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सुरंग के अंदर से लेकर बाहर तक निराशा का माहौल:श्रमिकों के बाहर आने का इंतजार बढ़ा

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दिवाली के दिन से उत्तरकाशी की निर्माणाधीन सुरंग में कैद 41 श्रमिक बाहर निकले की उम्मीद लगाए हैं। उन्हें बाहर निकालने की पूरी कोशिशें हो रही हैं लेकिन हर बार मशीन के आगे बाधा आ रही है। रेस्क्यू का आज 14वां दिन है।

सुरंग के बाहर से लेकर भीतर निराशा का माहौल

शनिवार को सुरंग के अंदर से लेकर बाहर तक निराशा का माहौल रहा। सुरंग में फंसे वीरेंद्र की भाभी सुनीता ने कहा कि अब वीरेंद्र हताश हो रहा है। वह हमसे रोजाना पूछता है कि हम कब बाहर आएंगे। यहां सब लोग परेशान हैं।

यह युद्ध जैसी स्थिति- सैयद अता हसनैन

एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ‘मुझे लगता है कि हर किसी का ध्यान इस पर है कि यह ऑपरेशन कब खत्म होगा, लेकिन आपको यह देखने की जरूरत है कि यह ऑपरेशन और भी जटिल होता जा रहा है। हमने आपको कभी समयरेखा नहीं दी है। मैंने अनुभव किया है कि जब आप पहाड़ों के साथ कुछ करते हैं, तो आप कुछ भी भविष्यवाणी नहीं कर सकते। यह बिल्कुल युद्ध जैसी स्थिति है।

मलबे से बरमे का 25 मीटर हिस्सा निकालना बाकी

ऑगर मशीन का बरमा फंसने के बाद उसे काटकर निकालने का काम जारी है। मशीन के बरमे का 45 मीटर हिस्सा फंसा था। जिसे 20 मीटर तक काटकर निकाल लिया गया है। अभी 25 मीटर तक निकाला जाना बाकी है। इसके लिए प्लाजा कटर मशीन को हैदराबाद से मंगवाया गया है।

गर मशीन के सामने अड़चन से रोका ऑपरेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सिलक्यारा स्थित निर्माणाधीन टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन सिलक्यारा में आई बाधा के संबंध में जानकारी ली। सीएम ने उन्हें बताया कि इस्पात की बनी वस्तुओं के ऑगर मशीन के सामने आने से कार्य में बाधा उत्पन्न हुई है, जिसे ठीक किया जा रहा।

ये हैं सिलक्यारा अभियान के चेहरे

दिवाली के दिन हुई घटना के बाद बचाव अभियान में उत्तराखंड और केंद्र सरकार की कई एजेंसियां लगाई गईं। इसके साथ ही विदेश से बचाव अभियान के विशेषज्ञ भी बुलाए गए, जिनमें से कुछ नामों की खूब चर्चा हो रही है। आइये जानते हैं कि विशेषज्ञ कौन हैं? सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान में उनकी क्या भूमिका हैं? 

From ex PMO advisor to foreign experts the faces of Silkyara Tunnel collapse rescue operation

अर्नाल्ड डिक्स 
12 नवंबर के हादसे के बाद लगातार 14वें दिन मजदूरों को निकालने के लिए बहु-एजेंसी अभियान चलाया जा रहा है। इस बीच अभियान में मदद और निरीक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स भी घटनास्थल पर पहुंचे। उनके साथ छह अन्य टनल एक्सपर्ट भी हैं 

ऑस्ट्रेलियाई अर्नाल्ड जिनेवा स्थित इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। पेशे से वह एक बैरिस्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी हैं।

अर्नाल्ड को भूमिगत सुरंगों में महारत हासिल है। उन्हें भूमिगत अभियानों में आने वाली परेशानियों के तकनीकी हल खोजने वालों में से गिना जाता है। इसके अलावा उनकी पहचान कठिन तकनीकी और इंजीनियरिंग से जुड़े मामलों में खतरों को कम करने वाले विशेषज्ञ और किसी भी घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया के सलाहकार के रूप में भी होती है। 

