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आईआईएम इंदौर के छात्रों ने भगवद्गगीता से सीखे मैनेजमेंट के पाठ

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आईआईएम इंदौर का एक नया रूप देखने को मिल रहा है। भगवद्गगीता (Bhagwat Geeta) के माध्यम से मैनेजमेंट के पाठ सीखते छात्र और पुरातन ज्ञान से आज के छात्रों को तैयार करने का गुर सीखते प्रोफेसर। गीता जयंती (Gita Jayanti) के मौके पर आईआईएम इंदौर (Iim Indore) में यह दृश्य दिखा। आईआईएम के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु राय (Professor Himanshu Rai) अपने खास अंदाज और नवाचार के लिए जाने जाते हैं। संस्कृत पर उनकी पकड़ और धर्म संस्कृति के माध्यम से छात्रों को मैनेजमेंट पढ़ाने में उनका कोई सानी नहीं है। गीता जयंती के मौके पर भी उनका यही रूप दिखा। उन्होंने छात्रों और गुरुओं के साथ गीता जयंती पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें उन्होंने बताया कि आज के परिदृश्य में किस तरह से गीता के पाठों को आत्मसात किया जा सकता है। उन्होंने विभिन्न् उदाहरणों के माध्यम से बताया कि नौकरी, व्यापार, धर्म, युद्ध और कर्म इन सबका आपस में क्या संबंध है। प्रोफेसर हिमांशु राय के आध्यात्मिक झुकाव से संस्थान में कई नवाचार हुए और उनके नेतृत्व में संस्थान के परिसर में आध्यात्मिक उपवन, जेन उपवन और ध्वनि उपवन: अनुनाद भी निर्मित किया गया। ये गीता पाठ भी आध्यात्मिक उपवन में हुआ था। वहां आईआईएम इंदौर परिवार के सदस्य अक्सर योगा और ध्यान करने आते हैं।

प्रथम अध्याय में धृतराष्ट्र द्वारा पूछा गया प्रश्न हमें खुद से पूछना चाहिए
प्रोफेसर हिमांशु राय ने इस मौके पर कहा कि गीता के प्रथम अध्याय में धृतराष्ट्र ने जो पहला प्रश्न पूछा, हालांकि वह संजय से था, पर कहीं न कहीं वह वास्तव में धृतराष्ट्र ने स्वयं से पूछा था। आवश्यकता है कि हम भी वही प्रश्न स्वयं से पूछें। वह प्रश्न था कि धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे यानी यह जो कुरुक्षेत्र का स्थान है वह धर्म का स्थान है। अर्थात आज यह निर्णय होगा कि धर्म इधर था या धर्म उधर था। यही प्रश्न हमें हर बार खुद से पूछना चाहिए कि जो हम कर रहे हैं प्रतिदिन प्रतिपहर प्रतिक्षण वह धर्म है या धर्म से इतर है। इसीलिए हमें यह भी जानना आवश्यक है कि धर्म है क्या। 

क्या है धर्म
प्रोफेसर हिमांशु राय ने महर्षि कणाद का उदाहण देते हुए बताया कि महर्षि ने बताया है कि धर्म वही है जिससे जिस लोक में आप हैं और दूसरा जो परलोक है दोनों की एकसाथ सिद्धी हो जाए। इसकी दूसरी परिभाषा यह भी है कि जो धारण किया जाए वह धर्म है। जैसे लेखनी का धर्म है लिखना और मानव का धर्म बताया गया है मानवता। 

gita jayanti event iim bhagavad gita lessons by professor himanshu rai

गीता के अध्याय और उनके अर्थों से सिखाया कर्म क्या है
प्रो. हिमांशु राय ने छात्रों को गीता के अध्याय के माध्यम से बताया कि कर्म क्या है। उन्होंने गीता जयंती का महत्व बताने के साथ ही आज के वर्तमान परिदृश्य में गीता को किन अर्थों में आत्मसाद करें यह भी बताया। उन्होंने कहा…
“मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय।
निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः॥”
“In devotion dwell your mind; in Me, let your intellect reside. Through this, you shall live in Me, doubtless.”
आईआईएम इंदौर में गीता जयंती के पावन अवसर पर मैंने धर्म के गहन महत्व पर सही कर्म और सत्य संरेखण की ओर मार्गदर्शन करने वाले गीता के 12वें अध्याय के छंदों के सार पर जोर दिया। मेरी प्रिय शिक्षक और मार्गदर्शक, गीता की शिक्षाएँ न केवल भक्ति योग पर बल देती हैं बल्कि इसे धार्मिक विकल्पों और कार्यों के माध्यम से मूर्त रूप देने पर भी जोर देती हैं। गीता बुद्धिमानी से अनुकूलन और चयन में सामंजस्य को खूबसूरती से चित्रित करती है, जो शाश्वत ज्ञान को प्रतिध्वनित करती है और एक श्रद्धालु अनुयायी को सामंजस्यपूर्ण अस्तित्व की ओर मार्गदर्शन करती है।

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परनाना संस्कृत गुरुकुल चलाते थे, मां ने संस्कृत में पीचडी और डी लिट किया
हिमांशु राय को संस्कृत का ज्ञान विरासत में मिला है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्य़क्रमों में भी गीता और अन्य धर्मग्रंथों के श्लोक के माध्यम से मैनेजमेंट के पाठ पढ़ाते रहते हैं। संस्कृत पर उनकी भाषा शैली को देखकर बड़े बड़े विद्वान भी चौंक जाते हैं। हिमांशु राय बताते हैं कि उनके नाना नानी बंटवारे के समय पाकिस्तान के एक गांव से विस्थापित होकर कानपुर आकर बसे थे। उनके परनाना पं. किशनलाल शर्मा लड़कियों के लिए संस्कृत का गुरुकुल चलाते थे और पाकिस्तान के कटासराज मंदिर के पुरोहित थे, जिनकी प्रेरणा से मां ने संस्कृत में बीए, बीएड, एमए, एमएड, पीएचडी व डी लिट किया। इसलिए उनको संस्कृत की शिक्षा व संस्कार विरासत में मिले। ऐसे में उनकी भी रुचि पढ़ने लिखने और दर्शन, वेद से लेकर प्रकृति में काफी रहती थी। प्रोफेसर हिमांशु राय को अभी देश के शीर्ष 25 मोटीवेशनल स्पीकर में भी शामिल किया गया है।

संस्कृत, तमिल और उड़िया भाषा की निःशुल्क वर्कशाप
यहां पर यह जानना भी आवश्यक है कि प्रोफेसर हिमांशु राय के प्रयासों से आईआईएम इंदौर में हिन्दी में कोर्स शुरू किए गए हैं। इसके अलावा योग दिवस और अन्य महत्वपूर्ण दिनों में भी आईआईएम इंदौर में छात्रों के लिए धर्म, संस्कृति, प्रकृति और योग से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ संस्कृत, तमिल और उड़िया भाषा की निःशुल्क वर्कशाप भी यहां पर आयोजित की जाती हैं। 

Ramswaroop Mantri

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