डॉ. विकास मानव
पूर्व-कथन : हम अपने बच्चों के लिए अपना सबकुछ खपा देते हैं. उनका बौद्धिक, आत्मिक, सामाजिक, नैतिक यानी वहु-आयामी विकास कैसे हो : यह हम सोचते तो हैं, लेकिन कुछ कर नहीं पाते. हमारे पास समय नहीं है और हम खुद में चारित्रिक बदलाव भी नहीं ला पाते– इसलिए.
यह दायित्व एजुकेशन और पब्लिकेशन इंडस्ट्री के लोगों को निभाना चाहिए. उनके पास भी बच्चे हैं. बेहतर नई पीढ़ी का निर्माण उनका भी दायित्व है. बच्चों के लिए किस तरह के चैप्टर रेडी किए जाएं, उनको कैसे पढ़ाया जाए : यह ध्यान में रखना चाहिए : ख़ासकर NCERT को, क्योंकि तमाम पब्लिकेशन और पब्लिक स्कूल उसी की नकल करते हैं.
हमारा न्यूज पोर्टल ‘अग्नि अलोक’ एक प्रारूप आज पेश कर रहा है. यह पाठ तीसरी कक्षा के बच्चों के लिए लिखा गया है. सीखें, प्रेरणा लें लेकिन इसका कमर्शियल उपयोग नहीं करें. ऐसा करना कॉपीराइट प्रविधान का उल्लंघ होगा. यह पाठ मैंने अपने मित्र के पब्लिकेशन के लिए रेडी किया है. इसका उपयोग वही करेंगे. प्रकाशक या पब्लिक स्कूल अपनी सारी किताबें मौलिक रूप से, हमसे लिखवा सकते हैं.
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पाठ में प्रवेश से पहले : हमारा देश भारत गाँवों में बसता हैI भारत कृषि प्रधान देश हैI यह दोनों बातें आप स्नातक और उसके आगे तक भी पढ़ेंगेI यहाँ एक गाँव और उसके बच्चों की तस्वीर देखिए :
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समयपुर गाँव से विकास कोसों दूर थाI बिजली नहीं थीI जल निकासी की कोई व्यवस्था भी नहीं थीI कुछ रास्ते खुद से बने थेI कुछ रास्ते गाँव के बड़े- बूढ़े लोग बनाए थेI सभी रास्ते पट गए थेI जाम हो गए थेI बच्चों के लिए विद्यालय जाने का भी कोई ढंग का रास्ता नहीं थाI सब जगह कीचड़, गन्दगीI बरसात में तो और बुरा हाल रहता थाI
बड़ों की अपनी व्यस्तताएं थीI उनका काम तो जैसे-तैसे चल ही जाता थाI उन्होंनें गाँव की इस सूरत को लेकर कभी विचार ही नहीं कियाI दिक्कत तो बच्चों को होती थीI कीचड़ के कारण वे गिरते-पड़ते भी रहते थेI
बच्चों ने इन समस्याओं से परेशान होकर एक बालसभा का आयोजन कियाI यह बालसभा पंचायत के रूप में आयोजित हुईI इसलिए कि समस्याओं का समाधान खोजना थाI
मुखिया की भूमिका निभा रहे बच्चे ने सबको सम्बोधित किया :
“साथियों! समस्या हमारी है तो समाधान भी हमें ही खोजना होगाI एक- दूसरे का मुँह ताकने रहने से, या हालात को कोसने से कुछ लाभ नहीं होताI इससे केवल नकारात्मकता आती हैI हम अलग-अलग आयु के हैं, लेकिन मित्र हैंI कोई यहां छोटा-बड़ा नहीं हैI सबकी सलाह ली जाएगीI फिर उनमें से विचार करके आगे का कदम उठाया जाएगाI आप लोग अपना-अपना विचार बारी- बारी से रखेंI
सबसे पहले केशव बोला, ”हम सरकार तक अपनी बात पहुँचाते हैंI बिजली आ जाएगी तो मज़ा आएगाI”
यार, ये लम्बा समय लेने वाला उपाय हैI बिजली उतनी बड़ी समस्या नहीं हैI पेड़-पौधों की हरियाली से भरे हमारे गाँव में गर्मी नहीं लगती हैI दीयाबाती, लालटेन से हम रोशनी कर ही लेते हैंI विजली देना सरकार का काम हैI इसके लिए बहुत सारे खम्भे – तार, ट्रांसफार्मर आदि चाहिएI यह जब सम्भव होगा, सरकार करेगीI” अनिल ने जवाब दियाI
