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जन संगठनों का आजादी अमृत महोत्सव जय स्तंभ में राष्ट्रीय ध्वजारोहण के साथ संपन्न

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रीवा। समाजवादी जन परिषद , नारी चेतना मंच एवं विंध्यांचल जन आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय जय स्तंभ में प्रातः काल 9:00 बजे सामूहिक रूप से राष्ट्रीय ध्वजारोहण करते हुए राष्ट्रगान के साथ आजादी अमृत महोत्सव मनाया गया । इस अवसर पर देश के आजादी के आंदोलन के मूल्यों और वर्तमान चुनौतियों को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद करते हुए कहा कि देश को आजादी के लिए बहुत लंबी लड़ाई लड़ी गई। सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के साथ करो या मरो का नारा आजादी के आंदोलन का मूल मंत्र बना और तब जाकर विदेशी दासता से मुक्ति मिली । देश का विकास आजादी के आंदोलन के मूल्यों के आधार पर होना चाहिए , तभी हर वर्ग के साथ न्याय हो सकेगा । आज देश के हर व्यक्ति के अंदर आजादी की भावनाओं का संचार बेहद जरूरी है । देश में सबको आजादी मिले इसमें खुद की आजादी भी निहित है । देशभक्ति अंतःकरण की बात है । धर्म और राजनीति की तरह देश भक्ति को भी पाखंडवाद से बचाना होगा । समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाना , आजादी के मूल्यों को सार्थक बनाएगा । देश की आजादी का सही मतलब तभी होगा जब आम लोगों के साथ न्याय हो सके और समाज समता – समृद्धि के साथ गतिशील हो ।

वक्ताओं ने कहा कि यह भारी विडंबना है कि आमतौर पर लोगों को स्वतंत्रता अमृत महोत्सव वर्ष में भी अपने जिलों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम नहीं मालूम हैं । देखने में आता है कि सरकारी कार्यक्रम महज जश्न की रस्म अदाएगी तक सिमट कर रह जाते हैं । प्रशासन के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों को चिन्हित कर उन्हें वंशज होने का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है । मध्य प्रदेश के रीवा में आजादी के आंदोलन के अमृत महोत्सव वर्ष में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शासन प्रशासन के द्वारा सरकारी भवनों एवं कॉलेज चौराहा , सिरमौर चौराहा आदि विभिन्न चौराहों को रंग बिरंगी रोशनी के जरिए सजाया गया है लेकिन वहीं भारी विडंबना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक चिन्ह ऐतिहासिक जयस्तंभ को एकदम नजरअंदाज कर दिया गया है । जय स्तंभ चौराहे में अंधेरा बना हुआ है । प्रदेश में भाजपा की सरकार है और रीवा शहर में कांग्रेस का महापौर लेकिन इनमें से किसी के द्वारा भी स्वतंत्रता आंदोलन की यादगार में बने जय स्तंभ की सजावट कराना तो दूर , वहां की सामान्य साफ-सफाई भी नहीं कराई गई है । जय स्तंभ को बचाने के लिए 75 दिन तक चले दीप प्रज्वलन आंदोलन का यह असर जरूर है कि उसे हटाने का षड्यंत्र पूरा नहीं हो सका पर नगरीय शासन बदलने के बावजूद उसकी उपेक्षा बरकरार है । आज भी जय स्तंभ के आसपास काफी गंदगी देखी जा सकती है । जय स्तंभ की हालत अत्यंत जीर्ण शीर्ण है । यह बात अत्यंत आपत्तिजनक और आक्रोश का विषय है ।

आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम में प्रमुख रूप से समाजवादी जन परिषद के नेता लोकतंत्र सेनानी अजय खरे , सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री जल संसाधन विभाग एच एल त्रिपाठी , भूप नारायण सिंह तिवारी , सेवानिवृत्त संभागीय खेल अधिकारी वीरेंद्र सिंह परिहार , सेवानिवृत्त इंजीनियर आकाशवाणी सतीश दुबे , लोकतंत्र सेनानी रामायण पटेल , डॉ के के द्विवेदी , नारी चेतना मंच की पूर्व अध्यक्ष नजमुननिशा , माया सोनी , समाजसेवी रामाधार पटेल , बृजवासी प्रसाद तिवारी ,अशोक सोनी , डॉक्टर शैलेंद्र कुमार सोनी , संतोष पटेल , अंबिकेश नामदेव , अमित चंदौल , मनीष पटेल के अलावा नारी चेतना मंच की लक्ष्मी कोल , गिरिजा कोल ,संतोष नामदेव , खुशी मिश्रा , अनीता पटेल , पल्लवी पटेल , प्रतिमा कोल , विमला कोल , राम बाई कोल , नीतू कोल , तीर्थवती कोल , संगीता कोल , उर्मिला कोल , पुष्पा कोल , कंचन कोल , प्रिया कोल , दुर्गेश कोल आदि की कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी रही।

Ramswaroop Mantri

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