों को सरकारी नौकरियां दी जाएं और तमाम दोषी अधिकारियों और रेलवे मंत्री को तुरंत पद से हटाया जाए और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भारत की “लाइफ लाइन रेलवे” को महफूज रखने के लिए, रेलवे सुरक्षा के तमाम जरूरी उपाय और इंतजाम तुरंत किए जाएं और तमाम खाली पड़े हुए पदों को तुरंत ही स्थाई रूप से भरा जाए और रेलवे सफर को एकदम चुस्त दुरुस्त करके सुरक्षित बनाया जाए।

Ramswaroop Mantri

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