-निर्मल कुमार शर्मा,
बीजेपी शासित राज्यों और केन्द्र सरकार की किसानों के प्रति की जा रही अकथनीय बर्बरता के लिए इस देश की आवाम इन फॉसिस्टों को कभी भी माफ नहीं करेगी,ये सत्ता के क्रूर दैत्य,पूँजीपतियों के हितरक्षक,इस देश के अन्नदाताओं,किसानों पर ऐसे बर्बर हमला कर रहे हैं,जैसे लग रहा है,ये हमारे अन्नदाता इस देश के न होकर वे पाकिस्तानी आतंकवादी हों ! हरियाणा का मुख्यमंत्री क्रूर,अधम,हिंसकपशु ,नरपिशाच खट्टर और दिल्ली का अमानवीय,असहिष्णु, निर्ममता की प्रतिमूर्ति,आधुनिक हिटलर का अवतार,एडोल्फ मोदीरूपी दानव, अपनी पूरी क्रूरता,वीभत्सता और जनदमन पर उतर आया है,अब भारत में लोकतंत्र कहीं भी नहीं बचा है ! इसका एक ही इलाज है कि इन नरपशुओं, नरपिशाचों और मानवहंताओ़ं को जबरन सत्ता से जितनी जल्दी हो सत्ता से उखाड़ फेंका जाय,उतना ही इस देश की आवाम,यहाँ के गरीबों,मजलूमों,मजदूरों और किसानों के हित में है,इसलिए पूरे देश के सभी लोगों से हाथ जोड़कर विनती है कि वे अब अपने घरों से निकलें और उन अन्नदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दें,जो इतनी ठंड में और बारिश में भी इस फॉसिस्ट और हिटलरशाही मोदीसरकार से मोर्चा लिए हुए हैं,आपको बता दें कि अखिल भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष श्री राकेश टिकैत के अनुसार पिछले 1 साल से अब तक इस भयंकरतम् ठंड,भीषण गर्मी और लू और लगातार हो रही बारिश में हमारे 700 से भी ज्यादे अन्नदाताओं की मौत हो चुकी है,वे इस देश की खातिर शहीद हो चुके हैं ! याद रखिए आज इस देश के अन्नदाता केवल अपने स्वार्थ के लिए केवल न्यूनतम् समर्थन मूल्य मतलब एमएसपी को कानून बनाने और इन तीनों कृषि बिलों को वापस करने के लिए नहीं अड़े हुए हैं,उनके इस आंदोलन से इस पूरे देश की आवाम,इस देश की अरबों जनता,इस देश की सबसे बड़ी संख्या में बसनेवाली मध्यवर्गीय जनता का हित और स्वार्थ भी जुड़ा हुआ है,मोदी केवल और केवल अपने दो-चार अडानी-अंबानी जैसे कार्पोरेट मित्रों के हित के लिए काम कर रहा है,अगर इस आवाम के हित के लिए जंग लड़ रहे अन्नदाता इस जंग में हार जाते हैं,तो उस स्थिति की कल्पना से ही रोम-रोम सिहर उठता है,सोशल मिडिया पर इन बड़े कार्पोरेट्स की नीयत अभी से दर्शित हो रहीं हैं,उनकी बदनीयती अभी से सार्वजनिकतौर पर आने लगीं हैं,जिनमें लोगों ने सप्रमाण दिखाया है उदाहरणार्थ कि इस देश के अन्नदाताओं द्वारा उगाई गई फूलगोभी जो मात्र दो रूपये में खरीद कर उसे बढ़िया से पैककर उसपर अपनी कंपनी का नाम वगैरह लिखकर,उस पर उसका अधिकतम खुदरा मूल्य मतलब एमआरपी 600 रूपये कीमत दर्शित है ! मतलब तीस हजार गुना फायदा !
सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आज जो मोदी के चमचे,चाटुकार,पत्तलचाट कथित पत्रकार / सम्पादक के नाम पर दब्बू और चाटुकार सम्पादक आदि जो मोदी की प्रसंशा में कसीदे काढ़ते हुए बड़े-बड़े सम्पादकीय लेख लिख रहे हैं वे सब भी जब मोदी अपने दो-चार अंबानियों और अडानियों को इस देश का सब कुछ गिरवी रख देगा,तब उपर्युक्त उदाहरण के रूप में दर्शित एक फूलगोभी 600 रूपये में,गेहूँ का आटा 100 रूपये किलो,चावल 160 रूपये किलो,सरसों का तेल 600 रूपये लीटर आदि-आदि खरीदने को बाध्य होंगे तब उनका भी मोदी अंधभक्ति का नशा तुरंत काफूर हो जाएगा,यक्षप्रश्न है कि उक्तवर्णित गोदी मिडिया के चमचे,पत्रकार, एंकर,लेखक, साहित्यकार,सम्पादक आदि भी तो उसी बाजार से सभी घरेलू सामान खरीदेंगे,जिसको मोदी के सबसे प्रगाढ़ लंगोटिया यार अंबानी,अडानी आदि अपनी शर्तों पर चलाएंगे,ये तो होगा नहीं कि आम भारतीय लोगों,मजदूरों,किसानों और मध्यवर्गीय नौकरीपेशे आदि लोगों के लिए बाजार अलग होगा और उक्त वर्णित मोदी की दुर्नीतियों के पक्के समर्थक चमचों,अंधभक्तों,लेखकों, सम्पादकों का कम मूल्यवाला अलग से बनाई गई,कम रेटवाली दुकानों वाला अलग से बाजार होगा !
आज के वर्तमान समय के नीरो और हिटलर के इस नये अवतार फॉसिस्ट,क्रूर और निरंकुश मोदी और जर्मनी के ऐतिहासिक नरपिशाच और मानवता के हत्यारे एडोल्फ हिटलर में बहुत सी साम्यताएं हैं,मसलन दोनों एक ऐसी मानसिक बिमारी से ग्रसित हैं,जिनमें किसी मानव या मानव समूह की हत्या करने,उन्हें पीड़ा देने,कष्ट देने,उन्हें प्रताड़ित करने आदि में इस रोग के पीड़ित रोगी आनन्द का अनुभव करते हैं,एडोल्फ हिटलर ने 15 लाख बच्चों सहित 60 लाख यहूदियों को गैस चैम्बरों में दम घोंट कर मारा था,द्वितीय विश्वयुद्ध में उसकी वजह से करोड़ों लोग मौत के घाट उतार दिए गए,उनकी संख्या छोड़ दीजिए,इधर भारत में एडोल्फ मोदी भी उसी एडोल्फ हिटलर के नक्शेकदम पर तेजी से बढ़ता जा रहा है,मसलन गुजरात दंगों,अचानक लागू किए गये जीएसटी,नोटबंदी,लॉकडाउन, प्रतिवर्ष कांग्रेसी शासनकाल से डेढ़ गुने संख्या में हजारों की संख्या में खुदकुशी को बाध्य किए जाते इस देश के अन्नदाता,हजारों की संख्या में संख्या में खुदकुशी करते बेरोजगारी से त्रस्त नवयुवक,पुलवामा काँड में कराए बिस्फोट से मरे सीआरपीएफ के जवानों,दिल्ली दंगे इसके अतिरिक्त इससे थोड़े छोटे नरपिशाच यथा मध्यप्रदेश का नरपिशाच मुख्यमंत्री ने पिछले सालों में अपनी फसलों के न्यायोचित्त मूल्य की माँग करनेवाले अन्नदाताओं पर सीधे गोली मारने का आदेश देकर 6 अन्नदाताओं की सीधे गोली मारकर निर्मम हत्या करा दिया था,उससे थोड़ा सा बड़ा नरपिशाच उत्तर प्रदेश की राजधानी में बैठा है,जो नागरिकता संशोधन ऐक्ट का विरोध कर रहे लोगों पर गोली चलाकर दर्जनों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था,वैसे इस एक मंदिर के कथित पुजारी की जुल्म की कहानी मध्यप्रदेश वाले नरपिशाच से बहुत लम्बी है। हिटलर भी मारे गये यहूदी लोगों के मृत शरीर से निकाले गये चर्बी से बने साबुन का प्रयोग करता था और इधर मोदी अचानक किए गए लॉकडाउन में जब यहाँ के गरीब मजदूर मय बीबी-बच्चों के हजारों किलोमीटर दूर अपने गाँव पैर घिसटते-मरते-खपते जा रहे थे,तब उनके