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सिवनी मॉब लिंचिंग : पसमांदा और दलितों के बाद अब निशाने पर आदिवासी

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बीते 2 मई, 2022 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में दो आदिवासियों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस घटना के पीछे आरएसएस के संगठनों बजरंग दल और श्रीराम सेना के सदस्यों का हाथ बताया जा रहा है। इस संबंध में जानकारी दे रहे हैं मनीष भट्ट मनु

मध्यप्रदेश में मॉब लिंचिंग, सिवनी में 2 आदिवासियों की पीट-पीटकर हत्या - mob  lynching in mp, Two tribals were beaten to death on suspicion of cow  slaughter | Webdunia Hindi | India Known

मध्य प्रदेश सहित पांच राज्यों में आगामी वर्ष प्रस्तावित विधान सभा चुनावों में आदिवासी वोट बैंक पर नजर जमाने वाली भाजपा को प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बहुल कुरई विकासखंड में इसके मूल संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के बजरंग दल और श्रीराम सेना के सदस्यों द्वारा दो आदिवासी युवकों की हत्या से झटका लग सकता है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय से भाजपा आदिवासी वोट बैंक पर अपनी नजरें जमाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य को केन्द्र में रखते हुए आरएसएस भाजपा की मदद से हिंदी भाषी पट्टी में आदिवासियों को प्रभावित करने के लिए कई योजनाएं बनाए हुए है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक वर्ष में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह मध्य प्रदेश के दौरे कर चुके हैं। जहां सितंबर 2021 में शाह ने जबलपुर में शहीद शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस में षिरकत की थी, वहीं नवंबर में नरेन्द्र मोदी राजधानी भोपाल में बिरसा मुंडा के जनम दिवस पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस में शामिल हुए थे। इसके अतिरिक्त पिछले माह 22 तारीख को अपने भोपाल दौरे में अमित शाह ने न केवल तेंदु पत्ता संग्राहकों के सम्मेलन को संबोधित किया था वरन उनकी उपस्थिति में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने का ऐलान भी किया था। मगर, सिवनी हत्याकांड के बाद जिस तरह आदिवासी समाज में तेजी से गोलबंदी हो रही है, उसके बाद भाजपा के लिए इस वर्ग को साधना एक बड़ी चुनौती हो सकता है।

बताते चलें कि आदिवासी विकास खंड कुरई के सिमरिया गांव निवासी धानसाय इनवाती व सागर गांव निवासी संपत बट्टी के साथ गत 3 मई, 2022 को सुबह होने के पूर्व करीब तीन बजे गौकशी के आरोप में करीब 15-20 लोगों ने लाठी-डंडों से बुरी तरह मारपीट की थी, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना में दो अन्य गंभीर रूप से जख्मी हैं, जिनका इलाज स्थानीय अस्पताल में किया जा रहा है। घटना के दूसरे दिन दोपहर 12 बजे से शाम 6 जे बजे तक कांग्रेस के नेताओं-कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने नागपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर कुरई थाना के सामने जाम लगा दिया था। देर शाम दोनों मृतकों के शव स्वजनों को सौंप दिए गए थे, जिसके बाद रात में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को सत्तारुढ़ भाजपा सरकार के आदिवासी एवं अनुसूचित जाति विरोधी चेहरे का एक और उदाहरण करार दिया है। उसने इस बारे में राज्यपाल को पत्र लिख दक्षिणपंथी संगठनों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग की है। साथ ही पार्टी ने घटना की जांच के लिए अपने तीन विधायकों – ओंकार सिंह मरकाम, अशोक मर्सकोले और नारायण पट्टा – की एक जांच कमेटी गठित की है, जो सिवनी पहुंचकर पूरे मामले की जांच करेगी। 

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान सरकार को घेरते हुए ट्वीट किया कि “सिवनी जिले के आदिवासी ब्लॉक कुरई में दो आदिवासी युवकों की निर्मम हत्या किये जाने की बेहद दुखद जानकारी मिली है।‌ इस घटना में एक आदिवासी युवक गंभीर रूप से घायल है। प्रदेश में आदिवासी वर्ग के साथ दमन व उत्पीड़न की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। हमने इसके पूर्व नेमावर, खरगोन व खंडवा की घटनाएं भी देखी हैं। आरोपियों के भाजपा से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आयी थी। इस घटना में भी आरोपियों के भाजपा से जुड़े कनेक्शन की बात सामने आ रही है।”

दरअसल मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोटरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की आबादी में करीब 21.5 प्रतिशत आदिवासी हैं। राज्य में विधानसभा की कुल 230 सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। वहीं लगभग 100 अन्य सीटों पर भी यह वर्ग तमाम समीकरण बदलने की ताकत रखता है। ऐसे में कोई भी इस वर्ग को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकता। यही कारण है कि जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन बेहद सतर्कता के साथ कदम उठा रहा है, वहीं इस मामले में गोंडवाना महासभा सहित गोंडवाना से जुड़े विभिन्न राजनैतिक दलों के अतिरिक्त जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस), भीम आर्मी के साथ ही दीगर दलों का भी प्रवेश हो गया है। 

सथानीय आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक घटना के बाद से क्षेत्र में काफी आक्रोश व्याप्त है। हालांकि आरोपितों के गिरफ्तारी, मृतक के स्वजनों को आर्थिक सहायता देने के साथ ही शासकीय नौकरी देना और आरोपितों के अवैध मकान तोड़ने की मांगे प्रशासन द्वारा मान लेने से गांव वालों में अब उतना आक्रोश नहीं होने की बात जिला प्रशासन कह रहा है। मगर, हालात संवेदनशील बने हुए हैं और राजनीति के धरातल पर यह मुद्दा इतने जल्दी थमने वाला नहीं दीख रहा है।

Ramswaroop Mantri

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