इंदौर
भय्यू महाराज ने 12 जून 2018 को अपनी कनपटी पर गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। मामले में शुक्रवार को जिला कोर्ट में अंतिम फैसला आने की उम्मीद है। जहां सभी साक्ष्य और गवाहों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका। आरोपी पक्ष द्वारा भय्यू महाराज का लिखा सुसाइड नोट पूरे मामले में अहम सबूत माना जा रहा है। वहीं अभियोजन पक्ष द्वारा तीनों आरोपियों के खिलाफ बहन और दूसरी पत्नी आयुषी को गवाह बना कर जिला कोर्ट में पेश किया जा चुका है।
आरोपी के वकील धर्मेंद्र गुर्जर ने बताया कि आत्महत्या के बाद पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला था वह हैंड राइटिंग भय्यू महाराज की थी। यह फॉरेंसिक लैब द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है। वहीं सुसाइड नोट में पूरी संपत्ति की जिम्मेदारी विनायक को ही दी गई थी। सुसाइड नोट में भैय्यू महाराज ने यह भी लिखा था कि वह बिना किसी दबाव के आत्महत्या कर रहे हैं। जबकि दबाव की बात को दो बार सुसाइड नोट में दोहराया गया था। आत्महत्या वाली घटना के 6 माह बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ विनायक शरद और पलक को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था। जहां घटना के 6 माह तक किसी प्रकार से किसी भी व्यक्ति परकोई आरोप नहीं लगाया गया था, लेकिन अचानक तीनों की गिरफ्तारी के बाद आरोपी के वकील ने पुलिस पर कई सवालिया निशान भी खड़े किए थे।
सुसाइड नोट सबसे बड़ा सबूत?
घटना के बाद लिखा गया सुसाइड नोट मिलने के बाद दूसरी पत्नी आयुषी ने यह आरोप लगाया था कि यह हैंडराइटिंग महाराज की नहीं है वह इंग्लिश में नहीं लिखा करते थे लेकिन फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद यह बिंदु भी साफ हो चुका है। कि सुसाइड नोट की लिखावट भय्यु महाराज की थी
ब्लैकमेलिंग के नही मिले साक्ष्य —
अभियोजन द्वारा जहां विनायक शरद और पलक पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया गया था उसके किसी भी तरह से कोई शक या सबूत कोर्ट के सामने पेश नहीं किए गए वहीं भय्यू महाराज की बहन और आयुषी द्वारा ही ब्लैक मेलिंग करने का पूरा आरोप लगाया गया था।
बेटी कुहू ने सेवादार विनायक पर नहीं लगाए कोई आरोप
घटना के बाद जहां दूसरी पत्नी आयुषी द्वारा मुख्य सेवादार विनायक और शरद पर ब्लैकमेलिंग वह पलक के साथ नाजायज रिश्ते की बात सामने आई थी। लेकिन आरोपी पक्ष द्वारा जो कोर्ट में सबूत पेश किए वह सभी इन बातों को नकारा करते हैं कि तीनों ही महाराज को किसी अनहोनी से बचाना चाहते थे। वहीं बेटी कुहू ने भी विनायक और शरद पर किसी तरह के आरोप कोर्ट के समक्ष नहीं लगाए थे।
पलक पर लगाये आरोपी मोबाइल चेटिंग से हुए साफ़
घटना के बाद जहां पलक पर भय्यू महाराज से संबंध की बात सामने आई थी। लेकिन पलक के मोबाइल से जो चैटिंग पुलिस को मिली थी उसकी फॉरेंसिक जांच होने के बाद यह सामने आया कि पलक महाराज को बचाना चाहती थी। घटना के 24 घंटे पहले पलक और भय्यूजी महाराज के खिलाफ हो रहे षड्यंत्र से उन्हें बचाने की बात हुई मोबाइल सेटिंग में ही साफ हो पाई थी।