ओवैसी की AIMIM ने पलट दी पूरी बाजी, 75 से अधिक सीटों पर कब्जा, MVA का दिया जोर का झटका
महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत 29 निकाय चुनावों के नतीजे आज शुक्रवार को घोषित हो रहे हैं. BMC चुनाव में अब तक के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वह सीट के लिहाज से शतक लगाने के करीब है. जबकि 3 दशक बाद ठाकरे बंधुओं का यहां से दबदबा खत्म होता दिख रहा है. वहीं मुंबई में एनसीपी के नेता नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को हार का सामना करना पड़ा है तो शिवसेना (शिंदे) सांसद की बेटी भी चुनाव हार गईं.महाराष्ट्र निकाय चुनाव में बीजेपी और शिंदे गठबंधन ने अधिकांश नगर निगमों में शानदार जीत दर्ज की है. मुंबई समेत कई शहरों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी. वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया, मालेगांव, संभाजीनगर और नांदेड़ जैसे शहरों में कई सीटें जीतीं. AIMIM के मजबूत प्रदर्शन ने महाविकास अघाड़ी को नुकसान पहुंचाया है. एक तरह से यह कह सकते हैं कि मुंबई में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब बीजेपी का मेयर होगा. दूसरी ओर ठाकरे बंधुओं का किला ढहने के कगार पर है.
बीएमसी चुनाव में अब तक 225 सीटों पर आए रुझान में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनती जा रही है. उसे अकेले 99 सीटों पर बढ़त हासिल हो गई है तो शिवसेना (UBT) को 62 तो राज ठाकरे की एमएनएस को 9 सीटों पर ही बढ़त मिली. एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 31 सीटों पर बढ़त है. जबकि कांग्रेस 13 सीटों पर आगे चल रही है.
BMC में अजित पवार का खाता नहीं खुला
मुंबई में अजित पवार की एनसीपी का बीएमसी में खाता खुलता नहीं दिख रहा जबकि शरद पवार की एनसीपी की बढ़त बढ़कर 3 सीटों पर हो गई है. इस बीच शिंदे की शिवसेना के सांसद रविंद्र वायकर की बेटी दीप्ति वायकर को जोगेशरी से हार का सामना करना पड़ा है. नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को भी मुंबई में हार का सामना करना पड़ा है.
बीएमसी के अलावा नवी मुंबई, पुणे, नागपुर, सोलापुर, पनवेल, अकोला, उल्हासनगर, वसाई विरार, धुले, कोल्हापुर और जलगांव समेत कई नगरपालिका चुनावों में बीजेपी की लगातार बढ़त बनी हुई है. जबकि चंद्रपुर में कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी. कांग्रेस यहां पर 16 सीटों पर आगे है तो बीजेपी को 10 सीटों पर बढ़त मिली है.
बीएमसी चुनाव में वार्ड नंबर 111 से युबीटी के दीपक सावंत ने जीत हासिल की है. वहीं, वार्ड नंबर 197 से शिवसेना शिंदे गुट की दीक्षा कारकर को जीत मिली है. दहिसार वार्ड नंबर 5 से शिवसेना शिंदे उम्मीदवार संजय घाड़ी विजयी हुए हैं.
लातूर में भी कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ा
लातूर में भी कांग्रेस का प्रदर्शन शानदार रहा. कांग्रेस को यहां 36 तो बीजेपी को 22 सीटों पर बढ़त हासिल हुई है. इसी तरह परभणी में शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को बड़ी बढ़त है. बीजेपी यहां दूसरे नंबर पर है. पिपरी चिंचवाड भी बीजेपी बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है.
मुंबई के अलावा सबसे दिलचस्प नतीजे पुणे से आ रहे हैं. यहां पर बीजेपी और एनसीपी आमने-सामने थे, लेकिन बीजेपी लड़ाई में काफी आगे निकल गई. अजित पवार की एनसीपी को महज 6 सीटों पर बढ़त हासिल हो सकी है, जबकि शरद पवार की पार्टी को 3 सीटों पर ही बढ़त हासिल हुई. बीजेपी को यहां पर 92 में 80 सीटों पर बढ़त है. 3 सीटों पर कांग्रेस की बढ़त है. इसके अलावा नागपुर में भी बीजेपी का दबदबा कायम नजर आ रहा है. महाराष्ट्र निकाय चुनाव का पहला परिणाम कोल्हापुर से आया और 4 सीट बीजेपी के खाते में गई.