सरिता बोली, “चलो सब लोग कल से भगवान से रोज प्रार्थना करते हैंI एक दिन तो वह सुनेगा हीI सब ठीक कर देगाI”
मीना ने जबाब दिया, “बहना! भगवान तभी कुछ करेगा, जब हम कुछ करेंगेI भगवान उसी की मदद करता है, जो अपनी मदद खुद करने लगता हैI भगवान से काम नहीं करवाया जा सकताI उससे बुद्धि और शक्ति माँगी जानी चाहिएI इससे ही हम सही दिशा में, काम का काम कर सकेंगेI”
मयंक बोला, “तुम सब परी रानी को भूल गए क्या? उनको बोलते हैंI जादू की छड़ी घुमाकर सब चकाचक कर देंगीI”
यह सुनकर सभी बच्चे हँस पड़ेI मुखिया बने बच्चे ने कहा, “इसमें हँसने की क्या बात हैI मयंक सीधा-सादा और मासूम हैI परियों की कहानियाँ मनोरंजन के लिए होती हैंI वे सच नहीं होतीI इस बात को यह अभी नहीं समझता हैI”
चेतन बोला, “क्यों नहीं हम सब मिलकर रास्ते ठीक करेंI साफ-सफाई कर लेंI”
दिनेश ने जबाब दिया, “हम बच्चे हैं. बड़े नहीं हैं जो यह सब कर लेंगेI चलो अब सभा समाप्त की जायेI”
मुखिया ने सबको निर्णय सुनाया :
“देखो दोस्तों! बूंद- बूंद से घड़ा भरता हैI हम छोटे हैं तो क्या हुआI कोई भी काम बेकार नहीं जाताI कल से हम लोग सफाई अभियान शुरू कर रहे हैंI रास्ते भी ठीक करेंगेI दो-चार दिन में ही समस्या हल हो जाएगीI बस हिम्मत नहीं हारनी हैI”
अगले दिन सब बच्चे काम पर थेI किसी के हाथ में झाड़ू, किसी के हाथ में टोकरी, किसी के हाथ में फावड़ा, किसी के हाथ में कुदाल तो किसी के हाथ में खुरपीI दो लड़कियाँ एक बैनर लिए खड़ी थीI इस पर लिखा था :
*हमारा गाँव कैसा हो?*
*सुन्दर स्वर्ग जैसा हो!*
बच्चों को इस तरह काम करते देखकर बड़ों को बहुत अच्छा लगाI उन्होंने सोचा जब बच्चे इतना अच्छे से सोच सकते हैं, इतना सब कर सकते हैं तो हम क्यों नहींI
बड़ों का साथ मिलाI गाँव साफ-सुथरा हो गयाI रास्ते बन गएI नालियाँ भी ठीक हो गईI गाँव के मुखिया ने सभी बच्चों को सम्मानित कियाI
शिक्षण संकेत :
बेहतर बदलाव हालात के लिए दूसरों को जिम्मेदार बताकर कोसने, ईश्वर से प्रार्थना करने या कल्पना करने से नहीं आताI परिवर्तन के लिए कामना नहीं, क्रिया जरूरी होती हैI यह तथ्य बच्चों को समझाएँI
शब्द ज्ञान :
ढंग – तरीका
सूरत – रूप
दिक्क़त – परेशानी
बालसभा – बच्चों की सभा
पंचायत – निर्णय देने वाली गोष्ठी
मुखिया – प्रधान
आयु – उम्र
रोशनी – प्रकाश
शक्ति – ताकत
काम का काम – अच्छा नतीजा देने वाला काम
समाप्त – खत्म
वर्तनी ज्ञान :
गाँव – गांव
बच्चे – बच् चे
पंचायत – पन्चायत
लम्बा – लंबा
संभव – सम्भव
बुद्धि – बुद्दधि
शक्ति – शक् ति
बूँद – बूंद
नालियाँ – नालियां
सम्मानित – संमानित
अभ्यास :
बात बात में ~
- गॉव का नाम क्या था?
- लालटेन क्या होती है?
- बच्चों ने सभा क्यों आयोजित की?
- परियां क्या होती हैं?
- भगवान से आप क्या माँगना चाहेंगे?
लिखित : - गाँव की सूरत कैसी थी?
- बिजली की व्यवस्था के लिए क्या-क्या चाहिए होता है?
- गाँव के बड़े लोग समस्या क्यों नहीं सुलझा सके थे?
- सभा में क्या निर्णय लिया गया?
