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बिहार में इस वक्त भाजपा विरोधी दल एकजुट होकर नई लकीर खींच  सकते हैं

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 -सुसंस्कृति परिहार 

यह सुनकर लोग आश्चर्य चकित होंगे कि राजद को बिहार  चुनाव में सबसे ज़्यादा  मत मिले हैं। यह हकीकत, चुनाव आयोग के आंकड़े ही बता रहे हैं कि ताज़ा बिहार चुनाव में सर्वाधिक वोट पाने वाली पार्टी राजद ही है जिसे जंगल राज वाली पार्टी कहकर बड़े साहिब ख़त्म होने वाली बात कह रहे हैं।

आईए देखते हैं महागठबंधन की एक पार्टी राजद की क्या स्थिति रही है वोटों में, लेकिन फिर भी सीटें बहुत कम हो गई हैं। निर्वाचन आयोग के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक राजद को सर्वाधिक1.15करोड़ से अधिक वोट हासिल हुए जबकि भाजपा को लगभग 1करोड़ वोट मिले। एनडीए के जदयू को तीसरा स्थान मिला उसे96.67लाख मत हासिल हुए।चौथे स्थान पर कांग्रेस रही उसे43.7लाख मत मिले । लेकिन एनडीए को टोटल मिले मतों की संख्या2.3करोड़ है,

जबकि महागठबंधन को कुल 1.88करोड़ वोट हासिल हुए हैं।इसका मतलब यह तो नहीं कि महागठबंधन समाप्त हो गया या सुपर उनके तरीके से कहें कि गर्दा उड़ गया।

भाजपा को राजद से 15 लाख वोट कम मिलते हैं लेकिन सीट मिलती है राजद से 64 ज़्यादा।ऐसा संभव हुआ चुनाव आयोग की बदौलत।इस गणित को समझना होगा।ये क्यों और कैसे होता है?
इसके अलावा कुल मतदाताओं की संख्या से तीन लाख वोट ज़्यादा डाले गए। ऐसा कैसे संभव हुआ।इसकी जानकारी चुनाव आयोग नहीं देगा। क्योंकि उससे तो अदालत भी सवाल जवाब नहीं कर सकती वह सर्वशक्तिमान है।उसके ऊपर कोई नहीं।

इससे पूर्व गत वर्षों में हुए चुनावों में भी वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया के सारे अनुमानों को फेल करते हुए भाजपा के पक्ष में परिणाम आए थे।लोग आश्चर्य चकित थे लेकिन विरोध कहीं दिखाई नहीं दिया। लेकिन बिहार में चुनाव परिणामों को लेकर आक्रोश है वह सड़कों पर उतर आई।जो स्पष्ट करती है कि ये परिणाम उसके बारे वोट के विपरीत है। उन्हें लूटा गया है।

अब ऐसे माहौल में जहां भाजपा बड़ी पार्टी तो है पर गठबंधन के दल जिसमें नीतेश बाबू का जेडीयू प्रमुख है और वे भली-भांति जान रहे हैं,कि भाजपा ने उन्हें ठिकाने लगाने का खेल रचा है।यदि नीतीश की जगह कोई संघी को

मुख्यमंत्री बनाने की भनक नीतीश कुमार को सुनाई देती है तो वे पलटीमार राजद और अन्य दलों से मिलकर भाजपा को सबक सिखा सकते हैं। इसमें दो मत नहीं।

वैसे भाजपा ने जिस तरह सरकारें गिराई हैं उसी अंदाज़ में चाचा भतीजे और अन्य इकट्ठे हों तो यह एक नया और देश हितैषी प्रयोग होगा तथा नीतीश बाबू का कद निश्चित तौर पर बढ़ेगा।देखना यह है कि नीतीश कुमार ये रिस्क लेने का कितना माद्दा रखते हैं।

ऐसे कयास बहुत पहले से लगाए जा रहे थे लेकिन भले ही मत पाने राजद नंबर वन हो पर कम सीट होने से नया गठबंधन बनाना होगा।भाजपा और संघ से नाखुश दल मिलकर यह काम कर सकते हैं कुछ इस तरह नीतीश कुमार मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और चिराग पासवान तथा केबिनेट मंत्री ओवैसी,कांग्रेस,माकपा माले।अन्य मंत्री अन्य दलों से।

ये निरी कल्पना नहीं।इससे राज्य के तमाम जीते दलों को प्रतिनिधित्व मिल सकता है तथा ऐसे समीकरण  से तानाशाह बनती भाजपा पर सभी जगह लगाम लगाई जा सकती है। क्योंकि ऐसे चुनाव आयोग के रहते भाजपा को कभी हटाया ही नहीं जा सकता है।यह प्रयोग बतौर है।हो सकता है आगामी चुनावों में ऐसी कूट रचना हो कि इतने मत किसी दल को मिल ही ना पाएं।तब तक कुछ तो कोशिश की जा सकती है।जिसके लिए बिहार में आंदोलन की तैयारी चल रही है।इससे पूर्व ही कुछ कर सकते हो तो करें।ताकि चुनाव आयोग की एक बार  हार रेखांकित हो जाए।

Ramswaroop Mantri

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