ऐसे हो रही काउंटिंग
अलग-अलग जगहों पर 23 काउंटिंग रूम बनाए गए हैं. इस काउंटिंग प्रोसेस के लिए तैयार किए गए डिटेल्ड प्लान को म्युनिसिपल कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर भूषण गगरानी ने मंज़ूरी दे दी है. काउंटिंग प्रोसेस इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक, मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट का सख्ती से पालन करते हुए पूरी की जाएगी. काउंटिंग के दौरान सिक्योरिटी अरेंजमेंट, ट्रैफिक प्लानिंग और लॉ एंड ऑर्डर को लेकर ज़रूरी सावधानी बरती गई है.
23 इलेक्शन डिसीजन ऑफिसर नियुक्त
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन जनरल इलेक्शन 2025-26 के अनुसार, म्युनिसिपल एरिया के अंदर कुल 227 इलेक्शन वार्ड के लिए कुल 23 इलेक्शन डिसीजन ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं. काउंटिंग प्रोसेस के लिए हर इलेक्शन डिसीजन ऑफिसर के ऑफिस के तहत एक स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग की जगहें तय की गई हैं. इन सभी जगहों को पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD), पुलिस डिपार्टमेंट से ज़रूरी अप्रूवल मिल गया है.
काउंटिंग सिस्टम को किया गया रिव्यू
म्युनिसिपल कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर भूषण गगरानी की तरफ से काउंटिंग सिस्टम का रिव्यू किया. एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (सिटी) डॉ. (मिसेज) अश्विनी जोशी, स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर (इलेक्शन) विजय बालमवार, जॉइंट कमिश्नर (टैक्स असेसमेंट एंड कलेक्शन) विश्वास शंकरवार, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (कोंकण डिवीज़न) फरोग मुकादम, असिस्टेंट कमिश्नर (टैक्स असेसमेंट एंड कलेक्शन) गजानन बेल्लाले, डिप्टी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर महादेव किरवाले और 23 रिटर्निंग ऑफिसर (R.O.) मौजूद थे.
म्युनिसिपल कमिश्नर गगरानी ने कहा कि काउंटिंग प्रोसेस माननीय इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया की सभी गाइडलाइंस को सख्ती से फॉलो करते हुए किया जाएगा. ट्रांसपेरेंट, स्मूद और टाइम पर काउंटिंग प्रोसेस पक्का करने के लिए सभी जरूरी डिटेल्स पूरी कर ली गई हैं. काउंटिंग सेंटर्स के डिज़ाइन और प्लानिंग, टेबल लेआउट, ऑफिसर्स और स्टाफ की अपॉइंटमेंट, सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स, CCTV सिस्टम, साथ ही फायर और मेडिकल फैसिलिटीज़ की डिटेल्स को डिटेल्ड रिव्यू के बाद फाइनल कर लिया गया है. काउंटिंग के दौरान कोई लॉ एंड ऑर्डर इशू न हो, इसके लिए पुलिस डिपार्टमेंट के साथ कोऑर्डिनेशन किया गया है. ज़रूरी सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स तैनात किए गए हैं.
ट्रंसपेरेंसी के लिए क्या?
गगरानी ने यह भी बताया कि काउंटिंग के लिए 779 सुपरवाइज़र और 770 असिस्टेंट के साथ 770 क्लास IV एम्प्लॉई अपॉइंट किए गए हैं. काउंटिंग ऑफिसर, सुपरवाइज़र और असिस्टेंट को प्री-ट्रेनिंग दी जा चुकी है. काउंटिंग सेंटर एरिया में ट्रैफिक कंट्रोल, पार्किंग अरेंजमेंट और मीडिया के लिए अलग कमरे बनाए गए हैं. रिज़ल्ट अनाउंस करते समय एक्यूरेसी और ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है.
ऑथराइज़्ड रिप्रेजेंटेटिव, कैंडिडेट और मीडिया रिप्रेजेंटेटिव को काउंटिंग प्रोसेस के लिए समय पर मौजूद रहना होगा. सिर्फ़ वही एलिजिबल लोग काउंटिंग की जगह पर जा सकेंगे जिन्हें इलेक्शन डिपार्टमेंट ने काउंटिंग प्रोसेस के लिए आइडेंटिटी कार्ड जारी किए हैं. स्टेट इलेक्शन कमीशन, महाराष्ट्र के दिए गए इंस्ट्रक्शन को मानना ज़रूरी है. म्युनिसिपल कमिश्नर गगरानी ने सभी संबंधित डिपार्टमेंट को कोऑर्डिनेशन से काम करने का निर्देश दिया है ताकि काउंटिंग प्रोसेस शांतिपूर्ण और भरोसेमंद तरीके से हो और लोगों का डेमोक्रेसी में भरोसा मज़बूत हो.
