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आकृति बिल्डर 3 मार्च को हाईकोर्ट में तलब, अफसरों की भी लगेगी हाजरी

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भोपाल। प्रदेश की राजधानी के आकृति बिल्डर के प्रशासन पर भारी पड़ने के बाद अब आशियाने की आस में पूंजी गंवाने वाले लोगों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। इस मामले में अब हाईकोर्ट ने बिल्डर हेमंत सोनी को तीन मार्च को तलब किया है। खास बात यह है कि हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान जिम्मेदार अफसरों में शामिल भोपाल कलेक्टर, निगमायुक्त और संबंधित अधिकारियों को भी आॅनलाइन हाजिर रहने के निर्देश दिए हैं। दरअसल इस बिल्डर द्वारा बीते कई सालों में सैकड़ों लोगों को मकान देने के नाम पर करोड़ों रुपए राजधानी में रहने वाले लोगों से वसूल कर हजम कर लिए गए हैं।
ऐसे मामलों में प्रशासन से की गई शिकायत के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल सकी है, जिसकी वजह से लोग बेहद परेशान बने हुए हैं। राजधानी में यह हाल तब है जबकि सरकार से लेकर प्रशासन का सभी आला अमला यहीं बैठता है, इसके बाद भी बिल्डरों से आम लोग बेहद परेशान रहते हैं। राजधानी के आकृति बिल्डर  द्वारा सुनहरे सपनों का ऐसा जाल बुना जाता है कि आम आदमी अपने घर का सपना सच होने के ख्बाब में ऐसा डूबता है कि अपने जीवन भर की मेहनत की कमाई उसे थमा देता है और उसके चक्कर काटने पर मजबूर हो जाता है। अब इस मामले में सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन की सिंगल बेंच ने भोपाल कलेक्टर को निर्देश दिए कि राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों की एक टीम गठित की जाए, जो आकृति ईको सिटी में रहने वाले सीनियर सिटीजन की समस्याओं का निराकरण कर सके। प्रकरण के अनुसार भोपाल में एजी-8 कंपनी ने वर्ष 2010 में आकृति ईको सिटी के नाम से प्रोजेक्ट बनाया था। इसमें सीनियर सिटीजंस को मकान बनाकर दिए गए थे। आकृति ईको सिटी नेस्ट प्रोजेक्ट में रहने वाले इन्हीं सीनियर सिटीजंस की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि बिल्डर ने उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी। हाईकोर्ट ने इस मामले में जस्टिस एके सक्सेना की अध्यक्षता में कमीशन गठित कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

कमीशन की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया कि नेस्ट प्रोजेक्ट सीनियर सिटीजंस के लिए रहने लायक नहीं है। ओपीडी में डॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं हैं। पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। बिल्डिंग में लिफ्ट और फायर फाइटिंग सिस्टम खराब है। सीनियर सिटीजंस की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि बिल्डर के खिलाफ 300 से अधिक शिकायतें हैं। खास बात यह है कि  इस बिल्डर की मनमानी इससे ही समझी जा सकती है कि उसके खिलाफ रेरा द्वारा 55 शिकायतों पर कुर्की के आदेश जारी किए जा चुके हैं और करीब एक सैकड़ा शिकायतों पर सुनवाई के आधार पर वसूली के नोटिस भी जारी किए गए उसके बाद भी यह सब कागजों तक ही सीमित है। यही वजह है कि इतना सबकुछ होने के बाद भी आकृति बिल्डर्स अपने रसूख की दम पर इन मामलों में कोई कदम अब तक उठाता नहीं दिखा है।

बुजुर्ग हो रहे सुविधाओं के लिए परेशान  
पांच दर्जन से अधिक सीनियर सिटीजन सालों से इस बिल्डर के चक्कर काटने को मजबूर बने हुए हैं। इन सभी ने अपनी जीवन भर की पूंजी देकर मकान बुक किए थे। एजी8 ग्रुप के चैयरमैन ने नेस्ट के मेंटनेंस व अन्य सभी सुविधाओं के लिए 350 रुपए प्रति वर्गफीट राशि भी वसूली , जो कि आकृति सीनियर सिटीजन होम्स दी नेस्ट ट्रस्ट के खाते में जमा की जानी थी , लेकिन उसे जमा करने की जगह एजी8 के चेयरमैन व डायरेक्टर द्वारा उसका उपयोग स्वयं के लिए किया जा रहा है। जबकि इस राशि को ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराकर उसके ब्याज से प्राप्त राशि से सीनियर सिटीजन के लिए बने नेस्ट के मेंटनेंस का काम किया जाना था। इस राशि के जमा न होने से सीनियर सिटीजन के स्वास्थ्य, सुरक्षा, खानपान एवं मूलभूति सुविधाओं के प्रबंधन पर संकट बन गया है।

हर बार दिया झूठा शपथपत्र
खास बात यह है कि बिल्डर के खिलाफ की गई शिकायतों पर सुनवाई के दौरान तीन बार शपथपत्र देकर जल्द ही आधे अधूरे मकानों को पूरा कर उन्हें संबंधित लोगों को देने का आश्वासन दिया गया , लेकिन इसके बाद भी न तो कोई भी निर्माण कार्य पूरा किया गया और न ही किसी को मकान का आधिपत्य ही दिया गया। बीते साल इस तरह के शपथ पत्र 3 मार्च , 6 अक्टूबर और 8 दिसंबर को तहसीलदार के न्यायालय में दिए गए हैं।  इसके बाद भी किसी भी मकान क्रेता को मकान का काम पूरा कर आधिपत्य नहीं दिया गया है। खास बात यह है कि दो साल पहले 26 अगस्त 2019 को भी तहसील न्यायालय को बिल्डर द्वारा लिखित में बताया गया था कि दो माह में निर्माण पूरा कर आधिपत्य दे दिया जाएगा।

अब नए प्रोजेक्ट की अनुमति पर लगाई जा रही रोक
तमाम आश्वसन और शपथपत्रों में प्रशासन से किए गए वादों पर भी आकृति बिल्डर द्वारा उन्हें पूरा नहीं किया गया है। इस मामले में प्रशासन के सामने अब तक ऐसे डेढ़ हजार लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, जो बीते दो दशक से इस बिल्डर के जाल में उलझकर अपनी पूंजी से हाथ धो बैठे हैं। प्रशासन व रैरा के इस मामले में आदेशों का लगातार पालन नहीं करने की वजह से अब जिला प्रशासन ने नगर निगम भोपाल को पत्र लिखकर इस बिल्डर को किसी नए प्रोजेक्ट की अनुमति न देने के लिए पत्र लिखा है। यह कदम भी तब उठाया गया है जब मामला हाईकोर्ट में पहुंच चुका है।

Ramswaroop Mantri

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