अर्नाल्ड को मार्च 2011 में टनलिंग और फायर सेफ्टी में योगदान के लिए एलन नीलैंड ऑस्ट्रेलियन टनलिंग सोसाइटी अवार्ड दिया गया था।

From ex PMO advisor to foreign experts the faces of Silkyara Tunnel collapse rescue operation

क्रिस कूपर 

क्रिस कूपर 
करीब हफ्ते भर बाद सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली गई। 18 नवंबर को माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर भी बचाव कार्य में मदद के लिए मौके पर पहुंचे। विशेषज्ञ कूपर एक चार्टर्ड इंजीनियर हैं, जिन्हें अहम अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में काम करने का लम्बा अनुभव है वह मेट्रो टनल, डैम, रेलवे, और माइनिंग प्रोजेक्ट्स में काम कर चुके हैं। कूपर भारत में ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में बतौर कंसल्टेंट काम कर रहे हैं।

From ex PMO advisor to foreign experts the faces of Silkyara Tunnel collapse rescue operation

उत्तरकाशी में पूर्व सलाहकार पीएमओ भास्कर खुल्बे

भास्कर खुल्बे 
12 नवंबर की घटना के बाद एक हफ्ते बीत गए थे, लेकिन बचाव अभियान में सफलता नहीं मिली थी। इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में पीएम मोदी के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे को घटनास्थल भेजा गया। 18 नवंबर को खुल्बे ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और रेस्क्यू अभियान की रणनीति को लेकर एक विशेष बैठक आयोजित की। 

बैठक के बाद ही रेस्क्यू अभियान के सभी मोर्चों पर युद्धस्तर पर कार्रवाई शुरू की गईं। भास्कर खुल्बे ने मीडिया को बताया था कि अब पांच प्लान पर एक साथ काम शुरू होगा। इसमें राज्य व केंद्र की छह एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। इन पांच प्लान में सुरंग के सिलक्यारा छोर, बड़कोट छोर और सुरंग के ऊपर तथा दाएं और बाएं से ड्रिलिंग कर रास्ता तैयार किया जाएगा। जिससे अंदर फंसे सभी मजदूरों को बचाया जा सके।

भास्कर खुल्बे को पिछले साल जून में उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) बनाया गया था। उन्हें प्रधानमंत्री के बदरीनाथ व केदारनाथ पुनर्निर्माण के ड्रीम प्रोजेक्टों की कमान सौंपी गई थी। इससे पहले प्रधानमंत्री के सलाहकार रहते भास्कर खुल्बे केदारनाथ और बदरीनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की निगरानी करते रहे हैं। 

खुल्बे ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर से 1979 में जूलॉजी से एमएससी की थी। भास्कर का चयन भारतीय सेना में अधिकारी के पद के लिए हो गया था। उन्होंने छह माह तक ट्रेनिंग भी की लेकिन मेडिकल कारण से उन्हें वापस आना पड़ा। भास्कर ने जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रो. जेएस बिष्ट के निर्देशन में पीएचडी शुरू कर दी थी। 1982 में उनका चयन इंडियन फॉरेस्ट सर्विसेज के लिए हो गया था और इसमें वह अखिल भारतीय स्तर पर तीसरे स्थान पर रहे थे। आईएफएस की ट्रेनिंग के दौरान भी वे पढ़ाई में लगे रहे और अंतत: उनका चयन आईएएस में हो गया। 

उनकी योग्यता को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान उन्हें पीएमओ में महत्वपूर्ण पोस्टिंग दी गई थी। भास्कर मध्यमवर्गीय परिवार से थे। उनका परिवार नैनीताल में तल्लीताल में लक्ष्मी कुटीर के निकट रहता था। उनके पिता ख्यालीराम खुल्बे कांट्रेक्टर थे और उनके दो भाई नवीन और जीवन बैंक अधिकारी थे। 

Ramswaroop Mantri

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