बीएमसी समेत राज्य की 29 नगर निगमों में से अधिकतर में बीजेपी का डंका बचा है. बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति ने (बीजेपी+शिंदे) ने शानदार प्रदर्शन किया है. अधिकांश नगर निगमों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. मुंबई में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना का सत्ता में आना स्पष्ट है. दूसरी ओर इस बार के निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भी अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है.

राज्य में एमआईएम ने मालेगांव, मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, धुले, नांदेड़ जैसे कुछ अन्य नगर निगमों में बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही है. राज्य भर में कुल 74 एमआईएम उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं. मुंबई में पांच एमआईएम उम्मीदवार आगे चल रहे हैं. संभाजीनगर में 24 एमआईएम उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं.अमरावती में 6 एमआईएम उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं. मालेगांव में एमआईएम ने 20 सीटें जीती हैं.
मालेगांव में सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है AIMIM
मालेगांव में यह पार्टी सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन सकती है. नांदेड़ नगर निगम में एमआईएम के दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरने की संभावना है. यहां 14 एमआईएम पार्षद निर्वाचित हुए हैं. धुले नगर निगम में भी एमआईएम ने 8 सीटें जीती हैं. जालना में एमआईएम ने दो सीटें जीती हैं.
समाजवादी पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
समाजवादी पार्टी ने भी कुछ क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया है. मालेगांव में एमआईएम के छह उम्मीदवार विजयी हुए हैं. वहीं, एमआईएम पार्टी ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें उम्मीद के मुताबिक सफलता मिली है. मुंबई से लेकर मालेगांव और नांदेड़ तक, इस पार्टी के उम्मीदवार चुने गए हैं. पार्टी की समग्र ताकत को देखते हुए कहा जा रहा है कि इसके उम्मीदवारों का प्रदर्शन अच्छा रहा है. अब देखना यह होगा कि आगामी जिला परिषद चुनावों में इस पार्टी की रणनीति क्या होगी.
महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर कहा जा रहा है कि AIMIM के अलग लड़ने की वजह से महाविकास अघाड़ी में शामिल दलों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. पिछले के कई चुनाव में AIMIM कुछ ही सीटों पर सिमटी रहती थी, लेकिन इस बार उसने अपना बेस्ट प्रदर्शन करने में सफल रही है.
महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजे न सिर्फ राज्य की राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय सियासी संतुलन में भी हलचल पैदा कर रहे हैं. बीएमसी में एआईएमआईएम ने दो सीटें जीती हैं. नांदेड़ में पार्टी 14 सीटों पर आगे है. चुनाव में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का रहा. अहिल्यानगर और चंद्रपुर नगर निगमों में पार्टी ने पहली बार मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. अहिल्यानगर में AIMIM ने 3 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि चंद्रपुर में पार्टी ने अपना पहला प्रतिनिधि चुने जाने का रिकॉर्ड बनाया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सफलता AIMIM को महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक नई पहचान दे सकती है.
ओवैसी की पार्टी कहां आगे
लगभग नौ साल बाद हुए इन चुनावों में इस बार मुकाबला ज्यादा तीखा, बहुकोणीय और अप्रत्याशित रहा. राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन चुनावों में 3.48 करोड़ मतदाताओं ने 15,931 उम्मीदवारों का भाग्य तय किया, जिसमें मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे, नवी मुंबई, कोल्हापुर जैसे प्रमुख शहरी केंद्र शामिल थे. मतदान के बाद सामने आए रुझानों से साफ होता है कि मतदाताओं ने शहरी मुद्दों को केंद्र में रखकर अपने प्रतिनिधि चुने हैं.
इन निकाय चुनावों का सबसे बड़ा राजनीतिक आयाम यह रहा कि भाजपा‑शिंदे के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन लगभग सभी प्रमुख नगर निगमों में बढ़त बनाए हुए है. शुरुआती रुझानों में महायुति गठबंधन 1200 से अधिक सीटों पर आगे दिखा, जबकि उद्धव ठाकरे‑राज ठाकरे के गठबंधन को मिलकर भी 120 से कम सीटों पर बढ़त मिल सकी. यह स्पष्ट संकेत है कि मुंबई से लेकर विदर्भ तक भाजपा की शहरी पकड़ मजबूत बनी हुई है.





