शहर की नदियों के शुद्धिकरण के लिए चार एसटीपी बनाएंगे
इंदौर। खान नाले को कान्ह नदी में परिवर्तित करने और नाले की सफाई के लिए करोड़ों रुपए हड़पने के बाद अब इंदौर नगर निगम ने इस नदी के शुद्धिकरण और चार एसटीपी बनाने के लिए केंद्र सरकार से 300 करोड़ रुपए की राशि की मांग की है।
निगम की जलकार्य समिति के प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू ने बताया कि इंदौर नगर निगम द्वारा अभी कान्ह और सरस्वती नदी के पानी को शुद्ध करने के लिए 10 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन किया जा रहा है। यह सभी प्लांट उनकी क्षमता से ज्यादा कैपेसिटी से चलाए जा रहे हैं। इन प्लांट के माध्यम से सीवरेज के पानी के ट्रीटमेंट के काम को अंजाम दिया जा रहा है। इसके बावजूद इन दोनों नदी में सीवरेज का पानी पहुंच रहा है। अब नगर निगम की ओर से ओम नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत मंजूर किए गए तीन नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण शुरू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके बावजूद इंदौर में शत प्रतिशत ड्रेनेज के पानी को शुद्ध करने का काम नहीं हो पाएगा। अभी शहर में चार स्थान पर और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने की आवश्यकता है। यह प्लांट माणिकबाग रोड, सिलिकॉन सिटी, पालदा और इंडस्ट्री हाउस के पास वाले क्षेत्र में बनाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए इंदौर नगर निगम द्वारा एक प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। इस प्रस्ताव में इन सभी स्थानों पर प्लांट की स्थापना करने के लिए केंद्र सरकार से 300 करोड़ रुपए की राशि मंजूर करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने बताया कि अमृत योजना 2.0 के तहत भी अब शहर में काम शुरू होने जा रहा है। इस योजना के तहत शहर के बहुत सारे क्षेत्र में ड्रेनेज की लाइन डालने का काम किया जाएगा। जब यह लाइन डल जाएगी तो फिर इस पानी के ट्रीटमेंट का कार्य भी आवश्यक हो जाएगा। इस स्थिति के चलते ही चार स्थानों पर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना को तैयार किया गया है।
2 वर्ष के लिए बनेगी डीपीआर
उन्होंने बताया कि इंदौर की दोनों नदियों को शुद्ध करने के लिए जो काम किया जाना आवश्यक है उन कामों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। ऐसे कामों के लिए अलग से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का फैसला लिया गया है। अगले 2 साल में इन दोनों नदियों पर जो काम करना प्रस्तावित है उसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर तैयार की जा रही है। जब यह रिपोर्ट बन जाएगी तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-कौन से काम करना बाकी हैं और उन कामों पर कितनी राशि खर्च होगी।





