पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में 1984 से कभी कांग्रेस तो कभी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) सरकारें रही है। इस बार यह देखना रोचक होगा कि एमएनएफ के जोरमथांगा अपनी सरकार को बचा पाते हैं या फिर राज्य पूर्व आईपीएस लालदुहोमा की नेतृत्व में बनी नई राजनीतिक पार्टी जोरम पिपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) कोई नई राजनीतिक समीकरण बनाएगी।
लालदुहोमा का अपने दम पर सरकार बनाने का दावा
पूर्व आईपीएस लालदुहोमा अपने दम पर मिजोरम में सरकार बनाने की बात कर रहे हैं। जोरम पिपुल्स मूवमेंट (जेएडपीएम)के प्रमुख और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालदुहोमा ने भ्रष्टाचार, रोजगार और विकास के साथ चुनाव मैदान में उतरे थे। उन्होंने कहा, उनको पूरा विश्वास है कि पार्टी अपने दम पर अकेले सरकार बनाने जा रही है। जबकि कांग्रेस इस बार कई गारंटी के साथ मिजोरम चुनाव में उतरी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष लालसावता ने कहा कि जनता का साथ कांग्रेस को मिला है। हम सरकार बनाएंगे।
सीएम जोरमथांगा ने किया सत्ता में वापसी का दावा
मिजोरम के मुख्यमंत्री और मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष जोरमथांगा ने त्रिशंकु विधानसभा की संभावना को खारिज किया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सत्ता में वापसी करेगी। अगर पार्टी जीतती है तो जोरमथांगा फिर से मिजोरम की कमान संभालेंगे।
राज्य में बहुमत का आंकड़ा 21
मिजोरम में विधानसभा सभी की कुल 40 सीटें हैं। इनमें एक सीट सामान्य वर्ग के लिए और 39 सीटें एसटी (अनुसूचित जनजाति) के लिए आरक्षित हैं। राज्य में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 21 है।





