अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*‘‘कांतारा चैप्टर 1’ का हिस्सा होना सपने जैसा’, बोलीं रुक्मिणी वसंत*

Share

साउथ की अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत जल्द ही ‘कांतारा चैप्टर 1’ में ऋषभ शेट्टी के साथ नजर आएंगी। हाल ही में अमर उजाला से बातचीत में अभिनेत्री ने इस फिल्म से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

जब आपको यह फिल्म मिली तब कैसा महसूस हुआ? 

जब यह फिल्म मेरे पास आई तब मैं बहुत खुश हुई। ऋषभ सर पहले मेरी फिल्म ‘सप्त सगरदाचे एलो’ की तारीफ कर चुके थे और उनके शब्द मेरे लिए बहुत मायने रखते थे। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि इससे मुझे इतनी बड़ी फिल्म में काम करने का मौका मिलेगा। जब उन्होंने मुझसे फिल्म में शामिल होने को कहा, तो सच में ये सपना जैसा लग रहा था। जैसे-जैसे मैं कहानी और अपने किरदार को समझने लगी, मेरी उत्सुकता और बढ़ गई। थोड़ी घबराहट भी थी क्योंकि किरदार बड़ा था और कहानी में उसका महत्व काफी था, लेकिन ऋषभ सर का मुझ पर भरोसा देखकर मुझे आत्मविश्वास मिला। 

फिल्म में अपने किरदार को निभाने के लिए आपने किस तरह तैयारी की?
ऐसी फिल्म में काम करते वक्त मुझे पूरी तरह संस्कृति में डूब जाना जरूरी लगा, क्योंकि ‘कांतारा’ सिर्फ कहानी नहीं है …ये करावली क्षेत्र की परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। मेरे रोल के लिए, भूत-प्रेत और दैव पूजा को गहराई से समझना जरूरी था। लेखकों और ऋषभ सर ने इस प्रक्रिया में मेरी मदद की, सिर्फ रिवाज समझाने तक नहीं, बल्कि ये भी बताया कि ये समाज और लोगों की जिंदगी पर कैसे असर डालते हैं। पूरी फिल्म के दौरान अगर कोई चुनौती थी, तो वो शारीरिक कौशल की थी, जो मुझे अपने किरदार कनकावती को सही ढंग से जीवित दिखाने के लिए सीखनी पड़ी।

विज्ञापन

Rukmini Vasanth Exclusive Being A Part Of Kantara Chapter 1 And Working With Rishab Shetty Is Like Dream

सेट पर आपका पहला दिन कैसा था?
पहला दिन हमेशा ही थोड़ी उत्सुकता और थोड़ी घबराहट से भरा होता है। नया सेट, नया माहौल, सब कुछ नया। जब मैं ‘कांतारा चैप्टर 1’ के सेट पर पहुंची तो टीम पहले से एक महीने से शूट कर रही थी। मुझे उनकी गति में अपना स्थान ढूंढना पड़ा। शुक्र है कि शुरू में कुछ आसान सीन थे। इनमें ज्यादा डायलॉग नहीं थे, जिससे मुझे किरदार की बॉडी लैंग्वेज, नजर और अंदाज पर ध्यान देने का समय मिला। जब डायलॉग वाले सीन आए तो आवाज और दूसरे छोटे-छोटे पैमानों पर काम करना शुरू किया। 

गुलशन देवैया और ऋषभ शेट्टी ने सेट पर आपका कैसे साथ दिया?
ऋषभ सर शुरू से ही बहुत जुड़े रहे। उन्होंने लेखकों की कार्यशाला में भी भाग लिया, जिससे मुझे समझ आया कि एक युवरानी की शारीरिक भाषा कैसी होती है – वह कैसे चलती है, कैसे अपने आप को पेश करती है, उसके बोलने का अंदाज कैसा होना चाहिए? 
गुलशन सर के साथ काम करना भी बहुत प्रेरणादायक था। मैं हमेशा उनके काम को सराहती रही हूं, चाहे वो ‘द हॉन्टिंग’ हो या ‘मर्द को दर्द नहीं होता’। मुझे सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि वह कन्नड़ बेहद खूबसूरती से बोलते हैं। भले ही मैं यह जानती थी कि वह कूर्ग से हैं पर मुझे नहीं पता था कि वह दक्षिण कर्नाटक के इस खास डायलेक्ट में इतने सहज हैं। 

‘कांतारा’ का पहला भाग सफल रहा था। क्या आप पर यह फिल्म करते वक्त इस बात का दबाव था?
बिलकुल, जब पहला भाग सफल रहा हो तो दूसरा भाग अपने आप में ही बड़ी जिम्मेदारी लेकर आता है। हालांकि, हमारी टीम शुरू से ही इस बारे में बहुत समझदार रही। जिम्मेदारी और दबाव में फर्क है। दबाव कभी-कभी हमें रोक देता है, लेकिन जिम्मेदारी हमें प्रेरित करती है। टीम ने ये बहुत खूबसूरती से संभाला, ताकि जिम्मेदारी प्रेरित करे और काम भारी महसूस न हो। यही भावना पूरी टीम में थी, जिससे हम सब अपना बेस्ट दे सके।

‘बघीरा’, ‘मद्रासी’, ‘कांतारा चैप्टर 1’ और आगे ‘टॉक्सिक’। पिछला साल आपके लिए एक वरदान जैसा रहा। इस दौर को आप अपने करियर में कैसे देखती हैं?
ये साल मेरे लिए बेहद खास रहा। पिछले अक्तूबर से लेकर अब तक मुझे जो भी फिल्में मिली सभी एक दूसरे से काफी अलग थीं। मेरे लिए यह पूरा दौर प्रयोग और खुद को चुनौती देने वाला रहा है। इस दौरान मैंने दो काम किए, अपनी ताकत और कमजोरियों को जाना और खुद को बेहतर बनाया।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें