सुसंस्कृति परिहार
जुम्मा-जुम्मा चार रोज़ पहले की बात है एक महिला आटो में रोती हुई सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने देखी होगी।वह रो-रो कर कह रही थी उसे उत्तराखंड पुलिस मार डालेगी उसी दिन से वह महिला लापता है, उसका नाम उर्मिला सुवासरा है वह टीवी कलाकार हैं।जो सहारनपुर उत्तर प्रदेश की रहने वाली है।

सवाल ये है कि उसे यह मौत का डर क्यों सता रहा था जिससे वह रो रही थी। बात दरअसल यह बताई जा रही है कि सितंबर सन् 1922 में उत्तराखंड के एक रिज़ार्ट वनंतरा में रिसेप्शनिस्ट का काम करने वाली 19 साल की युवती को किसी वीवीआईपी के लिए एक्स्सेट्रा सेवाएं देने को कहा गया था जिससे उसने इंकार कर दिया था।यह बात उसने अपने दोस्त पुष्प दीप को बताई थी जो उसने अदालत को बताई थी। बाद में उसके साथ क्या गुज़री कौन वीवीआईपी आया था।पता नहीं चला।बाद में उसका शव चीबा नदी से सातवें दिन बरामद हुआ।इस मामले में होटल मैनेजर,मालिक और एक अन्य कर्मचारी पर मामला दर्ज हुआ जिन्हें आगे चलकर आजन्म कारावास की सजा हुई जो वे भुगत रहे हैं। जब इस मामले की जांच पड़ताल शुरू हुई थी उसके पूर्व ही रिज़ार्ट में एक कमरे को बुलडोजर चलवाकर ,ऐसा समझा जा सकता है कई महत्वपूर्ण सुरागों को ज़मींदोज़ कर दिया गया था। इसलिए इस फैसले से अंकिता के परिवार और आम जन रुष्ट थे क्योंकि इससे लग रहा था मामला अतिगंभीर है और किसी वीवीआईपी को बचाया जा रहा है। अभिनेत्री उर्मिला ऐसी पहली महिला थी जिसने इस घटना का पर्दा उठाने की कोशिश की जल्दबाजी में उसने एक वीडियो जारी कर किया है जिसमें भाजपा के एक राष्ट्रीय महासचिव का नाम शामिल होना बताया जा रहा है।
वीडियो में उर्मिला सनावर ने हत्याकांड से जुड़े एक कथित ‘वीआईपी’ का नाम सामने लाने की बात कही है और भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विदित हो अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी का आरोप है कि मुक़दमे की सुनवाई के दौरान भी सरकारी स्तर पर दबाव बनाया गया था उन्होंने कहा, “अदालत ने पीड़ित पक्ष को अपनी पसंद का सरकारी वकील चुनने का अधिकार दिया था, लेकिन सरकार ने हमसे पूछे बिना वकील नियुक्त कर दिया बाद में जन आंदोलन के बाद दूसरा सरकारी वकील लगाया गया”
इतनी अंधेरगर्दी आखिरकार क्यों की गई। स्वाभाविक तौर पर दाल में काला ज़रुर है? अब रही उर्मिला की बात तो जब कोई इस तरह से भाजपा के विशिष्ट व्यक्ति को फंसाने की चेष्टा करेगा तो उसको पुलिस भला कैसे चैन से रहने देगी। इसलिए पहली संभावना ये हो सकती है कि वह पुलिस कस्टडी में हो। क्योंकि चार थानों में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है मोहतरमा के खिलाफ। दूसरी बात यह भी संभावित है कि वे किसी संभावित हमले से बचने सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गई हों।
उनका क्या हुआ है अभी अज्ञात है किंतु पुलिस मुस्तैदी से उर्मिला की तलाश में जुटी है।सच जो भी हो,जल्द सामने आना चाहिए।
यदि उर्मिला भयभीत हैं तो उन्हें समीपवर्ती किसी अदालत में समर्पण कर उन पुख्ता प्रमाणों को वकील के मौजूदगी में मामला संज्ञान में लाना चाहिए। उर्मिला का रुदन और उनकी सुनी गई अंतिम बात मायनेखेज है।
यह सच भी हो सकता है क्योंकि वर्तमान सरकार अपने अपराधियों को बचाने में माहिर है।कहा जाता है इसी वजह से भाजपा में अपराध बढ़ रहे हैं।याद आती है उन्नाव पीड़िता की मददगार बनी दिल्ली की रहने वाली योगिता भयाना अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की कार्यकर्ता हैं। वह पीपल अगेंस्ट रेप इन इंडिया की प्रमुख हैं। यह संगठन रेप पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद करता है। वकील महमूद प्राचा थे वादी को बचाने के लिए इन्होंने कितने पापड़ बेले हैं और अब तक संघर्ष रत है। उन्हें इस मामले में भी पहल करना चाहिए। क्योंकि दहशत के साए में आजकल कानून के रखवाले भी ऐसे मामलों से परहेज़ करते हैं।
निश्चित तौर यह मामला अत्यंत गंभीर है यदि मान लिया जाए कि इसमें भाजपा के किसी बड़े नेता की भूमिका नहीं है तो उर्मिला को मौत की इतनी दहशत क्यों है।ज़रुर उसे धमकियां मिली होंगी।
इस बीच खबरें यह भी आ रही हैं कि भाजपा की उत्तराखंड सरकार में से कई नेता अंकिता भंडारी मामले से रुष्ट हैं और उनके त्यागपत्र का सिलसिला शीध्र प्रारंभ हो सकता है। देखना यह होगा कि उर्मिला कैसे इस प्रकरण को मज़बूत आधार दे पाती है।





