अडाणी ग्रुप पर गुरुवार (31 अगस्त) को एक और विदेशी रिपोर्ट सामने आने के बाद कंपनी के 10 शेयर में से 9 में गिरावट देखने को मिली। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) में दावा किया गया है कि अडाणी ग्रुप के निवेशकों ने गुपचुप तरीके से खुद अपने शेयरों को खरीदकर बाजार में लाखों डॉलर का निवेश किया।
हालांकि, ग्रुप ने इन आरोपों का खंडन किया है। कहा है कि यह बदमान करने और मुनाफा कमाने की साजिश है। OCCRP ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि अडाणी ग्रुप की कंपनियों ने मॉरीशस के गुमनाम निवेश फंड्स के जरिए ग्रुप के शेयरों में करोड़ों रुपए का निवेश किया।
अडाणी ग्रुप ने कहा- ये हिंडनबर्ग रिपोर्ट को फिर से जिंदा करने की कोशिश
अडाणी ग्रुप का कहना है कि हम इन रीसाइकल्ड आरोपों को खारिज करते हैं। ये न्यूज रिपोर्ट तर्कहीन हिंडनबर्ग रिपोर्ट को फिर से जिंदा करने की एक कोशिश मालूम होती है। अडाणी ग्रुप ने कहा कि OCCRP ने जो आरोप लगाए हैं, वह एक दशक (10 साल) पहले बंद हो चुके मामलों से जुड़े हैं।
उस वक्त राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने ओवर इनवॉयसिंग, विदेश में फंड ट्रांसफर, रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन और FPI के जरिए निवेश के आरोपों की जांच की थी। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाया था और मामले को बंद कर दिया था।
कंपनी के शेयर्स गिराकर मुनाफा कमाने की कोशिश
- अडाणी ग्रुप ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन पब्लिकेशन ने; जिन्होंने हमें प्रश्न भेजे थे, हमारे पक्ष को पूरी तरह से पब्लिश नहीं करने का फैसला लिया। इन कोशिशों का मकसद अन्य बातों के साथ-साथ हमारी कंपनियों के शेयरों को गिराकर मुनाफा कमाना है। कई अथॉरिटीज इन शॉर्ट सेलर्स की जांच कर रही हैं।’
- ग्रुप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और मार्केट रेगुलेटर सेबी इन मामलों की जांच कर रहे हैं। इसलिए रेगुलेटरी प्रोसेस की रिस्पेक्ट करना जरूरी है। हमें कानून की प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। हम अपने खुलासों की क्वालिटी और कॉरपोरेट गवर्नेंस स्डैंडर्ड के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं। इन न्यूज रिपोर्ट्स का समय संदिग्ध, शरारती और दुर्भावनापूर्ण है। हम इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज करते हैं।
OCCRP ने रिपोर्ट में 2 करीबियों का जिक्र भी किया
- कई टैक्स हेवन देशों की फाइलों और अडाणी ग्रुप के आंतरिक ई-मेल का हवाला देते हुए , OCCRP ने कहा कि उसकी जांच में कम से कम 2 ऐसे मामले सामने आए, जहां ‘रहस्यमयी’ निवेशकों ने इस तरह के ऑफशोर स्ट्रक्चर (गुमनाम फंड्स) के जरिए अडाणी के शेयर खरीदे और बेचे।
- OCCRP ने दावा किया कि अडाणी परिवार के साथ निवेशक नासिर अली शबान अहली और चैंग चुंग-लिंग के लंबे समय से व्यापारिक रिश्ते हैं। गौतम अडाणी के बड़े भाई विनोद अडाणी के ग्रुप की कंपनियों और फर्मों में ये डायरेक्टर और शेयरहोल्डर के रूप में भी काम कर चुके हैं।
- इसमें आरोप लगाया गया है कि डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि उनके निवेश का काम संभालने वाली कंपनी ने विनोद अडाणी की कंपनी को उनके निवेश में सलाह देने के लिए भुगतान किया था।
OCCRP क्या है?
OCCRP की स्थापना 2006 में हुई, जो खुद को इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म बताती है। ओपन सोसायटी फाउंडेशन ऑफ जॉर्ज सोरोस इसके फाउंडर है। OCCRP की वेबसाइट के अनुसार, वह कंपनियों के बारे में रिसर्च करती है और उसकी रिपोर्ट मीडिया संस्थानों की मदद से सीरीज में पब्लिश करती है। यह यूरोप, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया में काम करती है।
हिंडनबर्ग ने 8 महीने पहले शेयर मैनिपुलेशन सहित कई आरोप लगाए थे
8 महीने पहले इसी साल 24 जनवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी ग्रुप को लेकर एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। रिपोर्ट में ग्रुप पर मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर शेयर मैनिपुलेशन जैसे आरोप लगाए गए थे। रिपोर्ट के बाद ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, बाद में इसमें रिकवरी आई।





