मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मंडीदीप से लेकर सीहोर तक बनाई जा रही वेस्टर्न एक्सप्रेस -वे परियोजना पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मुख्यमंत्री सचिवालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा के साथ मिलकर सकारात्मक रवैया अपनाते हुए यह फैसला कर दिया है कि, जिन भू माफियाओं को उपरोक्त वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे में अरबपति बनने के रास्ते ढूंढ़े गए थे अब उसी एक्सप्रेस-वे की दिशा ही बदल दी गई है।
उपरोक्त फैसले के पीछे की रणनीति को आकार देने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग नीरज मंडलोई तथा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव ने अहम भूमिका निभाई है ऐसा दावा करने में राष्ट्रीय हिन्दी मेल को कोई संकोच नहीं है। बता दें कि, पिछले 2 वर्ष से विवादों में लटका हुआ 3500 करोड़ का वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे पर्यावरण एवं वन संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन की वजह से क्रियान्वित नहीं हो पा रहा था। इसके पीछे यह बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को या तो अंधेरे में रखा या फिर उन्हें भी भूमाफियाओं के संरक्षण में शामिल करते हुए वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे के जिस एलायमेंट से करोड़ों-अरबों की जमीन भू अर्जित करके रातों-रात अपने चहेतों को अरबपति बनाने की योजना बनाई थी उसे भ्रष्टाचार की श्रेणी में मानते हुए मुख्य सचिव ने यह कड़वा फैसला लिया है जिससे भू माफियाओं में हड़कंप भी मच गया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने उपरोक्त प्रोजेक्ट को कैंसिल करने की बजाय उसे पारदर्शी मानदंडों के आधार पर क्रियान्वित करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई तथा मप्र सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इस प्रोजेक्ट को लाने के लिए नए एलायमेंट के अनुसार इसका प्रारूप बदलते हुए अब इसे मंडीदीप के पहले जबलपुर-भोपाल नेशनल हाइवे के साथ जोड़ते हुए रतनपुर सड़क से प्रारंभ किया जाएगा। बता दें कि अब वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे रतनपुर सड़क से प्रारंभ होकर कोलार, रातीबड़, फंदाकला, भोपाल- देवास मार्ग पर लगभग 35.30 किमी में पूरी की जाएगी, जबकि इसके पहले इसकी लंबाई 42 किमी के आसपास थी। यह लिखना भी गलत नहीं होगा कि मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अपने अनुभवों को वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट में कन्विक्शन के साथ उतारते हुए जिस तरह क्रियान्वित करने का फैसला लिया है वह अद्भुत है, अब इस परियोजना में निजी भूमि का अर्जन भी कम है, शासकीय भूमि भी शामिल है और वन भूमि भी शामिल है, तथा बड़े तालाब से परियोजना की दूरी 3.42 किमी होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ शिव बावड़ी भी छूट गया है और कैचमेंट एरिया भी अलग हो गया है, वरना वन एवं पर्यावरण की आपत्ति की वजह से मप्र सरकार की बदनामी भी हुई थी और वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे विवादों में भी घिर गया था।
लेकिन मुख्य सचिव ने अपने सकारात्मक रवैये से उन भू माफियाओं का सारा खेल बिगाड़ते हुए हड़कंप मचा दिया है, जिन लोगों ने किसानों की जमीनों को कोडिय़ों में खरीदकर अरबपति बनने की रणनीति बनाई थी, अब ऐसा नहीं होगा। 35.30 किमी सड़क 2981 करोड़ में बनाई जाएगी, 240 हैक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी, 45 हैक्टेयर एवं 6 किमी तक वन भूमि तथा 22.3 हैक्टेयर शासकीय भूमि इस परियोजना में सम्मिलित होगी। प्रभावित $कृषकों की संख्या 1103 होगी जबकि प्रभावित गांव 29 होंगे और इसमें आने वाले भवन 42 ही प्रभावित होंगे।
इस कड़वी खबर का लब्बोलुआब यह है कि, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा बनाई जाने वाली नए प्रारूप में वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे परियोजना से राजधानी भोपाल को नया ग्रीन कॉरीडोर मिलेगा। परियोजना को जिस ठेकेदार पीएनसीएल को अवार्ड किया गया था उनका काम चल पड़ेगा और सरकार को भी कोई नुकसान नहीं होगा। सबसे अहम बात यह है कि, पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रामसर साइट, कैचमेंट एरिया, शिव बावड़ी, बायो डायवर्सिटी तथा भोपाल के पर्यटन का स्वरूप तथा 267 पशु-पक्षियों की प्रजातियां, सबको एक साथ बचाकर भू-माफियाओं के मंसूबों पर उपरोक्त तीनों नौकरशाहों ने पानी फेर दिया है ऐसा माना जाए तो चौंकिएगा मत।
चौंकिएगा तब जब एक पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव जिनकी खून पसीने की गाढ़ी कमाई से इस परियोजना के पूर्व डीपीआर में डूबने वाली उनकी पुस्तैनी जमीन के बच जाने से वे मुख्य सचिव अनुराग जैन को बकायदा पत्र लिखकर ध्ंान्यवाद ज्ञापित करें, क्योंकि मनोज श्रीवास्तव ही जानते हैं कि, इकबाल सिंह बैंस द्वारा उन्हें प्रताडि़त करने के लिए जानबूझकर इस वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे को मंडीदीप के बाद उनकी जमीन के ऊपर से निकाला गया था।





