6 सदस्यों ने सहकारिता विभाग के नोटिस का दिया जवाब,
इंदौर। सहकारिता विभाग ने अयोध्यापुरी और महालक्ष्मी नगर में गड़बड़ियों को लेकर देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहाकारी संस्था के पूरे संचालक मंडल को नोटिस जारी किया था। 11 जून 2025 को जारी इस नोटिस में विभाग ने 15 दिन में संचालक मंडल से जवाब मांगा था। 26 जून को यह अवधि पूरी हो रही थी। संचालक मंडल के 6 सदस्यों ने विभाग को अपना जवाब सौंप दिया है, जिसमें आर्थिक गड़बड़ियों के लिए अध्यक्ष विमल अजमेरा और उपाध्यक्ष मनोज काला को जिम्मेदार बताया गया है।
यह नोटिस उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं एमएल गजभिये ने 11 जून 2025 को जारी किया था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि संस्था के सदस्यों ने अधिनियम, नियम, संस्था की उपविधि, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं के आदेशों का पालन नहीं किया। हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर ने अयोध्यापुरी और महालक्ष्मी नगर के सदस्यों की पात्रता की जांच के लिए दल का गठन किया था। इसकी कार्रवाई की जानकारी भेजने के बाद भी संस्था लगातार इसकी अनदेखी कर रही है। जांच कमेटी द्वारा तैयार पात्रता सूची भी संस्था को भेजी गई थी, लेकिन संस्था ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
नोटिस में आर्थिक घपले के लगे थे आरोप
सहकारिता विभाग के नोटिस में योजना क्रमांक 171 का भी जिक्र किया गया है, जिसमें देवी अहिल्या संस्था ने रजत गृह निर्माण तथा डायमंड इन्फ्रा का पैसा गलत तरीके से आईडीए में जमा करा दिया था। नोटिस में कहा गया था कि जांच दल द्वारा प्रतिवेदन में लिखा है कि देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा, संस्था उपाध्यक्ष मनोज काला ने रजत गृह एवं डायमण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर का 664561.00 रुपए का भुगतान संस्था के बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अकाउंट से कर दिया था। इस तरह से संस्था को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है।
6 सदस्यों ने लिखा-उनका कोई लेनादेना नहीं
सहकारिता विभाग के नोटिस का जवाब देते हुए 26 जून को देवी अहिल्या संस्था के छह सदस्यों ने कहा है कि रजत गृह निर्माण तथा डायमंड इन्फ्रा का पैसा आईडीए में जमा कराने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। सभी सदस्यों ने कहा कि वे संस्था की किसी ऐसे बैठक में शामिल ही नहीं हुए, जिसमें राशि जमा कराने का फैसला लिया गया। सदस्यों ने कहा कि इस आर्थिक अनियमितता की पूरी जिम्मेदारी अध्यक्ष विमल अजमेरा और उपाध्यक्ष मनोज काला की है।
देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष अजमेरा ने किया इस्तीफे का ड्रामा

प्रशासन के दबाव के बाद देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा ने गुरुवार को संचालक मंडल की बैठक बुलाकर इस्तीफे का ड्रामा किया। संचालक मंडल के 9 में से 6 सदस्यों के उपस्थित होने के बाद भी यह कहकर कि सारे लोग नहीं आए हैं, इस्तीफा नहीं दिया। शुक्रवार को अजमेरा ने सुबह 10 बजे फिर से संचालक मंडल की बैठक बुलाई है।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि जब आप इस्तीफा देने चाहते हो तो आज ही दे दो, लेकिन अजमेरा ने कहा कि कल दूंगा। इसका कारण अजमेरा के खासमखास उपाध्यक्ष मनोज काला और दो अन्य सदस्यों का उपस्थित नहीं होना है। सदस्यों से अजमेरा ने कहा कि मैं इस्तीफा देने के बाद भी संचालक बना रहूंगा। सदस्यों ने कहा कि जब आप बीमारी के कारण इस्तीफा दे रहे हो तो आराम करो, लेकिन अजमेरा नहीं माने।
डमी बिठाना चाहते हैं अजमेरा
सदस्यों ने बैठक में यह भी कहा कि कभी भी मीटिंग बुलाई जाएगी तो सारे सदस्य नहीं आएंगे। आज जब छह सदस्य हैं, तो आज ही इस्तीफा देकर सारे डाक्यूमेंट हमें सौंप दो, लेकिन अजमेरा इसके लिए तैयार नहीं हुए। अजमेरा ने कहा कि कल सुबह फिर से मीटिंग होगी और उसी में तय करेंगे कि अध्यक्ष कौन होगा? दरअसल इतनी गड़बड़ियों और आरोपों के बावजूद भी अजमेरा का संस्था से मोहभंग नहीं हो रहा है। उनकी कोशिश है कि अपनी जगह किसी डमी को बिठाकर फिर संस्था में मनमाने खेल करते रहें।
लंबे समय से फाइनल नहीं कर रहे सूची
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी ने अयोध्यापुरी और महालक्ष्मीनगर के पात्र प्लॉटधारकों की सूची तैयार कर संस्था को भेज दी थी।समें अयोध्यापुरी के 400 सदस्यों के नाम विभाग ने भेजे थे, जिसे विमल अजमेरा और उनके संचालक मंडल को वेरिफाई कर भेजना थे।अब परेशानी यह है कि अजमेरा ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर 516 सदस्यों की सूची बना ली थी।
कलेक्टर की डांट के बाद डरे अजमेरा
उल्लेखनीय है कि लेक्टर आशीष सिंह ने रविवार को हुई बैठक में देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा को अंतिम चेतावनी दी थी। कलेक्टर ने कहा था कि हमने जो आपकी लिस्ट भेजी है उसके आधार पर लिस्ट बनाने को कहा है। 15 दिन में दे रहे हो कि कौन पात्र है। अगर नहीं देते तब मैं समझ लूंगा कि आप लोग नहीं करना चाहते। तब मैं एफआईआर तक की कार्रवाई करूंगा। कलेक्टर की चेतावनी से अजमेरा डर गए हैं और अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहते हैं, लेकिन साथ में उनकी कोशिश यह भी है कि संस्था पर उनका कब्जा बना रहे।