लिए बस,ट्रेन की सुविधा न उपलब्ध कराके आपदा में अवसर तलाशने का कुकृत्य भरा उपदेश दे रहा था ! अब फिलहाल वर्तमान समय में लगातार भयंकरतम् ठंड,बारिश,आंसू गैस के गोलों से प्रताड़ित दिल्ली के चारों तरफ रोक दिए इस देश के लाखों किसानों और अन्नदाताओं की खुदकुशी,फाँसी, अपनी कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या करने की लगातार आ रही खबरों के अनुसार शहीद होनेवाले अन्नदाताओं की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ती जा रही है ! मोदी की वजह से अभी तक मरनेवाले लोगों की अगर ईमानदारी से गिनती किया जाय तो इस नराधम मोदी की वजह से अब तक लगभग लाखों लोग असमय मौत के मुँह में जा चुके हैं ! हिटलर भी मोदी की तरह छद्मराष्ट्रवाद,अपनी जातीय श्रेष्ठता का प्रबल समर्थक था,जैसे मोदी अक्सर कहता है कि गर्व से कहो हम हिन्दू हैं,मोदी की तरह वह भी बहुत लच्छेदार भाषा में भाषण देकर अपने तत्कालीन समय में शिक्षित जर्मनों को भी प्रभावित कर लिया था,उन जर्मनों को जब होश आया,तब तक जर्मनी जैसे विकसित और उन्नतिशील राष्ट्र की ईंट से ईंट बज चुका था,वहाँ सब कुछ बर्बाद हो चुका था,वहाँ के शहरों यथि बर्लिन,हैम्बर्ग,फ्रैकफर्ट आदि दर्जनों शहर मलवे के ढेर में बदल चुके थे ! हिटलर भी मोदी की तरह पहली बार जब जर्मन संसद में गया तो मोदी की तरह वह भी दरवाजे पर झुककर नतमस्तक हुआ था,हिटलर भी मोदी की तरह जर्मन पूँजीपतियों से अत्यधिक लगाव रखता था,वह भी तमाम जर्मन कामगार यूनियनों, छात्रसंघों को मोदी की तरह पूरी तरह दमन किया, वह ठीक मोदी जैसे अपने हर विरोधी विचारधारा के प्रोफेसरों,डॉक्टरों,बुद्धिजीवियों,मानवाधिकार के समर्थकों को जेलों में ठूँस दिया या गैस चैंबरों में दम घोंटकर मार दिया या फाँसी पर लटका दिया,जैसे भारत में मोदी आजकल कर रहा है !
लेकिन एडोल्फ हिटलर नामक नरपिशाच का पतन भी बड़े नाटकीय ढंग से और बहुत वीभत्सतम् तरीके से हुआ,द्वितीय विश्वयुद्ध में वह और उसकी सेना तत्कालीन अनन्त और बेहद विस्तृत आकार वाले देश सोवियत संघ में जाकर बुरी तरह फँस गई और उसकी पतन की शुरूआत भी वहीं से हो गई, ठीक उसी प्रकार भारत का यह निरंकुश,व्यभिचारी,अमानवीय,निष्ठुर,वहशी आधुनिक एडोल्फ मोदी भी इस देश के सबसे बड़े,सबसे ताकतवर और सबसे कर्मठ अन्नदाताओं से भिड़ गया है,इसका मानसिक संतुलन भी गड़बड़ हो गया है,वस्तुतः यह निरंकुश व्यक्ति अपना पिछला साढ़े 7 साल का कार्यकाल हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्यता,भारत-पाकिस्तान,छद्मराष्ट्रवाद,मॉबलिंचिग,शौचालय निर्माण,बुलेट ट्रेन,स्मार्ट सिटी,पटेल की गगनचुंबी मूर्ति बनवाने,चारधाम सड़क चौड़ीकरण योजना आदि सैकड़ों व्यर्थ के कामों में लगाकर,इस देश की मूलभूत समस्याओं मसलन,भूखमरी,गरीबी, अशिक्षा,बेरोजगारी,कृषि और किसानों की अत्यंत बदहाल गंभीर समस्याओं से बड़ी धूर्तता और कुछ चमचे दृश्य व प्रिंट मिडिया के सहयोग से अपना समय बिता दिया,लेकिन अब अन्नदाताओं से पंगा लेकर यह भयंकरतम् भूल कर दिया है, मेरे विचार से बहुत जल्दी इस आधुनिक एडोल्फ मोदी जैसे क्रूर,अमानवीय,फॉसिस्ट, निरंकुश, तानाशाही प्रवृत्ति के नरपिशाच का अंत सुनिश्चित है !
-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,