- सही विकल्प पर ✅ निशान लगाओ ~
क.भगवान से माँगना चाहिए ~
(¡)धन
(¡¡) महल
(¡¡¡)बुद्धि
(¡v)सबकुछ
ख. परियों की कहानियाँ होती हैं ~
(¡) उनको बुलाने के लिए I
(¡¡) जादू की छड़ी माँगने के लिए I
(¡¡¡)मनोरंजन के लिए I
(¡v)हमें वेवकूफ बनाने के लिए I
ग. भगवान उसकी मदद करता है, जो~
(¡) पूजा-पाठ करता है I
(¡¡) तीर्थ-व्रत करता है I
(¡¡¡) अपनी मदद खुद करता है I
(¡v) मनौती मानता है I
खेल शब्दों का :
- पाठ से उचित शब्द लेकर वाक्य पूरे करो ~
क. समयपुर…..से….कोसों दूर थाI
ख. कुछ…..खुद से बने थे. कुछ रास्ते गाँव के……… बनाए थेI
ग. ….. का साथ मिला. गाँव….. हो गयाI
घ. गाँव के……ने सभी…… को सम्मानित कियाI - बूँद- बूँद से घड़ा भरता हैI यहाँ बूँद शब्द दो बार आया हैI
इन शब्दों से वाक्य बनाओ-
क. जाते-जाते
ख. हँसते – हँसते
ग. पढ़ते – पढ़ते
भाषा संसार :
- इन शब्दों से ऐसे वाक्य बनाओ जो इस पाठ में नहीं आए हों –
क. साफ सुथरा
ख. चकाचक
ग. गिरते पड़ते
घ. सम्मानित - इन शब्दों का अर्थ देने वाला दूसरा शब्द (पर्यायवाची) लिखो –
क. विद्यालय
ख. रास्ता
ग. कदम
ग. मजा
कलाकारी :
चित्र बनाकर , पेन्सिल से रंग भरें –
झाड़ू
टोकरी
फावड़ा
कुदाल
खुरपी
खेल खेल में :
पाठ में आये शब्द खोजें और पहचान के लिए उन्हें पेन्सिल से रंगीन करेंI
शब्द पहेली :
| बा | री | स | मा | धा | न | क |
| ल | भ | म | द | द | बो | ध |
| स | ग | य | रो | प्र | धा | न |
| भा | वा | पु | ज | सा | थ | य |
| वै | न | र | गाँ | स् | व | र्ग |
| खु | र | पी | व | कु | दा | ल |
(समयपुर, गाँव, मदद, खुरपी, कुदाल, वैनर, समाधान, प्रधान, बालसभा, परी, बारी, साथ.)
पहेली : बूझो तो जानें
- हाथ आए तो सौ– सौ काटेI
जब थके तो पत्थर चाटे।I
उत्तर – चाकू - वह कौन सी चीज़ है जिसका रंग काला हैI वह उजाले में तो नजर आती है, परन्तु अंधरे में दिखाई नहीं पड़तीI
उत्तर – परछाई - कमर बांधकर घर में रहतीI
सुबह-शाम जरूरत है पड़तीII
उत्तर – झाड़ू - वह कौन है जो सुबह से लेकर शाम तक आसमान की ओर देखती रहती है।
उत्तर – सूरजमुखी - एक फूल यहां खिला
एक खिला कोलकाताI
अजब अजूबा हमने देखा
पत्ते के ऊपर पत्ता।I
उत्तर – फूलगोभी - सर्वेश के पिता के 4 बच्चे हैं :
सुरेश, रमेश, गणेशI चौथे का नाम बताइए ?
उत्तर – सर्वेश
खोजबीन :
किसी दिन किसान के पास या कृषिभवन जाएँI खेती में काम आने वाले उपकरणों को देखेंI खोजबीन करके जानें कि इनके प्राचीन रूप क्या थेI
आओ कुछ नया करें :
समान आकार के कोई भी दो पौधे अलग-अलग गमलों में लगा देंI दोनों की मिट्टी एक जैसी होI दोनों को खाद, पानी, हवा बराबर मिलनी चाहिएI
एक गमले को जाली से ढक दो, मानो उसकी सुरक्षा के लिए आप ऐसा किए होI
कुछ दिन बाद आपने क्या देखा? जाली वाले पौधे का विकास कम हुआ हैI क्यों?
इसलिए कि बंधन या कैद पौधे भी पसंद नहीं करतेI स्वतन्त्रता सबको चाहिए होती हैI आपको भी न? तो कभी किसी पक्षी को कैद मत करनाI
शिक्षण संकेत :
गाँधी जी कहते थे : स्वच्छ्ता में ईश्वर का वास होता हैI स्वच्छ्ता तन की, मन की, आस- पास की, गाँव- नगर की, देश की यानी समूचे जीवन की आवश्यक होती हैI यह बात बच्चो को उदाहरण सहित समझाएँI





