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*लड़कियों के विलंबित यौवन का कारण और निवारण*

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       डॉ. प्रिया 

    चारों तरफ अश्लीलता, ज़िस्मफरोसी, हर जेब के मोबाइल में पोर्न, अनेक फ्रेंड्सरूपी बॉडी पार्टनर, पाँचवी क्लास से सेक्स प्रैक्टिस आम है. ग्लोबल वॉर्निंग, पॉल्यूशन और जंक फूड आदि के कारण भी लड़कियां समय से पहले जवान हो रही हैं. सब तरफ अर्ली प्यूबर्टी देखी जा रही है।          

     पहले जहां प्यूबर्टी की उम्र 14-16 साल थी वहीं अब यह 12 साल या कभी-कभी और भी पहले हो गई थी। इसके बावजूद कुछ लड़कियाँ इस मामले में बीमार हैं. उनके यौवन की शुरुआत बहुत देर से होती है। इसे लेट प्यूबर्टी या डिले प्यूबर्टी कहा जाता है।

      इसके कारण लड़कियों के स्तनों का विकास और मासिक धर्म समय से नहीं होता. इससे लड़कियों की उम्र में देरी होने लगती है।

 *कैसे शुरू होती है प्यूबर्टी?*

         पिट्यूटरी ग्रंथि दो हार्मोन-ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) और फोलिकल्स स्टिमलिंग हार्मोन (एफएसएच) का उत्पादन शुरू कर रही है।

      इससे एगेंड (अंडाशय) बड़ा हो जाता है और एस्ट्रोजेन का उत्पादन शुरू हो जाता है। स्तनों का विकास शुरू होने के तुरंत बाद विकास में भी तेजी आ जाती है।

     क्रॉच डेवलपमेंट के लगभग 2-3 साल बाद पहला मासिक धर्म (पीरियड) शुरू होता है। जिस लड़की के स्तनों का विकास 13 साल की उम्र तक शुरू नहीं हुआ था, उसे बिलंबित यौवन माना जाता है।

 *लेट प्यूबर्टी के कारण*

    लेट प्यूबर्टी वाली लड़कियां देर से परिपक्व होती हैं। यदि एक बार इस समस्या का उपचार कर लिया जाता है, तो फिर प्यूबर्टी सामान्य रूप से आगे बढ़ने लगती है।

    हालांकि डिलेड प्यूबर्टी की समस्या लड़कियों की तुलना में लड़कों में अधिक देखी गई है। ऐसा पेरेंट्स से मिली जीन की वजह से भी हो सकता है।

    यदि मां को 14 साल की उम्र के बाद मासिक धर्म शुरू हुआ हो, तो बेटी के लिए भी यही उम्र प्यूबर्टी की हो सकती है। इस समय प्यूबर्टी की सही उम्र लगभग 12 ½ वर्ष है।

*फैट की कमी है मुख्य कारण :*

     शरीर की चर्बी का कम होना लड़कियों में प्यूबर्टी में देरी का एक प्रमुख कारण है। यह उन लड़कियों में देखा जा सकता है जो बहुत एथलेटिक हैं। खासकर जिमनास्ट, बैले डांसर और स्विमर में।

      यह समस्या एनोरेक्सिया नर्वोसा से पीड़ित लड़कियों में भी देखी जा सकती है। जो लड़कियां अत्यधिक डाइटिंग या बहुत कम खाती हैं, वे असामान्य रूप से पतली हो सकती हैं।

     उनमें यह होने का डर बना रहता है। कई क्रोनिक डिजीज, जिनमें शरीर में वसा अक्सर कम हो जाती है, यह लेट प्यूबर्टी का कारण हो सकती है।’

*कैंसर के इलाज से हो सकती है समस्या:*

      डिले प्यूबर्टी के कारण अंडाशय में समस्या हो सकती है। अंडाशय या तो ठीक से विकसित नहीं हो सकते हैं या क्षतिग्रस्त रहते हैं।

     टर्नर सिंड्रोम वाली अधिकांश लड़कियां अपनी उम्र के हिसाब से बहुत छोटी होती हैं। इनमें दो एक्स गुणसूत्रों में से एक का पूरा या कुछ हिस्सा गायब होता है।

    ल्यूकेमिया या कुछ अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज के कारण भी ओवरी डैमेज हो सकता है। शरीर की कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें पिट्यूटरी हार्मोन एलएच और एफएसएच, जिन्हें गोनाडोट्रोपिन भी कहा जाता है, की कमी के कारण डिले प्यूबर्टी की शिकार हो जाती हैं।

*कैसे किया जाता है डायग्नोसिस?*

     एंडोक्रिनोलॉजिस्ट एलएच, एफएसएच और एस्ट्राडियोल के स्तर को मापने के लिए ब्लड टेस्ट और अन्य परीक्षण करते हैं। एलएच और एफएसएच का हाई लेवल यह संकेत देता है कि ओवरी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

      इसके अलावा क्रोमोसोम की भी जांच की जाती है। ब्रेन एमआरआई, बोन एक्स-रे से भी इसका पता लगाया जाता है।

   क्या डिले प्यूबर्टी के लिए ट्रीटमेंट की जरूरत होती है? 

प्यूबर्टी शुरू करने में मदद के लिए 4-6 महीनों के लिए एस्ट्रोजेन देने का उपयोग किया जाता है। यह एस्ट्राडियोल की गोली या पैच के रूप में दिया जा सकता है, जिसे सप्ताह में दो बार त्वचा पर लगाने की जरूरत होती है।

     शरीर में फैट की कमी वाली लड़कियों को अधिक खाने और वजन बढ़ाने की सलाह दी जाती है।

 वजन, कद और जीन के कारण हर लड़की में प्यूबर्टी की उम्र में थोड़ा बहुत अंतर आ सकता है। लेट ब्लूमर्स में यह जरूरी नहीं कि भविष्य में प्रजनन संबंधी समस्याएं हों।

     किसी भी मिथ या सुनी-सुनाई बात पर भरोसा करने से बेहतर है कि विशेषज्ञ डॉक्टर से या हमसे संपर्क करें।

Ramswaroop Mantri

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