शशिकांत गुप्ते
आज सीतारामजी पूर्ण रूप से व्यंग्यकार की मानसिकता में हैं।
मुझ से मिलते ही सीतारामजी ने एक खबर सुनाई देश के रक्षा मंत्री के दोनो बेटे विधानसभा का चुनाव लड़ने वालें हैं। एक बेटा गौतमबुद्ध नगर से और एक लखनऊ कैंट से चुनाव मैदान में है।
यह खबर सुनकर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। मैने कहा यह तो प्रशंसनीय खबर है।
सीतारामजी कहने लगे उन तमाम दलों के कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओं को नमना करता हूँ। जो दल कार्यकर्तों को दरकिनार कर अपनी संतानों की चुनाव में उम्मीदवार बनातें हैं। कारण यह ज़मीनी कार्यकर्ता जाजम बिछाने के लिए, कुर्सियों को करीने से लगा के लिए,अपने नेता के जय जयकार और जिंदाबाद करने के लिए और विरोधी नेता के लिए, मुर्दाबाद के नारे लगाने के लिए अभिशप्त होतें हैं।
मै समझ गया आज सीतारामजी के व्यंग्यबाण रुकने वाले नहीं है।
सीतारामजी अपनी बात को जारी रखते हुए कहने लगे दूसरें राजनैतिक दलों पर ये गलोग वंशवाद,परिवारवाद का आरोप लगातें हैं। और स्वयं अपनी संतानों को टिकिट देतें हैं।
मैंने कहा यह आस्थावान लोग हैं। इन लोगों की जो मातृसंस्था है, वह खालिस अराजनैतिक संस्था है। इसे विशाल परिवार कहा जाता है। यह शुद्ध सांस्कृतिक संगठन है।
यह लोग राष्ट्रवादी लोग हैं। यह लोग अपने बेटों बेटियों को उनकी योग्यता के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार बनातें हैं।
यह धार्मिक लोग हैं।
द्वापरयुग में भगवान ने कोई भी शस्त्र नहीं उठाने की कसम खाई थी। लेकिन जब शस्त्र उठाने के भगवान को मजबूर होना पड़ा तब भगवान ने रथ के पहिये को प्रतीकात्मक शस्त्र के रूप में उठाया था।
कलयुग में आस्थावान लोगों की संताने चुनाव में निर्वाचित होने के बाद,आधुनिकता में विश्वास रखतें हुए,सामंती खेल, क्रिकेट की बैट का इस्तेमाल प्रशासनिक अधिकारियों को उनके कर्तव्य का एहसास करना के लिए करती है।
इनलोगों के द्वारा किया गया,यह कृत्य इस उक्ति को भी प्रमाणित करता हैं कि, युद्ध,प्रेम,खेल और राजनीति में सब जायज़ है।
यह लोग धर्म पर अथाह विश्वास रखतें हैं। इसीलिए इनलोगों को सहयोग करने लिए पवित्र वस्त्र धारण करने वाले साधु और साध्वियां भी सक्रिय हो जातीं हैं।
यह लोग अपने द्वारा किए गए वादों को निभाने के लिए कटिबद्ध होतें हैं।
सीतारामजी कहने लगे इनके वादे सिर्फ विज्ञापनों में दिखाई देतें हैं। व्यवहार में एक भी वादा पूर्ण नहीं कर पाएं हैं?
मैने कहा इन्हें सत्ता संभाले अभी कुल आठ वर्ष ही हुएं हैं। पिछले सत्तर वर्षो का कचरा स्वच्छ करने में समय तो लगेगा?
सीतारामजी कहने लगे बढ़ती महंगाई से आमजन त्रस्त हैं।
मैने कहा, यह आपका नकारात्मक सोच है। इनलोगों ने गरीब जनता को भी महंगा राशन खरीदने के लिए अभस्त कर दिया है। यह इनकी गरीबी मिटाने की अप्रत्यक्ष योजना है।
सीतारामजी ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया?
मैने कहा आपकी निश्चित ही विरोधियों से सांठ गांठ हो गई है?
इसीलिए आप यह सारे सवाल उठा रहे हो? शायद आपको ज्ञात नहीं है, अधिकांश समस्याएं पूर्व की सरकारों द्वारा निर्मित की है। सत्तर वर्षों तक उन लोगों ने कुछ किया ही नहीं?
इनलोगों को तो अभी जुम्मा जुम्मा अभी आठ ही वर्ष होने को है?
सीतारामजी मुझपर क्रोधित हो गए और कहने लगे, आज आपकों क्या हो गया है।आज आप गोदी मीडिया के एंकर की तरह बात कर रहे हो?
गोदी मीडिया के एंकर का आरोप लगतें ही मै चुप हो गया।कारण मैं गोदी मीडिया के एंकर जैसा ही निरुत्तर हो गया।
सीतारामजी मुझपर गोदी मीडिया के एंकर का आरोप लगाने के साथ ही पक्षपात का आरोप भी लग सकतें थे। इसलिए मैने चर्चा को यहीँ पूर्ण विराम लगाया।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





