मध्य प्रदेश में फिर मंत्री मंडल विस्तार होने जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक इस बार भी इंदौर शहर को इंतजार करना पड़ सकता है। प्रदेश के सबसे बड़े शहर से 10 साल से कोई मंत्री नहीं है। राजनीतिक हलकों में यह बात उठने लगी है कि प्रदेश का सबसे बड़ा शहर और सर्वाधिक राजस्व देने वाले शहर को मंत्री कब मिलेगा? तुलसी सिलावट और उषा ठाकुर इंदौर के ग्रामीण इलाकों से मंत्री बनाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र से विधायक होने से दोनों का मंत्री के नाते शहर में सीधा दखल नहीं दिख रहा। हाल ही में नाइट कल्चर हो रहे बवाल के बीच बुलाई गई बैठक से भी दोनों को दूर रखा गया।
एक नहीं, तीन दावेदार हैं जो तीन से चार बार के लगातार विजेता
इंदौर शहर के विधायक रमेश मेंदोला प्रदेश में सर्वाधिक मतों से जीतने वाले विधायक हैं तो महेंद्र हार्डिया लगातार 4 बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। दोनों का दावा पिछले उपचुनाव के बाद था लेकिन आपसी खींचतान में इंदौर को होल्ड पर कर दिया गया था। इनके अलावा पूर्व महापौर और चार नंबर सीट से लगातार तीन बार विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ का भी नाम है।

इस फोटो से समझिए। बीते दिनों भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर शहर में बढ़ते अपराधों और नाइट कल्चर को लेकर पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की बैठक ली। इसमें शहरी क्षेत्र के विधायक महेंद्र हार्डिया, रमेश मेंदोला और आकाश विजयवर्गीय मौजूद थे लेकिन दोनों मंत्री उषा ठाकुर और तुलसी सिलावट नहीं आए।
भोपाल, ग्वालियर शहर से बनाए गए हैं मंत्री, जबलपुर में विधायक सीनियर नहीं
– इंदौर की तुलना करें तो भोपाल शहर से भाजपा सरकार में विश्वास सारंग को मंत्री बनाया है।
– ग्वालियर शहर से सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर मंत्री हैं।
– जबलपुर शहर में भाजपा के पास एकमात्र विधायक हैं जो कि दो बार के विधायक हैं इसलिए मंत्रिमंडल की सीनियरिटी के दायरे में नहीं आते।
एक समय इंदौर से थे दो-दो मंत्री
इंदौर शहर में 2008 के पहले तक दो-दो कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे। एक कैलाश विजयवर्गीय तो दूसरे लक्ष्मण सिंह गौड़। कैलाश विजयर्गीय पहली बार 2003 में तो वहीं लक्ष्मण सिंह गौड़ को 2007 में मंत्री बनाया गया था। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय लोक निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान मंत्री थे तो वहीं लक्ष्मण सिंह गौड़ को उच्च शिक्षा मंत्री बनाया गया था। वहीं 2008 का चुनाव कैलाश विजयवर्गीय ने महू से लड़ा था जिसके बाद से वह इंदौर ग्रामिण के कोटे से मंत्रिमंडल में शामिल हुए। कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद 4 जुलाई 2015 को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
2016 में मंत्री बनने का मौका मिला तो आपसी लड़ाई में इंदौर हो गया सरकार से बाहर
2018 चुनाव के पहले 2016 में शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार हो रहा था तब भी इंदौर से विधायक महेंद्र हार्डिया, सुदर्शन गुप्ता और रमेश मेंदोला को मंत्री बनाने के लिए इन विधायकों के नाम मजबूती के साथ प्रदेश और केंद्रीय संगठन तक बढ़ाए गए थे। दावेदारों की सूची जब दिल्ली पहुंची तो इंदौर को लेकर ही सबसे ज्यादा खींचतान मची। दिल्ली में मंथन शुरू हुआ तो पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सुदर्शन गुप्ता का सिंगल नाम आगे बढ़ाया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने रमेश मेंदोला को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर जोर दिया।
सूत्रों का कहना है कि इस दौरान ताई मेंदोला के नाम पर सहमत नहीं थी तो विजयवर्गीय गुप्ता के नाम पर..। जब दोनों ही नामों पर सहमति नहीं बनी तो नया फॉर्मूला सुझाया गया कि इंदौर से महेंद्र हार्डिया को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर तोमर हार्डिया के नाम पर सहमत नहीं थे। हार्डिया कुशवाह समाज से हैं और तोमर ग्वालियर से कुशवाह समाज के ही दूसरे विधायक को मंत्रिमंडल में जगह दिलाना चाहते थे।
कांग्रेस सरकार ने भी इंदौर से किसी को नहीं बनाया था मंत्री
2018 में जब प्रदेश में कमलनाथ की सरकार आई तब भी इंदौर शहर खाली हाथ रहा। इस दौरान भी कमलनाथ ने अपने मंत्रिमंडल में इंदौर ग्रामीण सीट राऊ के विधायक जीतू पटवारी और सांवेर के विधायक तुलसी सिलावट को मंत्री बनाकर मंत्रिमंडल में जगह दी थी। इंदौर 1 से कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला को पहली बार का विधायक बताकर मंत्री पद के दायरे से बाहर रखा गया। 2020 में सरकार कमलनाथ सरकार गिरने के बाद जब शिवराज सरकार गठन हुआ तब भी ऐसा ही हुआ। सिलावट फिर बन गए लेकिन राऊ से पटवारी की जगह महू से उषा ठाकुर मंत्रिमंडल में चुन ली गईं।
चर्चा शुरू हुई लेकिन नाम इंदौर से बाहर के आए
भाजपा की पिछली दो सरकार में मंत्री विहीन रहे इंदौर को लेकर शुक्रवार को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई है। इंदौर में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या मंत्रिमंडल में इंदौर शहर से भी किसी विधायक को मंत्री नहीं बनाया जा सकता? आखिरी बार इंदौर-5 के विधायक महेंद्र हार्डिया को राज्य मंत्री बनाया गया था। वे 2013 तक मंत्री रहे। इसके बाद से इंदौर शहर से किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया।





