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*कैद भी नहीं बदल पाई आजम खान का अंदाज, BSP में जाने पर यह बोले*

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान 23 महीने की लंबी कैद के बाद सीतापुर जेल से रिहा हो गए हैं। हालांकि जेल से बाहर आने के बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। आजम खान की रिहाई के बाद भी उनके खिलाफ कई मामले अभी भी विचाराधीन हैं, जिससे उनकी मुश्किलें बनी हुई हैं

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को 23 सितंबर 2025 को लगभग 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहाई मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट से सभी 72 मामलों में जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। मंगलवार को जब वह जेल से बाहर आए तो उनके तेवर वही पुराने थे। वही शेरो शायरी, वही हाज‍िर जवाबी।

हालांकि, जेल से बाहर आने के बावजूद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और शत्रु संपत्ति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की जांच उनके लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। ऐसे में लगता है कि उनके यही तेवर उन्‍हें इन कानूनी लड़ाइयों का मुकाबला करने का हौसला देंगे।

आजम खान जेल से जब बाहर निकले तो ऐसा लगा नहीं कि वह पिछले दो साल से दुनिया से कटे हुए थे। उनकी सेहत उनके उम्र के हिसाब से दुरुस्‍त लग रही थी। सफेद कुर्ता, काली जैकेट और आंखों पर काला चश्‍मा पहने वह कार में बैठे दिखाई दिए। जब उनसे उनका हालचाल पूछा गया तो उन्‍होंने शेर अर्ज किया… पत्‍ता पत्‍ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है।

जब उनसे बसपा जॉइन करने की अटकलों पर सवाल किया गया तो वह बोले, जो अटकलें लगा रहे हैं वहीं जानें। मैं तो पिछले दो साल से जेल में था। वहां किसी को फोन करने की भी इजाजत नहीं थी। जब पूछा गया कि क्‍या योगी सरकार उनसे बदला ले रही है। इस पर उन्‍होंने तंज कसते हुए कहा, बदला वहां होता है जहां किसी के साथ बुरा किया हो। मैंने तो सबके साथ अच्‍छा सलूक किया।

लेकिन हकीकत यह है कि उनकी मुश्किलों का दौर अभी थमा नहीं है। आजम खान की मुश्किलों का केंद्र बिंदु उनकी ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाने वाली मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी है। 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कई मामले सामने आए। आरोप है कि आजम खान ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी के निर्माण में छह सरकारी विभागों से 106 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई थी, जिसमें जल निगम ने 53.56 करोड़ रुपये, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण और संस्कृति विभाग ने भी योगदान दिया था। यह खर्च नियमों के विपरीत माना गया है।

इसके अलावा, फरवरी 2025 में सामने आए एक मामले में यूनिवर्सिटी में छात्रावास निर्माण के लिए केंद्र सरकार से मिली 93.48 लाख रुपये की राशि के दुरुपयोग का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि स्वीकृत भूमि (गाटा-1153) पर निर्माण नहीं हुआ, बल्कि गाटा-1445 पर अधूरा छात्रावास बनाया गया, जिसके कारण केंद्र सरकार ने राशि वापसी की मांग की है।

ED और IT की जांच ने बढ़ाई मुश्किलें

आयकर विभाग ने 2023 में जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें कई अहम दस्तावेज बरामद हुए। इन दस्तावेजों से पता चला कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन का उपयोग किया गया, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच कर सकता है। इसके अलावा, शत्रु संपत्ति को यूनिवर्सिटी में मिलाने के आरोपों ने भी जांच को नई दिशा दी है। 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्व विभाग ने डीजीपीएस मशीन से शत्रु संपत्ति की जांच की, जिसकी 13.84 हेक्टेयर भूमि यूनिवर्सिटी परिसर में शामिल होने की बात सामने आई।

2022 में एक अन्य मामले में जौहर यूनिवर्सिटी से मदरसा आलिया का चोरी हुआ फर्नीचर और अलमारियां बरामद हुई थीं, जिसने आजम खान और उनके करीबियों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। इन सभी मामलों ने जांच एजेंसियों का शिकंजा और कड़ा कर दिया है।

सियासी हलचल और भविष्य की संभावनाएं

आजम खान की रिहाई के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या वे समाजवादी पार्टी के साथ बने रहेंगे या नया सियासी रास्ता चुनेंगे। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि आजम खान को मुश्किल वक्त में अकेला छोड़ दिया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि आजम खान को नई पार्टी बनाकर 2027 के चुनाव में अपनी ताकत दिखानी चाहिए।

आजम खान का अगला कदम क्या?

जेल से रिहाई के बाद आजम खान ने मीडिया से कोई बात नहीं की और न ही अपने अगले कदम का कोई संकेत दिया। उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया, लेकिन सीतापुर जेल के बाहर ट्रैफिक नियम तोड़ने पर उनके समर्थकों की 73 गाड़ियों का चालान भी काटा गया।

Ramswaroop Mantri

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